चंडीगढ़। देशभर में तेजी से बढ़ रहे साइबर फ्रॉड और तथाकथित ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसे मामलों के बीच हरियाणा पुलिस ने एक अहम पहल शुरू की है। ठगी की घटनाओं पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से ‘डबल OTP’ (डुअल ऑथेंटिकेशन) सिस्टम लागू किया जा रहा है, जो खासतौर पर वरिष्ठ नागरिकों को वित्तीय धोखाधड़ी से बचाने के लिए तैयार किया गया है।
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, यह सिस्टम वित्तीय लेन-देन के दौरान एक अतिरिक्त सुरक्षा परत जोड़ता है, जिससे ठगों द्वारा मनोवैज्ञानिक दबाव बनाकर पैसे निकलवाने की कोशिशों को काफी हद तक रोका जा सकेगा। इस पहल का मुख्य लक्ष्य 60 वर्ष से अधिक आयु के लोग हैं, जिन्हें साइबर अपराधी अक्सर आसान निशाना बनाते हैं।
इस सिस्टम के तहत किसी भी बड़े वित्तीय ट्रांजैक्शन के दौरान एक के बजाय दो अलग-अलग OTP (वन टाइम पासवर्ड) की आवश्यकता होगी। पहला OTP सामान्य प्रक्रिया के तहत आएगा, जबकि दूसरा OTP एक अतिरिक्त सत्यापन चरण के रूप में कार्य करेगा। इससे यदि कोई व्यक्ति दबाव या भ्रम की स्थिति में पहला OTP साझा कर भी देता है, तो दूसरा OTP सुरक्षा की एक मजबूत दीवार बनकर खड़ा रहेगा।
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प्रारंभिक चरण में इस सिस्टम को गुरुग्राम और पंचकुला में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर लागू किया गया है। शुरुआती नतीजों में यह सामने आया है कि डबल OTP के कारण साइबर ठगी के प्रयासों की सफलता दर में उल्लेखनीय गिरावट आई है। खासकर वे मामले, जिनमें ठग फोन कॉल के जरिए खुद को पुलिस अधिकारी, बैंक अधिकारी या सरकारी एजेंसी का प्रतिनिधि बताकर लोगों को डराते या भ्रमित करते हैं, उनमें यह प्रणाली प्रभावी साबित हो रही है।
जानकारी के अनुसार, इस पहल को एक प्रमुख निजी बैंक के सहयोग से विकसित किया गया है, ताकि बैंकिंग सिस्टम के साथ सहज एकीकरण सुनिश्चित किया जा सके। अधिकारियों का मानना है कि तकनीक और जागरूकता के संयोजन से ही साइबर अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसे मामलों में ठग पहले पीड़ित को डराते हैं कि उनके खिलाफ कोई गंभीर मामला दर्ज है, और फिर ‘जांच’ या ‘सेटलमेंट’ के नाम पर पैसे ट्रांसफर करने के लिए मजबूर करते हैं। ऐसे मामलों में लोग घबराकर बिना सोचे-समझे OTP साझा कर देते हैं, जिससे उनके बैंक खाते खाली हो जाते हैं।
प्रसिद्ध साइबर अपराध विशेषज्ञ और पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह के अनुसार, “साइबर अपराधी सोशल इंजीनियरिंग के जरिए लोगों की मानसिक स्थिति पर नियंत्रण पाने की कोशिश करते हैं। डबल OTP जैसी व्यवस्था इस चेन को तोड़ने में कारगर साबित हो सकती है, क्योंकि यह व्यक्ति को सोचने का अतिरिक्त समय और सुरक्षा दोनों देती है।”
हरियाणा पुलिस का मानना है कि यदि यह मॉडल सफल रहता है, तो इसे राज्यभर में लागू किया जाएगा और बाद में अन्य आयु वर्ग के लोगों को भी इसके दायरे में लाया जा सकता है। इसके साथ ही, आम जनता को जागरूक करने के लिए विशेष अभियान भी चलाए जा रहे हैं, जिनमें साइबर ठगी के नए तरीकों और उनसे बचाव के उपायों की जानकारी दी जा रही है।
इस पहल ने यह स्पष्ट संकेत दिया है कि साइबर अपराध से लड़ाई केवल कानून-व्यवस्था का नहीं, बल्कि तकनीकी नवाचार और जन-जागरूकता का भी विषय है। बदलते डिजिटल दौर में सुरक्षा के नए उपाय अपनाना समय की जरूरत बन चुका है।
विशेषज्ञों की सलाह है कि किसी भी परिस्थिति में OTP, बैंक डिटेल्स या निजी जानकारी किसी अनजान व्यक्ति के साथ साझा न करें। यदि कोई व्यक्ति खुद को अधिकारी बताकर दबाव बनाता है, तो तुरंत कॉल काट दें और संबंधित संस्था से सीधे संपर्क कर सत्यता की जांच करें।
हरियाणा पुलिस की यह पहल अन्य राज्यों के लिए भी एक मॉडल बन सकती है, जहां साइबर अपराध तेजी से बढ़ रहे हैं और लोगों की मेहनत की कमाई पर खतरा मंडरा रहा है।
