साइबर सेल की प्रतिबिंब इकाई ने क्रेडिट कार्ड बनवाने और उसकी लिमिट बढ़ाने के नाम पर ऑनलाइन ठगी करने वाले गिरोह के तीन शातिरों को गिरफ्तार किया है। कार्रवाई मंगलवार को की गई। तीनों आरोपियों को सारनाथ क्षेत्र के अकथा स्थित एक किराये के कमरे से पकड़ा गया, जहां से वे लंबे समय से अपने नेटवर्क का संचालन कर रहे थे।
गिरफ्तार आरोपियों में बलिया निवासी अनीश वर्मा, झारखंड के देवघर निवासी पुरुषोत्तम कुमार और टुकटुक पंडित शामिल हैं। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि झारखंड निवासी दोनों आरोपी पहले भी साइबर ठगी के मामलों में संलिप्त रह चुके हैं। करीब डेढ़ वर्ष से तीनों वाराणसी में किराये का कमरा लेकर रह रहे थे और वहीं से सोशल मीडिया के जरिए लोगों को निशाना बना रहे थे।
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पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जैसे फेसबुक, इंस्टाग्राम और एक्स पर आकर्षक विज्ञापन जारी किए थे। इन विज्ञापनों में दावा किया जाता था कि कम समय में आसान प्रक्रिया के जरिए क्रेडिट कार्ड बनवाया जा सकता है या मौजूदा कार्ड की लिमिट बढ़ाई जा सकती है। विज्ञापन में एक मोबाइल नंबर दिया जाता था, जिस पर संपर्क करने के लिए कहा जाता था।
जब कोई व्यक्ति दिए गए नंबर पर संपर्क करता था, तो आरोपी खुद को आईसीआईसीआई बैंक का कर्मचारी बताकर कॉल रिसीव करते थे। वे बेहद पेशेवर अंदाज में बातचीत करते और भरोसा जीतने के लिए बैंकिंग से जुड़े शब्दों का इस्तेमाल करते थे। इसके बाद पीड़ितों से उनका नाम, पता, मोबाइल नंबर और बैंक खाते से जुड़ी जानकारी ली जाती थी।
जानकारी हासिल करने के बाद आरोपियों द्वारा व्हाट्सऐप पर एक एपीके फाइल भेजी जाती थी। इस फाइल पर आईसीआईसीआई बैंक क्रेडिट कार्ड का नाम लिखा होता था, जिससे लोगों को यह विश्वास हो जाता था कि यह आधिकारिक ऐप या दस्तावेज है। कई मामलों में पीड़ितों को फाइल इंस्टॉल करने के लिए कहा जाता था। फाइल डाउनलोड और इंस्टॉल होते ही आरोपियों को पीड़ित के मोबाइल और बैंकिंग से जुड़ी संवेदनशील जानकारी तक पहुंच मिल जाती थी, जिसके जरिए वे खातों से रकम निकाल लेते थे या अन्य वित्तीय लेनदेन कर लेते थे।
जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी लोगों को तत्काल स्वीकृति, बिना दस्तावेज के कार्ड और उच्च क्रेडिट लिमिट जैसे लालच देकर फंसाते थे। कई पीड़ितों ने यह सोचकर भरोसा कर लिया कि बैंक का प्रतिनिधि ही बात कर रहा है, क्योंकि बातचीत पेशेवर तरीके से की जाती थी और एपीके फाइल पर बैंक का नाम दर्ज होता था।
आरोपियों के मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल उपकरणों की जांच तथा एनसीआरपी (नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल) पर दर्ज शिकायतों के आधार पर पता चला कि गिरोह अब तक 56 लोगों को अपना शिकार बना चुका था। इन पीड़ितों से 50 लाख रुपये से अधिक की ठगी की गई है। पुलिस का मानना है कि शिकायत दर्ज न कराने वाले पीड़ितों की संख्या इससे अधिक भी हो सकती है।
छापेमारी के दौरान आरोपियों के पास से कई मोबाइल फोन, सिम कार्ड और डिजिटल उपकरण बरामद किए गए हैं। जब्त किए गए उपकरणों को फोरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि गिरोह का नेटवर्क कितना बड़ा है और क्या अन्य लोग भी इसमें शामिल हैं।
पुलिस का कहना है कि मामले की विस्तृत जांच जारी है। साथ ही लोगों से अपील की गई है कि सोशल मीडिया पर दिए गए किसी भी बैंकिंग संबंधी विज्ञापन पर आंख मूंदकर भरोसा न करें और किसी भी संदिग्ध लिंक या एपीके फाइल को डाउनलोड करने से पहले संबंधित बैंक की आधिकारिक वेबसाइट या शाखा से पुष्टि अवश्य कर लें।
