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बैंक मैनेजर बनकर लाखों की ठगी: प्रयागराज में साइबर अपराधियों का नया तरीका

Team The420
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प्रयागराज। साइबर ठगी के मामलों में लगातार इजाफा हो रहा है और अपराधी हर दिन नए तरीके अपनाकर लोगों को निशाना बना रहे हैं। ताजा मामला धूमनगंज थाना क्षेत्र का है, जहां साइबर ठगों ने खुद को बैंक मैनेजर बताकर एक व्यक्ति के खाते से ₹3.92 लाख उड़ा लिए। पीड़ित ने धूमनगंज थाने में शिकायत दर्ज कराई है, जिसके बाद पुलिस मामले की जांच में जुट गई है।

पुलिस के अनुसार, धुस्सा झलवा निवासी तापस कुमार साहा के मोबाइल पर 5 जनवरी 2026 की दोपहर एक संदिग्ध लिंक आया। लिंक भेजने वाले व्यक्ति ने खुद को पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) का मैनेजर बताया। उसने दावा किया कि खाते से संबंधित एक जरूरी अपडेट के लिए तत्काल सत्यापन आवश्यक है, अन्यथा खाता अस्थायी रूप से ब्लॉक हो सकता है।

विश्वास जीतने के लिए अपनाया पेशेवर तरीका

तापस कुमार साहा के मुताबिक, फोन करने वाले व्यक्ति ने बेहद पेशेवर अंदाज में बात की। उसने बैंकिंग शब्दावली का इस्तेमाल किया और खाते की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई। बातचीत के दौरान उसने कहा कि खाते की केवाईसी और सुरक्षा अपडेट की प्रक्रिया पूरी करनी है। इसके लिए उसने एक लिंक पर क्लिक करने और कुछ जानकारी भरने को कहा।

पीड़ित ने भरोसा कर लिंक पर क्लिक किया। इसके बाद आरोपी ने खाते से संबंधित जानकारी, डेबिट कार्ड विवरण और मोबाइल पर आए ओटीपी (वन टाइम पासवर्ड) की मांग की। बैंक मैनेजर होने का विश्वास दिलाने के कारण उन्होंने ओटीपी साझा कर दिया। यही उनकी सबसे बड़ी भूल साबित हुई।

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कुछ ही मिनटों में खाली हुआ खाता

ओटीपी साझा करने के कुछ ही देर बाद उनके मोबाइल पर खाते से रुपये निकलने के मैसेज आने लगे। जब तक वह स्थिति समझ पाते, उनके पंजाब नेशनल बैंक के खाते से कुल ₹3,92,000 की राशि ट्रांसफर की जा चुकी थी। घबराए पीड़ित ने तुरंत बैंक से संपर्क किया और शाखा पहुंचकर अपना खाता सीज कराया।

इसके साथ ही उन्होंने राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराई और स्थानीय धूमनगंज थाने में भी लिखित तहरीर दी। पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और जांच शुरू कर दी है।

डिजिटल ट्रेल खंगाल रही पुलिस

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, जिस मोबाइल नंबर से कॉल की गई थी और जिन बैंक खातों में रकम ट्रांसफर हुई है, उनकी जांच की जा रही है। कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर), आईपी एड्रेस और ट्रांजैक्शन हिस्ट्री खंगाली जा रही है ताकि आरोपियों तक पहुंचा जा सके। साइबर सेल की टीम तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर गिरोह का पता लगाने में जुटी है।

अधिकारियों का कहना है कि अक्सर साइबर अपराधी फर्जी कॉल सेंटर के जरिए लोगों को फोन करते हैं और खुद को बैंक अधिकारी बताकर व्यक्तिगत जानकारी हासिल कर लेते हैं। कई बार वे खाते को ब्लॉक करने, केवाईसी अपडेट करने या रिवॉर्ड प्वाइंट रिडीम कराने का झांसा देते हैं।

सतर्क रहने की जरूरत

पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी अनजान कॉल या लिंक पर भरोसा न करें। बैंक कभी भी फोन पर ओटीपी, पिन, पासवर्ड या कार्ड विवरण नहीं मांगता। यदि कोई खुद को बैंक अधिकारी बताकर ऐसी जानकारी मांगता है, तो तुरंत कॉल काट दें और संबंधित बैंक शाखा या आधिकारिक ग्राहक सेवा नंबर पर संपर्क करें।

विशेषज्ञों के अनुसार, ओटीपी साझा करना साइबर ठगी का सबसे आम माध्यम बन चुका है। एक बार ओटीपी मिलने पर ठग कुछ ही मिनटों में खाते से रकम निकाल लेते हैं। इसलिए डिजिटल लेनदेन के दौरान विशेष सावधानी बरतना बेहद जरूरी है।

फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है और उम्मीद जताई जा रही है कि तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर जल्द ही आरोपियों की पहचान कर ली जाएगी।

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