प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने उद्योगपति अनिल अंबानी के मुंबई स्थित आवास ‘Abode’ को ₹3,716.83 करोड़ मूल्य का बताते हुए धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत अस्थायी रूप से कुर्क कर लिया है। यह कार्रवाई कथित बैंक ऋण धोखाधड़ी मामले में की गई है, जो Reliance Communications (आरकॉम) से जुड़ा हुआ है।
यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब 66 वर्षीय अंबानी को मामले में दूसरी बार पूछताछ के लिए नई दिल्ली स्थित ईडी मुख्यालय में पेश होना है।
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ईडी के अनुसार, 66 मीटर ऊंची यह 17-मंजिला रिहायशी इमारत मुंबई के पॉश पाली हिल इलाके में स्थित है। अधिकारियों ने बताया कि इसी संपत्ति का ₹473.17 करोड़ मूल्य का एक हिस्सा नवंबर 2025 में पहले ही कुर्क किया जा चुका था।
जांच एजेंसी का कहना है कि आरकॉम और उससे जुड़ी समूह कंपनियों ने घरेलू और विदेशी बैंकों के एक कंसोर्टियम से ऋण लिया था, जिसकी कुल बकाया राशि ₹40,185 करोड़ तक पहुंच गई। इनमें से कई ऋण बाद में एनपीए (गैर-निष्पादित परिसंपत्ति) घोषित कर दिए गए, जिसके बाद मामले की जांच शुरू हुई।
ईडी ने अपने बयान में आरोप लगाया है कि पाली हिल स्थित इस संपत्ति को RiseE Trust नामक एक इकाई में समाहित किया गया। एजेंसी के मुताबिक, यह ट्रस्ट अंबानी परिवार के सदस्यों का निजी पारिवारिक ट्रस्ट बताया गया है। जांच एजेंसी का दावा है कि इस कॉरपोरेट पुनर्गठन का उद्देश्य यह दिखाना था कि अनिल अंबानी का संपत्ति से सीधा संबंध नहीं है।
जांचकर्ताओं के अनुसार, इस संरचना का उद्देश्य संपत्ति को ट्रस्ट के भीतर समेकित कर धन-संपत्ति को सुरक्षित रखना और बैंकों के प्रति व्यक्तिगत गारंटी से उत्पन्न देनदारियों से बचाव करना था। अंबानी ने आरकॉम को दिए गए ऋणों के लिए बैंकों के समक्ष व्यक्तिगत गारंटी दी थी।
एजेंसी ने आरोप लगाया कि यह संपत्ति परिवार के लाभकारी उपयोग और स्वामित्व के लिए थी, न कि उन बैंकों के लिए जिनके ऋण बाद में एनपीए बन गए।
ताजा कुर्की आदेश के साथ ही इस मामले में अब तक लगभग ₹15,700 करोड़ मूल्य की संपत्तियां अटैच की जा चुकी हैं। ईडी अनिल धीरूभाई अंबानी समूह (एडीएजी) के तहत आने वाली विभिन्न कंपनियों के वित्तीय लेन-देन, उधार ली गई राशि के उपयोग और संपत्तियों के हस्तांतरण की जांच कर रही है।
मामले ने तब और गति पकड़ी जब उच्चतम न्यायालय ने समूह से जुड़े कथित वित्तीय अनियमितताओं की गहन जांच के निर्देश दिए। इसके बाद ईडी ने बैंक धोखाधड़ी और धन शोधन से जुड़े कई मामलों की जांच के लिए एक विशेष जांच दल का गठन किया।
एक समय दूरसंचार क्षेत्र की प्रमुख कंपनी रही आरकॉम ने भारी कर्ज और कड़ी प्रतिस्पर्धा के चलते दिवाला कार्यवाही का सहारा लिया था। कंपनी की समाधान प्रक्रिया और उससे जुड़े कानूनी विवादों पर बैंकों और नियामक संस्थाओं की नजर बनी हुई है।
पीएमएलए के तहत की गई यह अस्थायी कुर्की जांच के दौरान संपत्ति की बिक्री या हस्तांतरण को रोकने के उद्देश्य से की जाती है। कानून के अनुसार, इस तरह की कुर्की को बाद में सक्षम प्राधिकरण से पुष्टि मिलना आवश्यक होता है।
अनिल अंबानी पूर्व में ऐसे मामलों में किसी भी तरह की अनियमितता से इनकार करते रहे हैं। अब उनकी प्रस्तावित पेशी और आगे की कानूनी प्रक्रिया पर इस मामले की दिशा निर्भर करेगी।
पाली हिल स्थित ‘Abode’ की उच्च-मूल्य कुर्की को इस जांच में अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाइयों में से एक माना जा रहा है, जो आरकॉम ऋण खातों से जुड़े कथित वित्तीय जोखिम के व्यापक दायरे को दर्शाती है।
