अहमदाबाद: Ahmedabad City Police की साइबर क्राइम शाखा ने शेयर बाजार निवेश के नाम पर की गई करीब ₹1.54 करोड़ की ठगी के मामले का खुलासा करते हुए पांच लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनमें तीन वर्तमान कर्मचारी IndusInd Bank के भी शामिल बताए जा रहे हैं। आरोप है कि यह पूरा खेल ‘चाइनीज निवेश’ के नाम पर चल रहे एक संगठित साइबर नेटवर्क के जरिये अंजाम दिया गया।
व्हाट्सऐप–टेलीग्राम ग्रुप के जरिए फंसाया गया पीड़ित
पुलिस के अनुसार, यह ठगी 15 दिसंबर से 4 फरवरी के बीच की गई। आरोपी व्हाट्सऐप और टेलीग्राम पर ‘91 BARCLAYS–Stock Market Pioneer’ नाम से ग्रुप चलाकर लोगों को उच्च रिटर्न वाले शेयर ट्रेडिंग और आईपीओ निवेश का लालच दे रहे थे। पीड़ित को एक फर्जी एप लिंक app.portfoliobulfi.icu भेजकर उसे डाउनलोड करने के लिए कहा गया। इसके बाद निवेश टिप्स देने के नाम पर उसे ऑनलाइन समूहों में जोड़ा गया।
भरोसा जीतने के लिए दिखाए गए नकली मुनाफे
जांच में सामने आया कि आरोपियों ने भरोसा जीतने के लिए नियमित रूप से बाजार सलाह और मुनाफे के स्क्रीनशॉट साझा किए। जब पीड़ित ने निवेश शुरू किया, तो उससे विभिन्न बैंक खातों में ₹1.54 करोड़ ट्रांसफर कराए गए। रकम जमा होने के बाद आरोपी संपर्क तोड़कर फरार हो गए और पैसे वापस नहीं किए।
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पांच आरोपी गिरफ्तार, दो मास्टरमाइंड फरार
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान हरेशभाई शामजीभाई मकवाना (44), राजूभाई मधुभाई मकवाना (27), महेश राजेशकुमार तराणी (24), पूजाबेन फ्रेडरिक परियत और हीना दिव्यम राजेंद्रभाई टेलर (27) के रूप में हुई है। पुलिस के मुताबिक हरेशभाई मकवाना को 10 फरवरी को गिरफ्तार किया गया था, जबकि बाकी आरोपियों को अहमदाबाद, सूरत और भावनगर में समन्वित छापेमारी के बाद पकड़ा गया।
आरोप है कि इस पूरे षड्यंत्र में फरार मास्टरमाइंड हरकिशन धापा और आकिब उर्फ कालूभाई लखेपोटा भी शामिल हैं, जिनके अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट से जुड़े होने की आशंका जताई जा रही है। जांच अधिकारियों ने कहा कि नेटवर्क विदेश आधारित ठगी मॉड्यूल के साथ भी संपर्क में हो सकता है, जिसकी पड़ताल जारी है।
बैंक कर्मचारियों पर गंभीर आरोप
पुलिस का दावा है कि बैंक कर्मचारियों ने नियमों के उल्लंघन में संदिग्ध लेनदेन को संभव बनाने में मदद की। आरोप है कि खाते से जुड़े पंजीकृत मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी को खाताधारक की मौजूदगी के बिना बदला गया। इसके अलावा नेट बैंकिंग के जरिए स्वेप फिक्स्ड डिपॉजिट बनाकर रकम को अस्थायी रूप से पार्क करने और फिर तेजी से अन्य खातों में भेजने की प्रक्रिया अपनाई गई।
ठगी की रकम से सोने की खरीद
जांच में यह भी पता चला कि ठगी की रकम का एक हिस्सा भुगतान गेटवे के जरिये अहमदाबाद के शिवरंजनी इलाके में स्थित एक आभूषण शोरूम तक पहुंचाया गया, जहां से करीब ₹10.46 लाख मूल्य के सोने की खरीद की गई। पुलिस का मानना है कि यह सोना फरार आरोपियों को सौंपा गया था।
देशभर में 414 शिकायतों से कनेक्शन
साइबर क्राइम शाखा के अधिकारियों ने बताया कि मामले की जांच के दौरान राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCCRP) के आंकड़ों सहित बैंक रिकॉर्ड और तकनीकी डेटा का विश्लेषण किया गया। जांच में पाया गया कि देशभर में कम से कम 414 शिकायतें ऐसे म्यूल खातों से जुड़ी हो सकती हैं, जो इसी बैंकिंग चैनल और IFSC कोड का उपयोग कर संचालित किए जा रहे थे।
पुलिस को संदेह है कि ठगी के लिए सीमित आर्थिक पृष्ठभूमि वाले लोगों के नाम पर म्यूल खाते खोले गए थे, जिनका इस्तेमाल अपराध की रकम को निकालने और घुमाने में किया गया।
जब्त सामग्री और आगे की जांच
जांच के दौरान पुलिस ने सात मोबाइल फोन, एक लैपटॉप, सात चेकबुक, छह एटीएम कार्ड, दो डिमांड ड्राफ्ट स्टैंप, सिम कार्ड और बैंक दस्तावेज जब्त किए हैं। आरोपियों की संपत्ति और नकद समेत लगभग ₹1.07 लाख की जब्ती भी की गई है।
अधिकारियों ने कहा कि फरार मास्टरमाइंड की तलाश जारी है और मामले में अन्य बैंक कर्मचारियों की भूमिका तथा संभावित अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन की भी जांच की जा रही है। साइबर विशेषज्ञों ने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी ऑनलाइन निवेश प्लेटफॉर्म की प्रामाणिकता की जांच किए बिना धन ट्रांसफर न करें, क्योंकि निवेश के नाम पर साइबर ठगी के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं।
