पश्चिम एशिया में तेज होते टकराव के बीच एक सवाल लगातार उठ रहा है—इज़राइल को ईरान की संवेदनशील गतिविधियों की इतनी सटीक जानकारी कैसे मिलती रही? इसी बहस को नया मोड़ तब मिला, जब ईरान के पूर्व राष्ट्रपति Mahmoud Ahmadinejad ने दावा किया कि देश की खुफिया संरचना के भीतर ही गहरी सेंध लगी थी, जिसका फायदा इज़राइल की एजेंसी Mossad ने उठाया।
अहमदीनेजाद के अनुसार, ईरान की खुफिया एजेंसियों ने मोसाद के एजेंटों की पहचान और गिरफ्तारी के लिए एक विशेष यूनिट बनाई थी। लेकिन कथित तौर पर इस यूनिट का प्रभारी ही डबल एजेंट निकला। दावा है कि इसी नेटवर्क के जरिए ईरान के परमाणु कार्यक्रम, सैन्य रणनीतियों और उच्चस्तरीय बैठकों से जुड़ी जानकारी बाहर पहुंचती रही। पूर्व राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि करीब 20 सदस्य ऐसे थे, जो दोहरी भूमिका निभा रहे थे और संवेदनशील डेटा तक उनकी सीधी पहुंच थी।
विश्लेषकों का मानना है कि यदि किसी देश की प्रतिरक्षा व्यवस्था के भीतर डबल एजेंट सक्रिय हो जाएं, तो बाहरी एजेंसी को “इनसाइड डेटा” मिलना आसान हो जाता है। यही डेटा रणनीतिक फैसलों और सटीक हमलों की बुनियाद बन सकता है। ईरान के भीतर से मिली ऐसी जानकारी के सहारे इज़राइल ने अतीत में कई ऑपरेशन अंजाम दिए होने का दावा किया है।
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इतिहास गवाह है कि मोसाद ने लंबे समय तक तैयारी कर कई उच्च-प्रोफाइल मिशन संचालित किए। 2018 में तेहरान के एक गोदाम से कथित “न्यूक्लियर आर्काइव” दस्तावेजों को बाहर ले जाने की घटना इसी रणनीतिक धैर्य और जटिल नेटवर्क का उदाहरण मानी जाती है। उस ऑपरेशन के बाद इज़राइल ने दावा किया था कि उसे ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े हजारों दस्तावेज हाथ लगे। ईरान ने इन आरोपों को राजनीतिक दुष्प्रचार बताया था, लेकिन अंतरराष्ट्रीय मंच पर यह मुद्दा लंबे समय तक चर्चा में रहा।
खुफिया तंत्र के जानकार बताते हैं कि आधुनिक जासूसी सिर्फ मानव स्रोतों तक सीमित नहीं रहती। साइबर निगरानी, सैटेलाइट इमेजरी, संचार अवरोधन और वित्तीय ट्रैकिंग—ये सभी साधन एक साथ काम करते हैं। लेकिन किसी भी जटिल मिशन की सफलता अक्सर अंदरूनी सहयोग पर निर्भर करती है। यदि स्थानीय स्तर पर नेटवर्क तैयार हो जाए, तो बाहरी एजेंसी को सीमित संसाधनों में भी बड़ी बढ़त मिल सकती है।
ईरान-इज़राइल तनाव के मौजूदा दौर में इन दावों का राजनीतिक महत्व भी बढ़ गया है। तेहरान के लिए यह आंतरिक जवाबदेही का प्रश्न है, तो तेल अवीव के लिए खुफिया बढ़त का संकेत। हालांकि, अहमदीनेजाद के दावों पर आधिकारिक पुष्टि या विस्तृत जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं हुई है। ईरानी नेतृत्व ने अतीत में कई बार कहा है कि उसकी सुरक्षा एजेंसियां किसी भी विदेशी घुसपैठ से निपटने में सक्षम हैं।
पश्चिम एशिया की जटिल भू-राजनीति में खुफिया एजेंसियां निर्णायक भूमिका निभाती हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, ऐसे नेटवर्क वर्षों में तैयार होते हैं और एक-एक कड़ी जोड़कर सूचनाओं का प्रवाह बनाया जाता है। डबल एजेंट का इस्तेमाल जोखिम भरा होता है, लेकिन सफल होने पर यह विरोधी देश की रणनीति को भीतर से भेद देता है।
फिलहाल, अहमदीनेजाद के खुलासे ने ईरान की आंतरिक सुरक्षा संरचना पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। आने वाले समय में यदि इस दावे की पुष्टि होती है, तो यह न केवल ईरान-इज़राइल समीकरण को प्रभावित करेगा, बल्कि वैश्विक खुफिया राजनीति की दिशा पर भी असर डाल सकता है।
