उत्तर प्रदेश के रायबरेली जिले के हरचंदपुर क्षेत्र में ₹2 के कुल्हड़ और छोटे मिट्टी के बर्तन बेचकर गुजारा करने वाले मोहम्मद सईद को ₹1.25 करोड़ का जीएसटी नोटिस मिलने से परिवार सदमे में है। सईद का कहना है कि उन्होंने कभी कोई कंपनी नहीं चलाई, न ही बड़े पैमाने पर कारोबार किया। उन्हें आशंका है कि उनके आधार और पैन कार्ड का दुरुपयोग कर किसी ने फर्जी फर्म खड़ी की और करोड़ों के लेनदेन दिखा दिए।
मामला सामने आने के बाद सईद और उनके परिजन स्थानीय प्रशासन के पास पहुंचे। परिवार का दावा है कि नोटिस में जिस कंपनी का जिक्र है, उससे उनका कोई संबंध नहीं है। सईद का कहना है, “हम रोज़ाना कुछ दर्जन कुल्हड़ और छोटे बर्तन बेचते हैं। इतनी बड़ी रकम का कारोबार तो हमने सपने में भी नहीं सोचा। अगर हमारे दस्तावेज़ों का गलत इस्तेमाल हुआ है, तो इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।”
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नोटिस के अनुसार, संबंधित फर्म पर बड़े पैमाने पर कर देनदारी दिखाई गई है। परिवार का कहना है कि उन्हें पहले कभी किसी व्यावसायिक गतिविधि या जीएसटी रजिस्ट्रेशन के बारे में जानकारी नहीं दी गई। सईद ने बताया कि उन्होंने किसी को भी अपने दस्तावेज़ कारोबार के लिए अधिकृत नहीं किया।
स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, शुरुआती स्तर पर यह आशंका जताई जा रही है कि पहचान दस्तावेज़ों का उपयोग कर फर्जी जीएसटी पंजीकरण कराया गया होगा। पिछले कुछ वर्षों में देशभर में ऐसी घटनाएं सामने आई हैं, जिनमें आधार–पैन की जानकारी का दुरुपयोग कर शेल कंपनियां बनाई गईं और फर्जी बिलिंग के जरिए टैक्स क्रेडिट का लाभ उठाया गया।
परिवार ने प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की साइबर और वित्तीय जांच कराई जाए, ताकि असली दोषियों का पता लगाया जा सके। उन्होंने यह भी कहा कि जब तक जांच पूरी न हो, तब तक नोटिस पर कार्रवाई स्थगित की जाए, क्योंकि उनकी आर्थिक स्थिति इतनी मजबूत नहीं कि वे कानूनी लड़ाई लंबी खींच सकें।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यदि किसी व्यक्ति के दस्तावेज़ों का दुरुपयोग कर जीएसटी रजिस्ट्रेशन कराया गया है, तो वह संबंधित विभाग में आपत्ति दर्ज कर सकता है। ऐसे मामलों में पहचान सत्यापन, बैंक खातों की जांच और डिजिटल हस्ताक्षर के रिकॉर्ड की पड़ताल अहम होती है। विशेषज्ञों के मुताबिक, पीड़ित व्यक्ति को तत्काल लिखित शिकायत दर्ज करानी चाहिए और यह स्पष्ट करना चाहिए कि कथित कारोबार से उसका कोई लेना–देना नहीं है।
स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों ने संकेत दिया है कि मामले की प्रारंभिक जांच कराई जा रही है। यदि दस्तावेज़ों के दुरुपयोग की पुष्टि होती है, तो संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
गांव के लोगों का कहना है कि सईद का परिवार वर्षों से पारंपरिक कुम्हारी का काम करता आ रहा है और उनकी आय बेहद सीमित है। पड़ोसियों ने भी प्रशासन से मामले को संवेदनशीलता के साथ देखने की अपील की है।
इस घटना ने एक बार फिर पहचान दस्तावेज़ों की सुरक्षा और जीएसटी पंजीकरण प्रक्रिया की निगरानी पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल लेनदेन और ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन के दौर में केवाईसी सत्यापन को और सख्त बनाने की जरूरत है, ताकि कमजोर वर्ग के लोगों के दस्तावेज़ों का दुरुपयोग न हो सके।
फिलहाल, मोहम्मद सईद और उनका परिवार जांच के निष्कर्ष का इंतजार कर रहा है। उनका कहना है कि वे केवल इतना चाहते हैं कि सच्चाई सामने आए और उन्हें ऐसी देनदारी से राहत मिले, जिसका उनसे कोई संबंध नहीं।
