म्यांमार-कंबोडिया सीमा पर स्कैम सेंटर्स के किले जैसे ठिकाने जहां 3 लाख लोग साइबर ठगी के लिए बंधक; UN रिपोर्ट में यातना का खुलासा।

स्कैम सेंटर्स में फंसे तीन लाख लोग, भारत समेत 66 देशों के नागरिक बंधक

Team The420
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दक्षिण-पूर्व एशिया में तेजी से फैलते साइबर अपराध को संयुक्त राष्ट्र ने गंभीर मानवीय संकट करार दिया है। ताजा रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि म्यांमार, कंबोडिया और लाओस के दूरदराज इलाकों में संचालित स्कैम सेंटर्स में भारत समेत 66 देशों के लगभग तीन लाख नागरिकों को जबरन काम करने के लिए बंधक बनाकर रखा गया है।

स्कैम सेंटर्स का संकट

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय की ‘ए विक्ड प्रॉब्लम’ शीर्षक से जारी रिपोर्ट के अनुसार, इन लोगों को उच्च वेतन वाली नौकरियों का झांसा देकर दक्षिण-पूर्व एशिया ले जाया गया, जहां पहुंचते ही उनके पासपोर्ट और पहचान पत्र छीन लिए गए और उन्हें साइबर ठगी के नेटवर्क में काम करने के लिए मजबूर किया गया। रिपोर्ट में कहा गया है कि यह उद्योग अब संगठित अपराध, मानव तस्करी और डिजिटल वित्तीय धोखाधड़ी का संयुक्त रूप बन चुका है।

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ठगी का वैश्विक पैमाना

रिपोर्ट के मुताबिक, स्कैम सेंटर्स में कैद लोगों से फर्जी निवेश योजनाओं, रोमांस स्कैम, क्रिप्टोकरेंसी धोखाधड़ी और कॉल-आधारित ठगी के जरिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अरबों डॉलर की ठगी करवाई जाती है। अनुमान है कि इस अवैध साइबर उद्योग का सालाना राजस्व लगभग 64 बिलियन डॉलर (करीब ₹5.3 लाख करोड़) तक पहुंच चुका है, जो कई छोटे देशों की जीडीपी के बराबर है।

मानवाधिकार विशेषज्ञों ने बताया कि इन ठिकानों पर काम करने वाले लोगों को शारीरिक हिंसा, मानसिक प्रताड़ना और आर्थिक दंड का सामना करना पड़ता है। टारगेट पूरा न करने पर मारपीट, बिजली के झटके और भोजन रोकने जैसी यातनाएं दी जाती हैं। कई मामलों में भागने की कोशिश करने वालों को बंद कमरों में कैद कर दिया जाता है या उन्हें दूसरे स्कैम कैंपों में बेच दिया जाता है।

अपराधियों का संरक्षण

रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि इन सेंटर्स का संचालन सीमा पार सक्रिय आपराधिक गिरोहों द्वारा किया जाता है, जिन्हें स्थानीय सशस्त्र समूहों और भ्रष्ट नेटवर्क का संरक्षण प्राप्त है। म्यांमार के संघर्षग्रस्त सीमावर्ती क्षेत्रों में ऐसे कई ठिकाने विकसित हुए हैं, जहां कानून प्रवर्तन एजेंसियों की पहुंच सीमित है।

संयुक्त राष्ट्र ने सदस्य देशों से अपील की है कि वे मानव तस्करी के इस नेटवर्क को तोड़ने, पीड़ितों की पहचान करने और उन्हें सुरक्षित वापस लाने के लिए समन्वित कार्रवाई करें। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि साइबर धोखाधड़ी से जुड़े वित्तीय प्रवाह पर नजर रखने और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से होने वाले लेनदेन को नियंत्रित करने की जरूरत है।

वैश्विक बचाव की मांग

भारत सहित कई देशों के नागरिकों के इन स्कैम सेंटर्स में फंसे होने की पुष्टि के बाद राजनयिक स्तर पर बचाव प्रयासों की आवश्यकता पर जोर दिया गया है। पिछले कुछ महीनों में विभिन्न देशों ने संयुक्त अभियानों के जरिए सीमित संख्या में पीड़ितों को मुक्त कराया है, लेकिन रिपोर्ट के अनुसार अभी भी बड़ी संख्या में लोग बंधक बने हुए हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह संकट केवल साइबर अपराध का मामला नहीं बल्कि आधुनिक दासता का नया रूप है, जिसमें डिजिटल अर्थव्यवस्था का दुरुपयोग कर वैश्विक स्तर पर मानव शोषण किया जा रहा है।

संयुक्त राष्ट्र ने चेतावनी दी है कि यदि क्षेत्रीय सहयोग, कड़े वित्तीय निगरानी तंत्र और मानव तस्करी विरोधी अभियानों को तेज नहीं किया गया, तो यह अवैध उद्योग और अधिक फैल सकता है।

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