मीट की कीमतों में कथित हेरफेर से स्टोर को करीब ₹2.3 लाख का नुकसान; दोषसिद्धि के बाद छात्र ने कहा- कनाडा छोड़ना पड़ा तो पढ़ाई और भविष्य दोनों पर पड़ेगा असर, 20 अगस्त को सजा पर फैसला

सुपरमार्केट में प्राइस स्टिकर बदलना पड़ा भारी, भारतीय छात्र को अब निर्वासन का डर; कोर्ट से मांगा डिस्चार्ज

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By Roopa
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कॉर्नर ब्रुक: कनाडा में पढ़ाई कर रहे भारतीय छात्र जिन्स जोसेफ ने सुपरमार्केट में चोरी और धोखाधड़ी के मामलों में दोषी ठहराए जाने के बाद अदालत से डिस्चार्ज देने की मांग की है। जोसेफ का कहना है कि आपराधिक दोषसिद्धि के कारण उसकी इमिग्रेशन स्थिति प्रभावित हो सकती है और उसे कनाडा छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है। उसने अदालत को बताया कि उसने कनाडा में अपनी शिक्षा पर करीब 1 लाख कनाडाई डॉलर यानी लगभग ₹84 लाख खर्च किए हैं। यदि उसे देश छोड़ना पड़ा तो उसे अपनी डिग्री दोबारा शुरू करनी पड़ सकती है।

जोसेफ दिसंबर 2022 में कनाडा पहुंचा था और जनवरी 2023 में मेमोरियल यूनिवर्सिटी ऑफ न्यूफाउंडलैंड के ग्रेनफेल कैंपस में बैचलर ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन की पढ़ाई शुरू की। वह न्यूफाउंडलैंड एंड लैब्राडोर में करीब चार वर्षों से रह रहा है। उसका स्टडी परमिट 30 सितंबर को समाप्त होने वाला है। 24 जुलाई को उसे 5,000 कनाडाई डॉलर से कम मूल्य की धोखाधड़ी के आठ मामलों और इसी सीमा के भीतर चोरी के एक मामले में दोषी ठहराया गया था।

मीट के प्राइस स्टिकर बदलने का आरोप

यह मामला उस समय का है जब जोसेफ कॉर्नर ब्रुक स्थित डोमिनियन स्टोर में पार्ट-टाइम बुचर के रूप में काम करता था। सुनवाई के दौरान पेश किए गए सबूतों के मुताबिक, मार्च से मई 2025 के बीच स्टोर की निगरानी कैमरों की फुटेज में जोसेफ को मीट के प्राइस स्टिकर बार-बार बदलते हुए देखा गया।

आरोप है कि कीमतों में इस तरह बदलाव करके वह खुद, उसके दोस्त और कुछ अन्य कर्मचारी महंगे मीट को वास्तविक कीमत से काफी कम दाम पर खरीद सके। स्टोर ने इस गतिविधि से करीब 2,700 कनाडाई डॉलर यानी लगभग ₹2.3 लाख के नुकसान का अनुमान लगाया। इन्हीं घटनाओं से जुड़े आरोपों में अदालत ने जोसेफ को दोषी ठहराया।

हालांकि, जोसेफ ने घटनाओं को लेकर अदालत में अपना अलग पक्ष रखा। उसने कहा कि उसे पता था कि प्राइस स्टिकर बदलना स्टोर की नीति के खिलाफ था, लेकिन उसके अनुसार कर्मचारियों को ऐसा मीट ले जाने की अनुमति थी जिसे अन्यथा फेंक दिया जाता। उसका दावा था कि इसके लिए मैनेजर या किसी वरिष्ठ कर्मचारी की अनुमति ली जा सकती थी।

छात्र ने स्टोर के कामकाज पर भी उठाए सवाल

जोसेफ ने अदालत में यह भी आरोप लगाया कि उसके काम के घंटे कम कर दिए गए थे क्योंकि उसने लेबर रिलेशंस बोर्ड में शिकायत करने की बात कही थी। उसने दावा किया कि उसने स्टोर में ऐसा मीट भी देखा था जिसमें कैंसर और ट्यूमर जैसे दिखाई देने वाले हिस्से थे। उसके अनुसार, उसके पास ऐसे वीडियो मौजूद थे जिन्हें वह कथित तौर पर इस तरह के मीट का प्रमाण मानता था।

उसने यह भी दावा किया कि स्टोर कुछ अनुपयोगी मीट को कम कीमत पर रेस्तरां और टेकअवे कारोबारों को बेचता था। जोसेफ के मुताबिक, उसने अपने रूममेट्स और पड़ोसियों सहित जरूरतमंद लोगों को भी कम कीमत पर मीट उपलब्ध कराया था और उसका दावा था कि इस गतिविधि की जानकारी प्रबंधन को थी।

‘देश छोड़ना पड़ा तो पूरी डिग्री दोबारा करनी होगी’

जोसेफ ने अदालत को बताया कि इमिग्रेशन वकीलों ने उसे चेतावनी दी है कि आपराधिक दोषसिद्धि कनाडा में उसके भविष्य के निवास को प्रभावित कर सकती है। उसका कहना है कि अगर उसे कनाडा छोड़ना पड़ा तो उसकी मौजूदा पढ़ाई अधूरी रह जाएगी और उसे किसी दूसरे देश में अपनी डिग्री दोबारा शुरू करनी पड़ सकती है।

उसने यह भी बताया कि कनाडा में उसका पार्टनर है और दोनों ने साथ भविष्य बनाने की योजना बनाई है। उसके वकील एडम क्रॉकर ने अदालत से पूर्ण या सशर्त डिस्चार्ज देने का अनुरोध किया। बचाव पक्ष का तर्क है कि दोषसिद्धि का असर जोसेफ की शिक्षा, रोजगार, पोस्ट-ग्रेजुएशन वर्क के अवसरों और कनाडा में रहने की क्षमता पर पड़ सकता है।

अभियोजन ने सजा का प्रस्ताव रखा

अभियोजन पक्ष ने पांच से छह महीने से एक दिन कम की सशर्त सजा और उसके बाद 12 महीने की प्रोबेशन का प्रस्ताव दिया है। हालांकि, अदालत ने स्पष्ट किया कि संभावित इमिग्रेशन परिणामों को सजा तय करते समय ध्यान में रखा जा सकता है।

न्यायाधीश वेन गोरमन ने यह भी कहा कि आपराधिक दोषसिद्धि का अर्थ अपने आप कनाडा से निर्वासन नहीं होता। उनके अनुसार, दोषसिद्धि और देश से निष्कासन के बीच कोई स्वतः लागू होने वाला सीधा संबंध नहीं है।

इस बीच जोसेफ ने एक नई नौकरी हासिल कर ली है और उसके वकील के मुताबिक वह पढ़ाई पूरी करने के बाद भी कनाडा में काम जारी रखना चाहता है। अदालत ने सजा पर फैसला सुरक्षित रखा है। जोसेफ की डिस्चार्ज याचिका और प्रस्तावित सजा पर 20 अगस्त को निर्णय होने की उम्मीद है। फैसला यह तय करेगा कि अदालत उसकी परिस्थितियों को देखते हुए उसे डिस्चार्ज या कोई अन्य राहत देती है या अभियोजन पक्ष की प्रस्तावित सजा को स्वीकार करती है।

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