नोएडा: नोएडा साइबर क्राइम थाना ने तकनीकी सूचना और स्थानीय इंटेलिजेंस के आधार पर एक बड़े अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी गिरोह का खुलासा किया है। पुलिस ने सेक्टर 76 से चार शातिर अपराधियों को गिरफ्तार किया, जो ‘टेक सपोर्ट’ के नाम पर विदेशी नागरिकों को अपना शिकार बना रहे थे।
जांच में सामने आया कि अभियुक्त इंटरनेट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पेड विज्ञापन चला कर फर्जी टोल-फ्री नंबर प्रदर्शित करते थे। जब कोई विदेशी नागरिक इन नंबरों पर कॉल करता, तो कॉल उनके लैपटॉप पर स्थापित सॉफ्टवेयर के जरिए रिसीव होती। खुद को तकनीकी सहायता एजेंट बताकर अभियुक्त पीड़ितों को विश्वास दिलाते कि उनका कंप्यूटर या डिवाइस हैक हो गया है। इसके बाद वे AnyDesk या TeamViewer जैसे रिमोट डेस्कटॉप एप्स के माध्यम से पीड़ित का सिस्टम एक्सेस कर लेते थे।
एक बार एक्सेस मिलने के बाद, अभियुक्त स्क्रीन को ब्लैक करने जैसे तरीकों से पीड़ित को डराते और उनके बैंकिंग क्रेडेंशियल चुरा लेते। छोटे अकाउंट में $350 से $2,000 तक वसूली की जाती, जबकि बड़ी रकम होने पर कॉल “सीनियर एजेंट” को ट्रांसफर कर दी जाती थी।
पुलिस की कार्रवाई और सबूत
रैड के दौरान पुलिस ने बड़ी संख्या में लैपटॉप, मोबाइल और अन्य डिजिटल उपकरण जब्त किए। प्रारंभिक जांच में यह पता चला कि गिरोह ने कई पीड़ितों से करोड़ों रुपये की ठगी की थी। अवैध धन को ट्रैक से बचाने के लिए अपराधियों ने क्रिप्टोकरेंसी में राशि परिवर्तित की और आपस में बाँट ली।
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डीसीपी साइबर, गौतमबुद्धनगर ने बताया कि टीम की समन्वित कार्रवाई ने इस अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क के चार मुख्य अभियुक्तों को पकड़ा। उन्होंने कहा, “गिरोह ने फर्जी विज्ञापनों और तकनीकी सहायता का दिखावा कर विदेशी नागरिकों को झांसा देकर सिस्टम का एक्सेस हासिल किया और वित्तीय धोखाधड़ी की।”
पूछताछ में सामने आया कि अभियुक्तों ने अब तक करोड़ों की ठगी की। जब्त डिजिटल उपकरणों में क्रिप्टो लेन-देन और विदेशी पीड़ितों के डेटा के महत्वपूर्ण सबूत मिले। पुलिस अब गिरोह के अन्य संपर्कों और बैक-एंड मॉड्यूल की जांच कर पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने की कोशिश कर रही है।
गिरोह की कार्यप्रणाली
अभियुक्तों की योजना व्यवस्थित थी। वे विभिन्न देशों के पीड़ितों को लक्षित करने के लिए ऑनलाइन पेड विज्ञापन चलाते। कॉल आने पर विशेष सॉफ्टवेयर के जरिए बातचीत नियंत्रित की जाती। खुद को आधिकारिक तकनीकी एजेंट दिखाकर पीड़ितों को सिस्टम एक्सेस देने के लिए मजबूर किया जाता।
स्क्रीन-शेयरिंग टूल्स का उपयोग कर वे वास्तविक समय में कंप्यूटर में त्रुटि या सुरक्षा समस्या पैदा करते और पीड़ितों को पैसे ट्रांसफर करने के लिए दबाव डालते। क्रिप्टोकरेंसी का इस्तेमाल उन्हें पकड़ से बचाता था और वित्तीय लेन-देन का पता लगाना मुश्किल बनाता था।
वैश्विक और स्थानीय महत्व
विशेषज्ञों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय टेक सपोर्ट स्कैम डिजिटल प्लेटफॉर्म पर फैल रहे बड़े पैमाने के अपराधों का हिस्सा हैं। नोएडा मामला यह दिखाता है कि तकनीकी सतर्कता, विदेशी नागरिकों की जागरूकता और अंतरराष्ट्रीय सहयोग कितने जरूरी हैं।
नोएडा साइबर क्राइम टीम की सफलता ने स्पष्ट संदेश दिया है कि उच्च तकनीकी ऑनलाइन धोखाधड़ी को ट्रैक किया जा सकता है और अपराधियों को न्याय के कटघरे में लाया जा सकता है। अधिकारियों ने कहा कि जनता में जागरूकता, बैंकिंग क्रेडेंशियल सुरक्षित रखना और ऑनलाइन सपोर्ट सेवाओं की सावधानीपूर्वक जांच आवश्यक है।
पुलिस अब गिरोह के नेटवर्क की विस्तृत जांच कर रही है और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स की निगरानी जारी है। जब्त लैपटॉप, मोबाइल और लेन-देन लॉग अभियुक्तों को न्याय के कटघरे में लाने और वित्तीय प्रवाह का पता लगाने में अहम साबित होंगे।
इस कार्रवाई ने न केवल एक अंतरराष्ट्रीय साइबर फ्रॉड रैकेट को खत्म किया है, बल्कि डिजिटल अर्थव्यवस्था में बढ़ती ठगी से निपटने में कानून-व्यवस्था की बढ़ती क्षमता को भी उजागर किया है।
