नई दिल्ली: मैसेजिंग प्लेटफॉर्म WhatsApp ने कहा है कि वह डेटा शेयरिंग नीति को लेकर उठे विवाद में नियामकीय निर्देशों का पालन करेगा। कंपनी ने घोषणा की है कि वह 16 मार्च तक Competition Commission of India द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का अनुपालन करेगी। यह बयान Supreme Court of India में चल रहे मामले की सुनवाई के दौरान दिया गया।
हलफनामे में प्राइवेसी उल्लंघन से इनकार
वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने अदालत को बताया कि कंपनी ने एक हलफनामा दायर किया है जिसमें दावा किया गया है कि उसने विज्ञापन उद्देश्यों के लिए यूजर डेटा साझा करके प्राइवेसी का उल्लंघन नहीं किया है, जैसा कि प्रतिस्पर्धा आयोग ने आरोप लगाया था। सुनवाई के दौरान अदालत ने इस बयान को रिकॉर्ड में लेते हुए कंपनी से औपचारिक अनुपालन हलफनामा दाखिल करने को कहा और मामले की अगली सुनवाई अप्रैल तक के लिए तय कर दी।
2021 की विवादित प्राइवेसी नीति से जुड़ा मामला
यह मामला वर्ष 2021 की विवादित प्राइवेसी नीति से जुड़ा है, जब Meta Platforms Inc. के स्वामित्व वाले व्हाट्सएप पर यूजर डेटा शेयरिंग को लेकर गंभीर सवाल उठे थे। प्रतिस्पर्धा आयोग ने आरोप लगाया था कि कंपनी ने “टेक इट ऑर लीव इट” नीति के जरिए उपयोगकर्ताओं की सहमति के बिना डेटा उपयोग की शर्तें लागू की थीं।
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CCI का जुर्माना और कानूनी चुनौती
इस मामले में Competition Commission of India ने मेटा पर 213 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया था। बाद में इस आदेश को चुनौती देते हुए व्हाट्सएप और मेटा ने अपील दायर की, जबकि नियामक संस्था ने भी कुछ निष्कर्षों को चुनौती दी थी।
सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी
सुप्रीम कोर्ट ने पिछली सुनवाई में डिजिटल प्लेटफॉर्म की डेटा प्रबंधन नीति पर कड़ी टिप्पणी करते हुए प्राइवेसी अधिकारों के महत्व को रेखांकित किया था। अदालत ने कहा था कि देश में व्यक्तिगत गोपनीयता के अधिकार के साथ किसी भी तरह का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।
न्यायालय ने स्पष्ट किया था कि प्लेटफॉर्म्स को भारतीय कानूनों का पालन करना होगा और यूजर डेटा की सुरक्षा सुनिश्चित करनी होगी। सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी कहा था कि लाखों लोगों का डेटा बिना उचित सुरक्षा उपायों के उपयोग करना निजी जानकारी की चोरी जैसा हो सकता है।
डिजिटल प्राइवेसी कानूनों पर व्यापक असर
सरकार और नियामक एजेंसियां लंबे समय से सोशल मीडिया और डिजिटल संचार प्लेटफॉर्म पर डेटा सुरक्षा नियमों को मजबूत करने की दिशा में काम कर रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला भारत में डिजिटल प्राइवेसी कानूनों के भविष्य को भी प्रभावित कर सकता है।
कंपनी के वकील ने अदालत को आश्वासन दिया कि नियामकीय निर्देशों के अनुसार डेटा शेयरिंग प्रक्रिया में आवश्यक बदलाव किए जाएंगे। हालांकि, व्हाट्सएप ने अपने पहले के रुख को दोहराते हुए कहा है कि उसने कभी भी यूजर प्राइवेसी का उल्लंघन नहीं किया।
अप्रैल में अगली सुनवाई
मामले की अगली सुनवाई अप्रैल में होने की संभावना है, जहां कंपनी की ओर से अनुपालन रिपोर्ट पेश की जाएगी। डिजिटल प्राइवेसी और डेटा सुरक्षा से जुड़े इस मामले पर तकनीकी और कानूनी विशेषज्ञों की नजर बनी हुई है।
