यूरोप की प्रमुख ऑटोमोबाइल निर्माता कंपनी Volkswagen AG बड़े पैमाने पर पुनर्गठन की दिशा में आगे बढ़ रही है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार कंपनी आने वाले वर्षों में करीब एक लाख कर्मचारियों की छंटनी पर विचार कर रही है। इसके साथ ही जर्मनी में अपनी चार प्रमुख विनिर्माण इकाइयों को बंद करने की योजना भी तैयार की जा रही है। यदि यह प्रस्ताव लागू होता है तो यह कंपनी के इतिहास के सबसे बड़े पुनर्गठन अभियानों में से एक माना जाएगा।
रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी ओलिवर ब्लूम ने इस सप्ताह प्रबंधन बोर्ड की बैठक में नई पुनर्गठन रणनीति पेश की। प्रस्ताव के तहत कर्मचारियों की संख्या में कटौती का लक्ष्य पहले की तुलना में लगभग दोगुना बढ़ाकर एक लाख तक किया जा सकता है। वर्तमान में Volkswagen Group में करीब 6.57 लाख कर्मचारी कार्यरत हैं। कंपनी का उद्देश्य परिचालन लागत कम करना और बदलते वैश्विक ऑटोमोबाइल बाजार में प्रतिस्पर्धी बने रहना है।
पुनर्गठन योजना के तहत जर्मनी की चार प्रमुख फैक्ट्रियों को बंद करने का भी प्रस्ताव है। इनमें Audi का Neckarsulm प्लांट तथा Volkswagen के Hanover, Zwickau और Emden संयंत्र शामिल हैं। इसके अलावा कुछ कंपोनेंट निर्माण इकाइयों और Volkswagen ब्रांड के संगठनात्मक ढांचे में भी बदलाव किए जाने की संभावना है। कंपनी का मानना है कि इससे उत्पादन प्रक्रिया अधिक लागत-कुशल बनेगी और संसाधनों का बेहतर उपयोग हो सकेगा।
Volkswagen ने दशक के अंत तक लगभग 11 अरब यूरो की ओवरहेड लागत कम करने का लक्ष्य तय किया है। हाल के वर्षों में कंपनी को कई मोर्चों पर चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। चीन में बिक्री में गिरावट, अमेरिका की व्यापार नीतियों और शुल्क संबंधी दबाव, यूरोप में इलेक्ट्रिक वाहन बाजार में बढ़ती प्रतिस्पर्धा तथा BYD और Stellantis जैसी कंपनियों की मजबूत मौजूदगी ने कंपनी के लाभ पर असर डाला है।
इन्हीं चुनौतियों से निपटने के लिए कंपनी लगातार अपनी परिसंपत्तियों का पुनर्गठन कर रही है। हाल ही में Volkswagen ने अपनी Everllence मरीन इंजन यूनिट में 51 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचकर अतिरिक्त नकदी जुटाई थी। कंपनी का कहना है कि इस तरह के कदम भविष्य के निवेश और वित्तीय स्थिति को मजबूत बनाने में सहायक होंगे।
यह पहली बार नहीं है जब Volkswagen ने कर्मचारियों की संख्या घटाने की योजना बनाई हो। कंपनी पहले ही वर्ष 2030 तक समूह स्तर पर 50,000 नौकरियां कम करने का लक्ष्य घोषित कर चुकी है। कंपनी के अनुसार अब तक लगभग 28,000 कर्मचारी स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति अथवा अन्य योजनाओं के तहत संगठन छोड़ने पर सहमत हो चुके हैं। इसके साथ ही कंपनी अपनी वार्षिक उत्पादन क्षमता को लगभग 1.2 करोड़ वाहनों से घटाकर करीब 90 लाख वाहन करने की दिशा में भी काम कर रही है।
हालांकि प्रस्तावित पुनर्गठन को लेकर कर्मचारी संगठनों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। Volkswagen वर्क्स काउंसिल और IG Metall यूनियन ने संयुक्त बयान जारी कर कहा कि इतनी बड़ी संख्या में रोजगार समाप्त करने और फैक्ट्रियां बंद करने की योजना कर्मचारियों तथा संबंधित क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय है। यूनियनों ने स्पष्ट किया है कि यदि कंपनी इस दिशा में आगे बढ़ती है तो उसका व्यापक स्तर पर विरोध किया जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि Volkswagen के लिए इतनी बड़ी छंटनी को लागू करना आसान नहीं होगा। कंपनी के सुपरवाइजरी बोर्ड में आधी सीटें कर्मचारी प्रतिनिधियों के पास हैं, जबकि जर्मनी के लोअर सैक्सनी राज्य के प्रतिनिधि भी बोर्ड का हिस्सा हैं और वे परंपरागत रूप से कर्मचारी हितों का समर्थन करते रहे हैं। ऐसे में प्रबंधन और यूनियनों के बीच आने वाले महीनों में लंबी बातचीत और समझौते की प्रक्रिया देखने को मिल सकती है।
वैश्विक ऑटो उद्योग तेजी से इलेक्ट्रिक वाहनों, डिजिटल तकनीक और बदलती उपभोक्ता मांग की ओर बढ़ रहा है। इसी बदलाव के बीच Volkswagen का यह पुनर्गठन अभियान आने वाले वर्षों में कंपनी की रणनीति और वैश्विक ऑटो उद्योग की दिशा तय करने वाले महत्वपूर्ण घटनाक्रमों में शामिल माना जा रहा है।
