जिले में पुलिस ने एक बड़े अंतरराज्यीय जीएसटी फर्जीवाड़ा गिरोह का पर्दाफाश करते हुए चार शातिर आरोपियों को गिरफ्तार किया है। ये आरोपी बेरोजगार युवाओं को नौकरी का झांसा देकर उनके शैक्षिक और पहचान संबंधी दस्तावेज हासिल करते थे और उन्हीं दस्तावेजों के आधार पर फर्जी फर्में बनाकर करोड़ों रुपये की जीएसटी चोरी को अंजाम देते थे।
पुलिस के अनुसार, गिरोह ने तमिलनाडु, कर्नाटक, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों में 1200 से अधिक फर्जी जीएसटी फर्मों का पंजीकरण कराया। इन फर्मों के जरिए काल्पनिक खरीद-बिक्री दिखाकर इनपुट टैक्स क्रेडिट का दुरुपयोग किया गया और सरकारी राजस्व को भारी नुकसान पहुंचाया गया।
भारी मात्रा में सामान बरामद
गिरफ्तार आरोपियों के कब्जे से 2 लाख 30 हजार रुपये नकद, तीन लैपटॉप, कई मोबाइल फोन, 24 सिम कार्ड, छह एटीएम कार्ड, पैन कार्ड, चेकबुक, पासबुक, कीमती अंगूठी और एक चारपहिया वाहन बरामद किया गया है। इसके अलावा 70 जीएसटी पंजीकरण प्रमाणपत्रों की प्रतियां, दो आधार कार्ड, छह बिजली बिल और तीन ऑनरशिप डिटेल दस्तावेज भी जब्त किए गए हैं।
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ऐसे रचते थे पूरा खेल
एसपी अंकुर अग्रवाल ने बताया कि सूचना मिली थी कि कुछ लोग जिले में बेरोजगार युवाओं को नौकरी दिलाने का लालच देकर उनके दस्तावेज एकत्र कर रहे हैं। बाद में उन्हीं दस्तावेजों के आधार पर फर्जी फर्मों का जीएसटी पंजीकरण कराया जाता था। इसके बाद उन फर्मों के जरिए फर्जी बिल बनाकर बड़ी रकम का लेनदेन दिखाया जाता था और टैक्स की रकम हड़प ली जाती थी।
पुलिस और क्राइम ब्रांच की संयुक्त टीम ने कार्रवाई करते हुए आगरा जिले के सैंया थाना क्षेत्र के सोना उर्फ आशीष, सम्साबाद क्षेत्र के कुलदीप सिंह, शाहगंज क्षेत्र के विवेक कुमार तथा उत्तराखंड के अल्मोड़ा निवासी सूरज रावत को गिरफ्तार किया।
सीतापुर में भी बनाई फर्जी फर्म
पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि उन्होंने सीतापुर में ‘पीएस ट्रेडर्स’ नाम से एक फर्जी फर्म बनाई थी, जिसे पूजा सिंह के नाम पर पंजीकृत कराया गया। इस फर्म के माध्यम से बिलों के आधार पर बड़ी रकम का लेनदेन दिखाकर जीएसटी का लाभ उठाया गया।
सुनियोजित तरीके से चलता था नेटवर्क
गिरोह पहले नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं की पहचान करता था। उनसे दस्तावेज लेकर बैंक खाते खुलवाए जाते थे और जीएसटी पंजीकरण कराया जाता था। बाद में खातों और फर्मों का संचालन गिरोह के सदस्य स्वयं करते थे, जबकि दस्तावेज देने वाले युवाओं को असली गतिविधियों की जानकारी नहीं होती थी।
फिलहाल पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है। बरामद इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और दस्तावेजों की फॉरेंसिक जांच कराई जा रही है। जीएसटी विभाग के साथ समन्वय कर अन्य राज्यों में संचालित फर्जी फर्मों और वित्तीय लेनदेन की भी पड़ताल की जा रही है।
अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद कर चोरी की वास्तविक राशि और गिरोह के पूरे नेटवर्क का खुलासा किया जाएगा।
