आय और टैक्स संबंधी जानकारी समेत निजी व कारोबारी विवरण प्रभावित; पेरिस अभियोजक कार्यालय की साइबर क्राइम यूनिट ने शुरू की जांच, पहचान चोरी और फिशिंग हमलों का खतरा बढ़ा

फ्रांस की टैक्स एजेंसी पर बड़ा साइबर हमला, 6.78 लाख करदाताओं का डेटा चोरी

Roopa
By Roopa
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नई दिल्ली: फ्रांस की टैक्स प्रशासन प्रणाली पर हुए एक जटिल साइबर हमले में करीब 6.78 लाख लोगों और कारोबारों का डेटा चोरी होने का मामला सामने आया है। फ्रांसीसी अधिकारियों के अनुसार, हमलावरों ने टैक्स सिस्टम से जुड़े उपयोगकर्ताओं की व्यक्तिगत और वित्तीय जानकारी तक पहुंच बनाई। घटना के बाद पेरिस के अभियोजक कार्यालय की साइबर अपराध इकाई ने आपराधिक जांच शुरू कर दी है। मामले की जांच फ्रांस के साइबर अपराध से निपटने वाले विशेष कार्यालय OFAC को सौंपी गई है।

फ्रांस के कर प्रशासन ने बताया कि साइबर हमले के दौरान 6,78,000 उपयोगकर्ताओं से संबंधित डेटा निकाला गया। प्रभावित लोगों में निजी करदाता और कंपनियां दोनों शामिल हैं। चोरी किए गए डेटा में आय, टैक्स दर और पारिवारिक परिस्थितियों से संबंधित जानकारी शामिल होने की बात सामने आई है। अधिकारियों ने हमले को पहले सामने आए कई साइबर हमलों की तुलना में अधिक जटिल बताया है।

हालांकि, फ्रांस के Directorate-General for Public Finances (DGFiP) ने स्पष्ट किया है कि चोरी हुआ डेटा सीधे करदाताओं के सुरक्षित ऑनलाइन खातों तक पहुंच उपलब्ध नहीं कराता। यानी हमलावरों को केवल इस डेटा के आधार पर impots.gouv.fr पर सुरक्षित अकाउंट में प्रवेश करने की सुविधा नहीं मिली है। इसके बावजूद सुरक्षा विशेषज्ञों के लिए यह घटना गंभीर चिंता का विषय है, क्योंकि आय और टैक्स संबंधी वास्तविक जानकारी का इस्तेमाल बेहद विश्वसनीय दिखने वाले फिशिंग संदेश और फोन कॉल तैयार करने में किया जा सकता है।

ऐसे मामलों में साइबर अपराधी पीड़ित की वास्तविक वित्तीय या पारिवारिक जानकारी का उल्लेख करके उसका भरोसा जीत सकते हैं। इसके बाद बैंक अकाउंट, पासवर्ड, OTP या अन्य संवेदनशील जानकारी हासिल करने का प्रयास किया जा सकता है। पहचान चोरी का खतरा भी बढ़ जाता है। फ्रांसीसी अधिकारियों ने प्रभावित लोगों को संभावित फर्जी संपर्कों और व्यक्तिगत जानकारी मांगने वाले संदेशों को लेकर सतर्क रहने की सलाह दी है।

अधिकारियों ने बताया कि प्रभावित करदाताओं को घटना के बारे में सूचित करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। सूचना का उद्देश्य लोगों को पहचान चोरी और आगे होने वाले धोखाधड़ी के प्रयासों से सावधान करना है। खास तौर पर ऐसे ईमेल, फोन कॉल या संदेशों पर ध्यान देने को कहा जा रहा है जो टैक्स विभाग या सरकारी एजेंसी के नाम पर पासवर्ड, बैंकिंग जानकारी या अन्य निजी विवरण मांगें।

कारोबारों से जुड़ा चोरी हुआ डेटा तुलनात्मक रूप से कम संवेदनशील बताया गया है। इसमें SIREN Registration Numbers, कारोबारी पते और अधिकृत प्रतिनिधि के पते जैसी जानकारी शामिल है। इसके बावजूद इन विवरणों का इस्तेमाल फर्जी दस्तावेज, Business Email Compromise या लक्षित Social Engineering अभियानों में किया जा सकता है। इसलिए कारोबारी संस्थानों के लिए भी अतिरिक्त सतर्कता जरूरी मानी जा रही है।

यह घटना ऐसे समय सामने आई है जब फ्रांस की कई अन्य सरकारी संस्थाएं भी साइबर हमलों का सामना कर चुकी हैं। इससे पहले राष्ट्रीय सुरक्षित दस्तावेज एजेंसी ANTS और सांख्यिकी संस्था INSEE से जुड़े सिस्टम पर हमलों की खबरें सामने आई थीं। कम समय के भीतर कई सार्वजनिक संस्थानों को निशाना बनाए जाने से फ्रांस की सरकारी डिजिटल प्रणालियों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

फिलहाल अधिकारियों ने हमले की तकनीकी पद्धति, हमलावरों की पहचान और उनके उद्देश्य के बारे में विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की है। जांचकर्ताओं के सामने यह पता लगाने की चुनौती है कि हमलावर सरकारी सिस्टम में किस रास्ते से दाखिल हुए, डेटा तक किस स्तर की पहुंच हासिल की और चोरी की गई जानकारी का आगे इस्तेमाल किया गया है या नहीं।

साइबर सुरक्षा के लिहाज से यह घटना सरकारी डेटाबेस में मौजूद व्यक्तिगत जानकारी के दुरुपयोग के जोखिम को भी सामने लाती है। [Security Affairs](https://securityaffairs.com/?utm_source=chatgpt.com) के अनुसार, प्रभावित लोगों को विशेष रूप से उन फॉलो-अप संदेशों से सावधान रहना चाहिए जिनमें इस घटना का हवाला देकर पासवर्ड या बैंकिंग जानकारी मांगी जाए।

फ्रांसीसी अधिकारियों की जांच अब हमले के स्रोत, हमलावरों की पहचान और चोरी किए गए डेटा के संभावित इस्तेमाल पर केंद्रित है। जब तक जांच पूरी नहीं होती, प्रभावित नागरिकों और कारोबारों के लिए किसी भी संदिग्ध संपर्क को आधिकारिक मानने से पहले स्वतंत्र रूप से सत्यापन करना सबसे महत्वपूर्ण सुरक्षा उपाय होगा।

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