भोजपुर थाना क्षेत्र में फर्जी पतों पर जारी हुए 22 पासपोर्ट के मामले में जांच तेज कर दी गई है। इस प्रकरण में जेल में बंद पोस्टमैन अरुण कुमार और पासपोर्ट एजेंट विवेक गांधी को पुलिस कस्टडी रिमांड पर लेने की तैयारी है। पुलिस ने दोनों से पूछताछ के लिए कोर्ट में 14 दिन की रिमांड का आवेदन किया है, जिस पर निर्णय होना है।
पोस्टमैन और एजेंट को 14 दिन रिमांड
जांच एजेंसियों के अनुसार, फर्जीवाड़े के इस मामले में अब तक पांच आरोपित जेल भेजे जा चुके हैं। इनमें से पोस्टमैन अरुण कुमार और एजेंट विवेक गांधी की भूमिका अहम मानी जा रही है। पुलिस का मानना है कि रिमांड के दौरान दोनों से पूछताछ कर पूरे नेटवर्क और इसमें शामिल अन्य लोगों की जानकारी जुटाई जा सकेगी।
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22 फर्जी पासपोर्ट: असली आवेदकों की पहचान अभी भी रहस्य
बताया जा रहा है कि फर्जी पतों पर 22 पासपोर्ट जारी हुए, लेकिन कई दिन की जांच के बाद भी यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि जिन लोगों के नाम पर पासपोर्ट बने, वे वास्तव में कौन हैं और कहां के रहने वाले हैं। इससे सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ गई है। पासपोर्ट जैसे संवेदनशील दस्तावेज का गलत हाथों में जाना गंभीर मामला माना जा रहा है।
जांच में सामने आया है कि पूरे रैकेट में एजेंट विवेक गांधी मध्यस्थ की भूमिका में था। वह कथित रूप से आवेदकों और अन्य संबंधित लोगों के बीच कड़ी का काम करता था। रिमांड अवधि के दौरान उससे यह पूछताछ की जाएगी कि आवेदन किसके कहने पर किए गए, दस्तावेज कैसे जुटाए गए और किन-किन लोगों की इसमें संलिप्तता रही।
पुलिस एक अन्य संदिग्ध पोस्टमैन से भी पूछताछ कर रही है। संभावना है कि आमना-सामना कराकर आरोपितों से सच्चाई उगलवाई जाएगी। गिरफ्तार पोस्टमैन द्वारा दी गई जानकारी की पुष्टि के लिए भी आगे की पूछताछ जरूरी बताई जा रही है।
मामले में एक सिपाही दीपक कुमार का नाम भी सामने आया है, जो फिलहाल फरार है। उसकी तलाश के लिए दबिश दी जा रही है। गिरफ्तारी न होने की स्थिति में उसके खिलाफ इनाम घोषित किए जाने की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है। जांच एजेंसियों का कहना है कि उसकी गिरफ्तारी के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि इस फर्जीवाड़े के एवज में कितनी रकम का लेन-देन हुआ।
पुलिस वेरीफिकेशन चूक और डिजिटल साक्ष्य जांच
सूत्रों के अनुसार, पासपोर्ट आवेदन से लेकर जारी होने तक की प्रक्रिया में पुलिस वेरीफिकेशन की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इसी चरण में अनियमितता की आशंका जताई जा रही है। जांच में यह भी देखा जा रहा है कि किन परिस्थितियों में फर्जी पते सत्यापित किए गए और दस्तावेजों की जांच में कहां चूक हुई।
क्राइम ब्रांच कई संदिग्ध मोबाइल नंबरों के आधार पर भी आरोपितों की कड़ियां जोड़ने में लगी है। कॉल डिटेल रिकॉर्ड और डिजिटल साक्ष्यों की जांच की जा रही है। जब्त किए गए दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को भी खंगाला जा रहा है, ताकि पूरे नेटवर्क का खुलासा किया जा सके।
जांच अधिकारियों का कहना है कि रिमांड मिलने के बाद पूछताछ के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। साथ ही यह भी पता लगाया जाएगा कि क्या इस फर्जीवाड़े में अन्य जिलों या राज्यों के लोग भी शामिल हैं। मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस सभी पहलुओं की गहन जांच कर रही है।
