साइबर अपराध के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत विशाखापत्तनम पुलिस ने एक बड़े वित्तीय धोखाधड़ी नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए छह लोगों को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि ये लोग म्यूल बैंक खातों का जुगाड़ कर उन्हें अंतरराष्ट्रीय साइबर फ्रॉड सिंडिकेट को उपलब्ध कराते थे, जो डिजिटल अरेस्ट स्कैम और ऑनलाइन निवेश धोखाधड़ी जैसी गतिविधियों में सक्रिय थे।
पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों में कोलुकुला वीरेंद्रनाथ, इमदाद हुसैन, गारिगे राजेश कुमार, च. रवि, बिक्किना रघु वंशी और मलगाला सुब्बा राव शामिल हैं। सभी आरोपियों को अदालत में पेश करने के बाद 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। शुरुआती जांच में पता चला है कि गिरोह तीसरे पक्ष से बैंक खाता संबंधी जानकारी हासिल कर साइबर अपराध नेटवर्क को सप्लाई करता था।
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जांच अधिकारियों ने बताया कि यह नेटवर्क कंबोडिया, म्यांमार, चीन, पाकिस्तान और नाइजीरिया जैसे देशों में सक्रिय साइबर गिरोहों के साथ संपर्क में था। इन खातों का इस्तेमाल धोखाधड़ी से हासिल की गई रकम को तेजी से अलग-अलग माध्यमों से स्थानांतरित करने के लिए किया जाता था। ठग UPI ट्रांजेक्शन, एटीएम निकासी, क्रिप्टोकरेंसी कन्वर्जन और विदेशी प्रेषण जैसे तरीकों से धन को सफेद करने की कोशिश करते थे।
मामले की शुरुआत उस समय हुई जब एक सेवानिवृत्त प्रोफेसर को खुद को सरकारी अधिकारी बताने वाले जालसाजों ने धमकी देकर पैसे ट्रांसफर करने को मजबूर किया। ठगों ने दावा किया कि पीड़ित के आधार कार्ड का उपयोग कर फर्जी एटीएम कार्ड बनाया गया है और उस पर कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। डर के कारण पीड़ित ने किश्तों में लगभग ₹1.05 करोड़ ट्रांसफर कर दिए। पुलिस जांच में निदादवोलु स्थित एचडीएफसी बैंक खाते से ₹8 लाख का ट्रेल मिला, जिसके बाद तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।
एक अन्य मामले में 84 वर्षीय सेवानिवृत्त बैंक कर्मचारी को सुप्रीम कोर्ट अधिकारी बनकर फोन किया गया। आरोपी ने फर्जी दस्तावेज भेजकर कानूनी कार्रवाई का डर दिखाया। पीड़ित ने तीन RTGS ट्रांजेक्शन के माध्यम से लगभग ₹89.30 लाख ट्रांसफर कर दिए। जांच के दौरान यह धन विजयनगरम स्थित बैंक खाते तक पहुंचा, जहां से आरोपी च. रवि को गिरफ्तार किया गया।
तीसरे मामले में सोशल मीडिया विज्ञापन के जरिए एक व्यक्ति को फर्जी निवेश योजना में फंसाया गया। पीड़ित को व्हाट्सएप ग्रुप में जोड़कर “एक्सिस सिक्योरिटीज” नामक समूह का सदस्य बनाया गया और “हैमटन स्काई रियल्टी लिमिटेड” नामक संदिग्ध प्लेटफॉर्म पर ट्रेडिंग कराने का लालच दिया गया। इस जाल में फंसकर पीड़ित ने ₹48.21 लाख ट्रांसफर किए।
जांच में यह भी सामने आया कि गिरोह के सदस्य फर्जी कंपनियों के नाम पर बैंक खाते खोलते थे और प्रत्येक ट्रांजेक्शन पर कमीशन लेते थे। बिक्किना रघु वंशी नाम के आरोपी ने फेसबुक विज्ञापन के माध्यम से खाता खोलने के लिए संपर्क किया था और प्रति ट्रांजेक्शन एक प्रतिशत कमीशन का वादा किया गया था। पुलिस ने एक लैपटॉप, दो POS स्वाइप मशीन और एक QR कोड स्कैनर भी जब्त किया है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि साइबर अपराधी मोबाइल फोन में APK फाइल इंस्टॉल कराकर खातों पर नियंत्रण हासिल कर लेते थे। इसके बाद संदिग्ध ट्रांजेक्शन कर रकम को कई खातों में घुमाया जाता था ताकि जांच एजेंसियों को ट्रेल खोजने में कठिनाई हो।
साइबर विशेषज्ञों ने नागरिकों को सलाह दी है कि वे अनजान लिंक पर क्लिक न करें और संदिग्ध कॉल या संदेशों से सावधान रहें। विशेष रूप से निवेश के नाम पर अधिक लाभ का लालच देने वाले ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से दूरी बनाए रखने की अपील की गई है।
पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क के अंतरराष्ट्रीय संपर्कों की भी जांच कर रही है। अधिकारियों का मानना है कि गिरोह के अन्य सदस्य भी हो सकते हैं। मामले की विस्तृत जांच जारी है और आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां होने की संभावना जताई जा रही है।
