मुरादाबाद/आगरा। फर्जी बिलिंग और बोगस फर्मों के जरिये करोड़ों रुपये की जीएसटी चोरी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए एसआईटी ने आगरा से सरगना पुनीत को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि उसने चार बोगस फर्म बनाकर ₹269 करोड़ का फर्जी कारोबार दिखाया और करीब ₹48 करोड़ की जीएसटी चोरी कर सरकार को चूना लगाया। गिरफ्तारी के दौरान उसके कब्जे से बैंक पासबुक, चेकबुक, सिम कार्ड और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए गए हैं।
मामला राज्य कर विभाग रेंज-बी की शिकायत पर 30 अक्टूबर 2025 को सिविल लाइंस थाने में दर्ज हुआ था। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि ‘अलजजा ट्रेडर्स’ नामक फर्म ने फर्जी बिल ट्रेडिंग कर ₹1,20,50,458 की जीएसटी चोरी की है। जांच के दौरान यह मामला बड़े रैकेट से जुड़ा पाया गया। सर्विलांस और बैंकिंग ट्रेल की पड़ताल में आगरा के सदर बाजार क्षेत्र निवासी पुनीत का नाम सामने आया, जिसे शुक्रवार रात उसके घर से दबोच लिया गया।
प्रारंभिक पूछताछ में खुलासा हुआ है कि आरोपी ने चार बोगस फर्मों के नाम पर जीएसटी रजिस्ट्रेशन कराए। इन फर्मों के जरिये कागजों में बड़े पैमाने पर खरीद-फरोख्त दर्शाई गई, जबकि वास्तविक कारोबार नगण्य या शून्य था। फर्जी इनवॉइस के आधार पर इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ उठाकर करोड़ों रुपये की कर चोरी की गई। जांच एजेंसियां यह भी खंगाल रही हैं कि इस फर्जी नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं।
FCRF Launches Flagship Certified Fraud Investigator (CFI) Program
बेरोजगारों को बनाया मोहरा, दस्तावेजों से खड़ी कीं फर्जी कंपनियां
जांच में यह भी सामने आया कि गिरोह बेरोजगार युवाओं को नौकरी का झांसा देकर उनके शैक्षिक और पहचान संबंधी दस्तावेज ले लेता था। इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर फर्जी फर्मों का पंजीकरण कराया जाता था। बाद में उन फर्मों के जरिये काल्पनिक लेन-देन दिखाकर जीएसटी हड़पी जाती थी।
इस नेटवर्क के सिलसिले में चार अन्य आरोपियों—सोना उर्फ आशीष, कुलदीप सिंह, विवेक कुमार और सूरज रावत—को भी गिरफ्तार किया गया है। पुलिस के अनुसार इन आरोपियों ने तमिलनाडु, कर्नाटक, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में 1200 से अधिक फर्जी जीएसटी फर्मों का जाल बिछाया। उनके कब्जे से ₹2.30 लाख नकद, लैपटॉप, कई मोबाइल फोन, सिम कार्ड, एटीएम कार्ड, पैन कार्ड, चेकबुक, पासबुक, कीमती अंगूठी और एक चौपहिया वाहन बरामद किया गया है।
आरोपियों ने पूछताछ में स्वीकार किया है कि वे फर्जी कंपनियों के नाम पर जीएसटी रजिस्ट्रेशन कराते, फिर कागजों में सेल-पर्चेज दिखाकर इनपुट टैक्स क्रेडिट का दावा करते थे। रकम विभिन्न खातों के माध्यम से घुमाकर निकाली जाती थी, जिससे असली लाभार्थियों तक पहुंचना मुश्किल हो जाए।
एक और रैकेट का खुलासा, 2675 फर्जी फर्मों के दस्तावेज मिले
इसी कड़ी में लोहामंडी क्षेत्र में एक और कार्रवाई में बुलंदशहर निवासी रवि सिंह को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है। उसके पास से बरामद लैपटॉप और पेन ड्राइव की जांच में 2675 फर्जी फर्मों के पंजीकरण से जुड़े दस्तावेज मिले हैं। इस मामले में करीब ₹1 करोड़ की कर चोरी सामने आई है। मयूर नागपाल, विनीत, राज कुमार झा, आसिफ और प्रकाश झा सहित अन्य आरोपी फरार बताए गए हैं, जबकि दो महिला आरोपित भी जांच के दायरे में हैं।
जांच एजेंसियां अब बैंक खातों, जीएसटी रजिस्ट्रेशन डेटा और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की गहन पड़ताल कर रही हैं। आशंका है कि यह नेटवर्क कई राज्यों में फैला हुआ है और कर चोरी की रकम ₹48 करोड़ से भी अधिक हो सकती है। अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही और गिरफ्तारियां संभव हैं।
