जौनपुर जिला न्यायालय परिसर और पुलिस लाइन गेट को बम से उड़ाने की धमकी के मामले में एटीएस ने बड़ा खुलासा करते हुए आजमगढ़ निवासी विशाल रंजन को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया है कि आरोपी ने प्रेमिका की शादी रुकवाने और उसके मंगेतर को फंसाने के लिए पूरी साजिश रची थी। इसके लिए उसने 50 से अधिक फर्जी ईमेल आईडी बनाईं, पांच मोबाइल फोन और एक लैपटॉप का इस्तेमाल किया तथा धमकी भरे मेल भेजकर ₹1 लाख की मांग की।
एटीएस के अनुसार 17 फरवरी को जिला जज के आधिकारिक ईमेल पते पर पांच अलग-अलग आईडी से धमकी भरे मेल भेजे गए थे। मेल में कोर्ट परिसर और पुलिस लाइन गेट को उड़ाने की चेतावनी दी गई थी। शिकायत मिलने के बाद मामला दर्ज कर जांच एटीएस को सौंपी गई।
Certified Cyber Crime Investigator Course Launched by Centre for Police Technology
डिजिटल ट्रेल से आजमगढ़ तक पहुंची जांच
आरोपी ने अपनी पहचान छिपाने के लिए वीपीएन और प्रॉक्सी सर्वर का इस्तेमाल किया था, लेकिन साइबर फॉरेंसिक जांच में डिजिटल ट्रेल आजमगढ़ के निजामाबाद क्षेत्र तक पहुंच गई। इसके बाद एटीएस ने सिधारी इलाके में किराए के कमरे पर छापा मारकर उसे गिरफ्तार कर लिया। तलाशी में पांच मोबाइल फोन और एक लैपटॉप बरामद हुए। प्राथमिक जांच में सामने आया कि इन्हीं डिवाइस से 50 से ज्यादा फर्जी ईमेल आईडी बनाई गई थीं और 17 फरवरी को भेजी गई धमकियां इन्हीं से भेजी गईं।
रोडवेज डिपो को भी निशाना बनाने की तैयारी
जांच में यह भी पता चला कि आरोपी आजमगढ़ रोडवेज डिपो को भी इसी तरह की बम धमकी भेजने की तैयारी कर रहा था। उसने इसके लिए मेल ड्राफ्ट कर लिया था और परिवहन निगम के आधिकारिक ईमेल पते पर भेजने वाला था, लेकिन उससे पहले ही उसे गिरफ्तार कर लिया गया।
प्रेम प्रसंग से शुरू हुआ आपराधिक षड्यंत्र
पूछताछ में आरोपी ने बताया कि वह एक युवती से संबंध में था, जिसकी शादी जौनपुर में तय हो गई थी। इससे नाराज होकर उसने पहले युवती के मंगेतर के नाम से फर्जी सोशल मीडिया प्रोफाइल बनाकर आपत्तिजनक पोस्ट डाली। मामला पंचायत तक पहुंचा, जहां उसे सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी पड़ी। इसी बेइज्जती का बदला लेने के लिए उसने बड़ा षड्यंत्र रचा।
उसने मंगेतर और उसके गांव के कुछ युवकों के नाम व मोबाइल नंबर का इस्तेमाल कर फर्जी ईमेल आईडी बनाई और उन्हीं के नाम से कोर्ट को बम धमकी भेज दी, ताकि जांच में वे लोग फंस जाएं और जेल चले जाएं।
कोर्ट परिसर में बढ़ाई गई सुरक्षा
धमकी के बाद जौनपुर कोर्ट परिसर की सुरक्षा कड़ी कर दी गई थी। व्यापक तलाशी अभियान चलाया गया, लेकिन कोई विस्फोटक सामग्री नहीं मिली। एटीएस का कहना है कि साइबर माध्यम से दी गई धमकियों को भी उतनी ही गंभीरता से लिया जाता है जितनी वास्तविक हमलों को।
साइबर धमकियों को लेकर बढ़ती चिंता
हाल के दिनों में उत्तर प्रदेश के कई जिलों में कोर्ट परिसरों को ईमेल के जरिए बम धमकी मिलने की घटनाएं सामने आई हैं। जांच एजेंसियां इनके बीच संभावित कड़ी की भी पड़ताल कर रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि वीपीएन और प्रॉक्सी से पहचान छिपाना स्थायी नहीं होता और उन्नत डिजिटल फॉरेंसिक तकनीक से स्रोत तक पहुंचा जा सकता है।
आरोपी को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। जब्त इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की विस्तृत फॉरेंसिक जांच जारी है, जिससे यह पता लगाया जा रहा है कि कहीं इसी तरह की धमकियां अन्य स्थानों पर भी तो नहीं भेजी गईं।
