तेलंगाना साइबर सुरक्षा ब्यूरो की विशेष जांच में साइबर धोखाधड़ी से जुड़े एक बड़े वित्तीय नेटवर्क का खुलासा हुआ है। अधिकारियों ने राज्य भर में चलाए गए विशेष अभियान के दौरान 1,888 संदिग्ध म्यूल बैंक खातों की पहचान की है, जो 137 बैंक शाखाओं से संचालित किए जा रहे थे। जांच में पाया गया कि ये खाते देशभर में दर्ज हजारों साइबर अपराध मामलों से जुड़े हो सकते हैं।
साइबर सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, प्रारंभिक पड़ताल में सामने आया है कि इन म्यूल खातों का इस्तेमाल धोखाधड़ी से हासिल की गई रकम को एक स्थान से दूसरे स्थान तक भेजने और उसे वैध दिखाने के लिए किया जाता था। अधिकारियों ने बताया कि इन खातों का संबंध देश के विभिन्न हिस्सों में दर्ज 9,431 साइबर फ्रॉड मामलों से पाया गया है, जिनमें अकेले तेलंगाना में 782 मामले दर्ज हैं।
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जांच अभियान के तहत साइबर सुरक्षा टीमों ने 137 बैंक शाखाओं का निरीक्षण किया और संदिग्ध खाताधारकों के केवाईसी रिकॉर्ड एकत्र किए। अधिकारियों का कहना है कि इन रिकॉर्ड की विस्तृत सत्यापन प्रक्रिया अभी जारी है। प्रारंभिक विश्लेषण में कई बैंक शाखाओं में एक ही तरह के पैटर्न पर कई संदिग्ध खाते खोले जाने के संकेत मिले हैं, जिससे धोखाधड़ी नेटवर्क की संरचना को समझने की कोशिश की जा रही है।
साइबर सुरक्षा ब्यूरो के अधिकारियों ने बताया कि एक बैंक खाते का विशेष रूप से अध्ययन किया गया, जो हैदराबाद के सुल्तान बाजार क्षेत्र की शाखा से संचालित हो रहा था। जांच में पाया गया कि यह अकेला खाता विभिन्न न्यायिक क्षेत्रों में दर्ज लगभग 496 साइबर अपराध शिकायतों से जुड़ा हो सकता है। इसी तरह सूर्यापेट जिले की चार बैंक शाखाओं में 298 संदिग्ध खातों का भी पता चला है, जो अलग-अलग राज्यों में दर्ज मामलों से संबंधित बताए जा रहे हैं।
अधिकारियों ने यह भी संकेत दिया कि जांच के दौरान बैंकिंग प्रणाली की भूमिका पर भी नजर रखी जा रही है। साइबर सुरक्षा ब्यूरो की निदेशक ने कहा कि यह पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि क्या म्यूल खातों को खोलने में किसी बैंक कर्मचारी की संलिप्तता रही है या नहीं। यदि जांच में किसी तरह की मिलीभगत साबित होती है तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
साइबर अपराधी अक्सर फर्जी पहचान दस्तावेजों या अस्थायी खातों का इस्तेमाल करके अवैध धन को विभिन्न खातों में ट्रांसफर करते हैं। जांच एजेंसियों का मानना है कि म्यूल बैंक खाते साइबर धोखाधड़ी के वित्तीय नेटवर्क की सबसे कमजोर कड़ी हैं, जिन्हें तोड़ना जरूरी है।
अधिकारियों ने बताया कि इस विशेष अभियान को आगे भी जारी रखा जाएगा। संदिग्ध खातों के लेनदेन पैटर्न, केवाईसी दस्तावेज और बैंकिंग गतिविधियों का तकनीकी विश्लेषण किया जा रहा है। साथ ही साइबर फ्रॉड पीड़ितों के मामलों की समीक्षा कर धन की रिकवरी की संभावनाओं का भी आकलन किया जा रहा है।
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल बैंकिंग के बढ़ते उपयोग के साथ धोखाधड़ी के तरीके भी बदल रहे हैं। ऐसे में बैंक ग्राहकों को सलाह दी गई है कि वे किसी भी संदिग्ध लिंक या अनजान कॉल के माध्यम से अपनी व्यक्तिगत और बैंकिंग जानकारी साझा न करें।
फिलहाल जांच एजेंसियां पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने में जुटी हैं और आने वाले दिनों में इस मामले में और भी बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
