साइबर अपराध के बढ़ते खतरे के बीच मुंबई की ओशिवारा साइबर सेल ने त्वरित कार्रवाई करते हुए एक वरिष्ठ नागरिक से ठगी गई पूरी रकम वापस दिलाने में सफलता हासिल की है। ठगों ने 71 वर्षीय अशोक डिंगरानी को फर्जी RTO ई-चालान लिंक भेजकर उनके क्रेडिट कार्ड से ₹2.50 लाख की अनधिकृत खरीदारी कर ली थी। शिकायत मिलने के बाद शुरू हुई त्वरित जांच में ‘गोल्डन ऑवर’ के भीतर पूरी धनराशि बरामद कर ली गई।
सूत्रों के अनुसार ठगी की यह घटना व्हाट्सएप पर भेजे गए एक संदिग्ध भुगतान लिंक के जरिए अंजाम दी गई। साइबर अपराधियों ने पीड़ित को वाहन संबंधी जुर्माने का नकली संदेश भेजा, जिसमें केवल ₹2000 के चालान का उल्लेख था। जब अशोक डिंगरानी ने लिंक खोला तो उनसे वाहन नंबर, कार्ड विवरण और अन्य निजी जानकारी दर्ज करने को कहा गया। इसके बाद ठगों ने उनके क्रेडिट कार्ड से बिना अनुमति लगभग ₹2.50 लाख की खरीदारी कर ली।
FCRF Launches Flagship Certified Fraud Investigator (CFI) Program
शिकायत दर्ज होने के तुरंत बाद साइबर सेल ने बैंक और संबंधित मर्चेंट आउटलेट से संपर्क किया। जांच में पता चला कि यह अनधिकृत लेनदेन चेंबूर स्थित एक रिटेल आउटलेट में किया गया था। अधिकारियों ने बैंकिंग नेटवर्क के माध्यम से ट्रांजेक्शन को ट्रेस किया और राशि को फ्रीज कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी।
साइबर टीम ने राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 पर दर्ज शिकायत के आधार पर तेजी से कार्रवाई की। तकनीकी जांच और बैंक अलर्ट सिस्टम के समन्वय से ठगी की रकम को ट्रैक किया गया और कुछ ही समय में ट्रांजेक्शन रोक दिया गया। मर्चेंट और बैंक के नोडल अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क बनाए रखने से पूरी रकम पीड़ित के क्रेडिट कार्ड खाते में वापस जमा करा दी गई।
अधिकारियों का कहना है कि साइबर ठग अक्सर फर्जी व्हाट्सएप या एसएमएस लिंक भेजकर लोगों को निशाना बनाते हैं। ऐसे संदेशों में वाहन जुर्माना, बैंक केवाईसी अपडेट या ऑनलाइन भुगतान संबंधी झूठे अलर्ट भेजे जाते हैं। लिंक पर क्लिक करते ही फोन हैक होने, बैंकिंग जानकारी चोरी होने और अनधिकृत ट्रांजेक्शन का खतरा बढ़ जाता है।
पुलिस ने लोगों को सलाह दी है कि किसी भी अज्ञात लिंक, एपीके फाइल या संदिग्ध भुगतान वेबसाइट पर अपनी व्यक्तिगत जानकारी दर्ज न करें। विशेष रूप से वरिष्ठ नागरिकों को सतर्क रहने की आवश्यकता है क्योंकि साइबर ठग अक्सर उन्हें आसान निशाना बनाते हैं।
जांच एजेंसियों के अनुसार साइबर अपराधी डिजिटल भुगतान प्लेटफॉर्म का दुरुपयोग कर धन को तेजी से विभिन्न खातों में स्थानांतरित करने की कोशिश करते हैं। इसलिए समय पर शिकायत दर्ज करना बेहद जरूरी माना जाता है। इस मामले में भी शिकायत मिलने के तुरंत बाद कार्रवाई शुरू होने से पीड़ित को आर्थिक नुकसान से बचाया जा सका।
अधिकारियों का कहना है कि साइबर फ्रॉड के मामलों में ‘गोल्डन ऑवर’ की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण होती है। यदि पीड़ित तुरंत हेल्पलाइन, बैंक और पुलिस को सूचना दे दे तो धन वापसी की संभावना काफी बढ़ जाती है। इस घटना में भी तेज समन्वय और तकनीकी निगरानी के कारण पूरी राशि सुरक्षित वापस दिलाई जा सकी।
साइबर विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि धोखेबाज लगातार नए तरीके अपना रहे हैं। नागरिकों को सलाह दी गई है कि वे अनजान कॉल, संदिग्ध लिंक या अप्रमाणित भुगतान अनुरोधों से दूर रहें। फिलहाल पुलिस मामले की आगे की जांच कर रही है।
