राउज एवेन्यू कोर्ट ने करीब 20,000 पन्नों की चार्जशीट पर कार्रवाई आगे बढ़ाई; NTA के तीन विषय विशेषज्ञों पर प्रश्नपत्र लीक कर आर्थिक लाभ लेने का आरोप

NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले में 13 आरोपियों पर शिकंजा, फास्ट-ट्रैक कोर्ट ने CBI चार्जशीट पर लिया संज्ञान

Roopa
By Roopa
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नई दिल्ली: NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले में दिल्ली की राउज एवेन्यू स्थित विशेष फास्ट-ट्रैक अदालत ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की करीब 20,000 पन्नों की चार्जशीट पर संज्ञान लिया है। मामले में 13 आरोपियों को कथित पेपर लीक सिंडिकेट का हिस्सा बताया गया है। अदालत की इस कार्रवाई के साथ मामला अब आरोप तय किए जाने के अगले चरण की ओर बढ़ गया है। यह मामला देश की सबसे महत्वपूर्ण प्रवेश परीक्षाओं में शामिल NEET-UG की पारदर्शिता और परीक्षा प्रणाली में उम्मीदवारों के भरोसे से जुड़ा है।

CBI की चार्जशीट के अनुसार, आरोपियों ने कथित तौर पर तीन विषयों के प्रश्नपत्रों को अवैध तरीके से हासिल कर उन्हें प्रसारित करने की साजिश रची थी। जांच एजेंसी ने आरोप लगाया है कि यह पूरा नेटवर्क आर्थिक लाभ के लिए काम कर रहा था। अदालत ने प्रारंभिक स्तर पर चार्जशीट में सामने आए तथ्यों के आधार पर सभी 13 आरोपियों को कथित परीक्षा-लीक सिंडिकेट से जुड़ा बताया है। अब न्यायिक प्रक्रिया के अगले चरण में आरोपों की प्रकृति और उनके खिलाफ उपलब्ध साक्ष्यों पर सुनवाई होगी।

मामले में National Testing Agency (NTA) से जुड़े तीन विषय विशेषज्ञों की भूमिका विशेष रूप से सामने आई है। चार्जशीट में Chemistry के P.V. Kulkarni, Physics की Manisha Sanjay Havaldar और Botany तथा Zoology की Manisha Gurunath Mandhare के नाम शामिल हैं। इन विशेषज्ञों की जिम्मेदारी परीक्षा प्रश्नपत्रों के अनुवाद, दोबारा अनुवाद और प्रूफरीडिंग से जुड़ी थी। आरोप है कि इसी जिम्मेदारी का इस्तेमाल प्रश्नपत्रों तक पहुंच हासिल करने और उन्हें कथित तौर पर बाहर पहुंचाने के लिए किया गया।

अदालत के आदेश में कहा गया कि संबंधित विशेषज्ञों ने NTA को दिए लिखित undertakings का कथित उल्लंघन किया। आरोपों के मुताबिक, Kulkarni ने अनुवाद के दौरान लागू सुरक्षा जांच की कथित कमियों का फायदा उठाकर चिट और छोटे नोट बाहर ले जाने की कोशिश की। जांच में इसे केवल परीक्षा प्रक्रिया की सामान्य चूक के रूप में नहीं देखा गया, बल्कि कथित आपराधिक विश्वासघात और भ्रष्टाचार से जुड़े अपराधों के संदर्भ में भी परखा गया है।

मामले की गंभीरता इस वजह से भी बढ़ जाती है कि आरोप किसी बाहरी व्यक्ति द्वारा परीक्षा प्रणाली में सेंध लगाने तक सीमित नहीं हैं। जांच एजेंसी के आरोपों में उन लोगों की भूमिका भी सामने आई है जिन्हें प्रश्नपत्र तैयार करने और उसकी गोपनीयता बनाए रखने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। ऐसे आरोप परीक्षा प्रणाली की आंतरिक सुरक्षा, गोपनीय दस्तावेजों की निगरानी और अधिकारियों की जवाबदेही से जुड़े व्यापक सवाल उठाते हैं।

इस मामले में फास्ट-ट्रैक अदालत का गठन भी महत्वपूर्ण है। दिल्ली हाई कोर्ट ने जुलाई में सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक और अनुचित साधनों से जुड़े आपराधिक मामलों की सुनवाई के लिए विशेष व्यवस्था की थी। इसका उद्देश्य ऐसे मामलों की सुनवाई में देरी कम करना और दोष सिद्ध होने की स्थिति में कानूनी कार्रवाई को तेजी से आगे बढ़ाना है। राउज एवेन्यू की विशेष अदालत में इस मामले की सुनवाई इसी व्यवस्था के तहत आगे बढ़ रही है।

अदालत द्वारा चार्जशीट पर संज्ञान लेने के बाद अब आरोप तय करने की प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी। लंबी न्यायिक प्रक्रिया के कारण परीक्षा घोटालों से जुड़े मामलों में अक्सर अंतिम परिणाम आने में समय लगता है। ऐसे मामलों में तेजी से सुनवाई का उद्देश्य केवल आरोपियों को जल्द सजा देना नहीं, बल्कि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के जरिए परीक्षा प्रणाली में सार्वजनिक विश्वास बनाए रखना भी है।

सुनवाई के दौरान अदालत ने मीडिया में गवाहों के नाम प्रकाशित किए जाने को लेकर भी चिंता जताई। चार्जशीट के कुछ हिस्सों के सार्वजनिक होने और गवाहों की पहचान सामने आने के मुद्दे पर अदालत ने विशेष सावधानी की आवश्यकता बताई, खासकर तब जब मामले से जुड़े कुछ गवाह नाबालिग हो सकते हैं।

NEET-UG जैसी राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षा में लाखों विद्यार्थी अपने भविष्य को लेकर परिणाम पर निर्भर रहते हैं। ऐसे में पेपर लीक के आरोप केवल एक परीक्षा की प्रक्रिया तक सीमित नहीं रहते, बल्कि उम्मीदवारों के बीच निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा और परीक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता पर भी असर डालते हैं। फिलहाल 13 आरोपियों के खिलाफ CBI के आरोपों पर न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ रही है और आरोपों की अंतिम पुष्टि अदालत में साक्ष्यों की जांच के बाद ही होगी।

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