कानपुर किडनी ट्रांसप्लांट केस की जांच में सामने आए वीडियो के बाद पुलिस पंजाब के मरीज से ₹43 लाख ठगी के आरोप और गाजियाबाद लिंक की पड़ताल कर रही है।

₹43 लाख लेकर मुकर गए ‘किडनी माफिया’: कानपुर में ट्रांसप्लांट के नाम पर ठगी, वीडियो से खुला नेटवर्क का राज

Team The420
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कानपुर: किडनी ट्रांसप्लांट के नाम पर करोड़ों के अवैध खेल का एक और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। इस बार पंजाब के एक मरीज से ₹43 लाख ऐंठकर ट्रांसप्लांट न करने का आरोप सामने आया है। जांच में खुलासा हुआ है कि यह कोई अकेली ठगी नहीं, बल्कि संगठित गिरोह का हिस्सा है, जो मरीजों की मजबूरी का फायदा उठाकर उनसे मोटी रकम वसूलता था।

मामले का खुलासा तब हुआ जब जांच एजेंसियों को गिरफ्तार आरोपी शिवम अग्रवाल के मोबाइल फोन से एक वीडियो मिला। इस वीडियो में पंजाब के तरनतारन निवासी मनजिंदर नाम के पीड़ित ने पूरे घटनाक्रम का जिक्र किया है। पीड़ित का कहना है कि उसकी किडनी खराब है और वह लंबे समय से डायलिसिस करा रहा था। इसी दौरान उसकी मुलाकात कुछ लोगों से हुई, जिन्होंने किडनी ट्रांसप्लांट कराने का भरोसा दिलाया।

मोहाली से शुरू हुआ संपर्क, कानपुर तक पहुंचा नेटवर्क

जांच में सामने आया कि मोहाली में नवनीत सिंह नाम के व्यक्ति ने पीड़ित को गिरोह के अन्य सदस्यों—जसप्रीत, विक्रांत और हसन—से मिलवाया। इन लोगों ने भरोसा दिलाया कि वे जल्द ही किडनी ट्रांसप्लांट करा देंगे। इसके बाद आरोपियों ने अलग-अलग किश्तों में कुल ₹43 लाख वसूल लिए।

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पीड़ित के अनुसार, उसने यह रकम अपने परिचितों और रिश्तेदारों से कर्ज लेकर जुटाई थी। लेकिन पैसे लेने के बाद आरोपियों ने लगातार बहाने बनाना शुरू कर दिया और ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया को टालते रहे। अंततः ट्रांसप्लांट नहीं किया गया, जिससे पीड़ित आर्थिक और मानसिक दोनों रूप से टूट गया।

वीडियो से खुला ‘किडनी माफिया’ का नेटवर्क

मोबाइल से बरामद वीडियो में पीड़ित अपनी आपबीती बताते हुए साफ कहता है कि “मेरी जिंदगी बर्बाद हो गई, कर्ज लेकर पैसे दिए, लेकिन इलाज नहीं हुआ।” यह वीडियो अब जांच का अहम हिस्सा बन गया है और इसके आधार पर नेटवर्क के अन्य सदस्यों की पहचान की जा रही है।

जांच एजेंसियों को शक है कि यह गिरोह अलग-अलग राज्यों में सक्रिय है और ऐसे कई मरीजों को निशाना बना चुका है। वीडियो के सामने आने के बाद मामले ने गंभीर रूप ले लिया है।

गाड़ियों से होता था पूरा संचालन

जांच में यह भी सामने आया है कि गाजियाबाद का रहने वाला परवेज सैफी इस नेटवर्क के लिए लॉजिस्टिक सपोर्ट का काम करता था। वह गिरोह के सदस्यों को अलग-अलग शहरों में ले जाने और लाने के लिए गाड़ियों की व्यवस्था करता था। जानकारी के मुताबिक, वह पहले भी लूट और डकैती के मामलों में जेल जा चुका है।

परवेज ही आरोपियों को कई बार मेरठ से कानपुर लेकर आया और ट्रांसप्लांट से जुड़े कामों में सक्रिय भूमिका निभाता रहा। इसके अलावा अंकित नाम का एक अन्य व्यक्ति भी अलग-अलग नामों से वाहन बुक कराकर इस नेटवर्क की मदद करता था।

कैश और वीडियो ने बढ़ाई मुश्किलें

जांच के दौरान कुछ और वीडियो भी सामने आए हैं, जिनमें आरोपी बड़ी मात्रा में नकदी के साथ दिखाई दे रहे हैं। एक वीडियो में आरोपी बिस्तर पर बैठे हैं और उनके सामने ₹500 के नोटों की गड्डियां फैली हुई हैं। यह वीडियो इस बात का संकेत देता है कि गिरोह ने इस अवैध धंधे से भारी रकम कमाई है।

रिमांड से खुलेंगे और राज

मामले में गिरफ्तार शिवम अग्रवाल को रिमांड पर लेने की तैयारी की जा रही है। जांच एजेंसियों का मानना है कि रिमांड के दौरान कई अहम खुलासे हो सकते हैं, जैसे किन-किन मरीजों को निशाना बनाया गया और किन अस्पतालों में ट्रांसप्लांट की कोशिश की गई।

यह मामला न केवल एक आर्थिक अपराध है, बल्कि स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे गिरोह मरीजों की मजबूरी का फायदा उठाते हैं और उन्हें झूठे वादों के जाल में फंसा देते हैं।

सख्त निगरानी की जरूरत

किडनी ट्रांसप्लांट जैसे संवेदनशील मामलों में निगरानी और पारदर्शिता बेहद जरूरी है। इस घटना ने स्पष्ट कर दिया है कि अवैध ट्रांसप्लांट नेटवर्क अब भी सक्रिय हैं और उन्हें रोकने के लिए सख्त कार्रवाई की आवश्यकता है।

कानपुर में सामने आया यह मामला एक चेतावनी है कि अगर समय रहते ऐसे गिरोहों पर शिकंजा नहीं कसा गया, तो यह ‘मौत का कारोबार’ और भी बड़े पैमाने पर फैल सकता है। फिलहाल जांच जारी है और आने वाले दिनों में इस नेटवर्क से जुड़े और नाम सामने आने की संभावना है।

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