बिलासपुर: Chhattisgarh High Court ने फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) घोटाले से जुड़े एक अहम मामले में आरोपी अनिल सिंह को जमानत दे दी है। अदालत ने यह फैसला इस आधार पर सुनाया कि मामले की जांच लगभग पूरी हो चुकी है और आगे की पूछताछ के लिए आरोपी को हिरासत में रखना आवश्यक नहीं है।
यह मामला GST के तहत कथित तौर पर गलत तरीके से ITC हासिल करने से जुड़ा है, जिसमें आरोप है कि बिना किसी वास्तविक लेनदेन के फर्जी बिलिंग के जरिए सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाया गया। आरोपी अनिल सिंह 16 जनवरी 2026 से न्यायिक हिरासत में था और उसने नियमित जमानत के लिए आवेदन दायर किया था।
जांच के दौरान सामने आया कि रामदूत एंटरप्राइजेज नामक फर्म की जांच में दो अन्य कंपनियों—सोनम सेल और युवराज ट्रेडिंग—की भूमिका संदिग्ध पाई गई। इन कंपनियों में अनिल सिंह निदेशक के रूप में जुड़ा हुआ था। आरोप है कि इन फर्मों के जरिए बोगस बिलिंग का नेटवर्क तैयार किया गया, जिसके माध्यम से बिना किसी वास्तविक माल की आपूर्ति के ITC का दावा किया गया।
सूत्रों के अनुसार, आरोपी ने फर्जी इनवॉइस के आधार पर ITC का लाभ लिया, जो कथित तौर पर WhatsApp जैसे डिजिटल माध्यमों के जरिए प्राप्त किए गए थे। इन लेनदेन के समर्थन में कोई ई-वे बिल, ट्रांसपोर्ट रसीद या माल की वास्तविक आवाजाही से जुड़े दस्तावेज नहीं पाए गए, जिससे पूरे मामले में फर्जीवाड़े की आशंका मजबूत हुई।
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विभाग की ओर से अदालत में यह दलील दी गई कि आरोपी इस पूरे घोटाले में एक महत्वपूर्ण कड़ी है और उसके कार्यों के कारण सरकार को भारी राजस्व नुकसान हुआ है। विभाग ने यह भी आशंका जताई कि यदि आरोपी को जमानत दी जाती है, तो वह साक्ष्यों से छेड़छाड़ कर सकता है या गवाहों को प्रभावित कर सकता है।
वहीं, बचाव पक्ष ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि अनिल सिंह को झूठा फंसाया गया है और उसके खिलाफ कोई प्रत्यक्ष साक्ष्य नहीं है। वकील ने दलील दी कि अब तक की जांच में आरोपी के पास से कोई फर्जी इनवॉइस बरामद नहीं हुए हैं। साथ ही यह भी कहा गया कि जांच लगभग पूरी हो चुकी है और आगे की पूछताछ के लिए हिरासत की जरूरत नहीं है। आरोपी ने अदालत को यह भी आश्वासन दिया कि वह जमानत की सभी शर्तों का पालन करेगा।
दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद हाई कोर्ट ने यह माना कि जांच एजेंसियों द्वारा आवश्यक साक्ष्य एकत्र किए जा चुके हैं। अदालत ने कहा कि आरोपी का बयान दर्ज किया जा चुका है और संबंधित स्थानों पर तलाशी भी पूरी हो चुकी है, ऐसे में आगे की हिरासत आवश्यक नहीं है।
इसी आधार पर अदालत ने आरोपी को जमानत देने का फैसला सुनाया। हालांकि, यह राहत कुछ शर्तों के साथ दी गई है। अदालत ने निर्देश दिया कि आरोपी को ₹1,00,000 के निजी मुचलके और एक जमानती के साथ रिहा किया जाएगा। साथ ही, उसे जांच में सहयोग करने और अदालत के निर्देशों का पालन करने के लिए बाध्य किया गया है।
यह मामला एक बार फिर GST प्रणाली में फर्जी ITC क्लेम के जरिए होने वाले घोटालों की गंभीरता को उजागर करता है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह के मामलों में शेल कंपनियों और फर्जी बिलिंग के जरिए टैक्स क्रेडिट का दुरुपयोग किया जाता है, जिससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान होता है।
प्रसिद्ध साइबर अपराध विशेषज्ञ और पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह का कहना है, “डिजिटल माध्यमों के बढ़ते उपयोग के साथ आर्थिक अपराधों के तरीके भी बदल रहे हैं। फर्जी इनवॉइस और वर्चुअल लेनदेन के जरिए अपराधी सिस्टम की खामियों का फायदा उठाते हैं, जिससे ऐसे मामलों की जांच और भी चुनौतीपूर्ण हो जाती है।”
फिलहाल, मामले की आगे की सुनवाई जारी रहेगी और अंतिम निर्णय अदालत द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर लिया जाएगा। यह देखना अहम होगा कि जांच एजेंसियां इस नेटवर्क की पूरी परतें उजागर कर पाती हैं या नहीं, और क्या इस घोटाले में अन्य लोगों की संलिप्तता भी सामने आती है।
