मुंबई: मुंबई की विशेष MPID अदालत ने Dream Sunshine Digital Pvt Ltd से जुड़े कथित ₹61.10 करोड़ के निवेश घोटाले में आरोपी नाईम सरवर मूसा अंजुम उर्फ नयिम सरवर मूसा अंजुम की जमानत याचिका खारिज कर दी है। मामले में हजारों निवेशकों को आकर्षक रिटर्न का भरोसा देकर निवेश कराने का आरोप है। अदालत ने माना कि कथित धोखाधड़ी का पैमाना बड़ा है और आरोपी के फरार कंपनी निदेशकों से कथित संबंधों को देखते हुए जमानत देने से गवाहों को प्रभावित करने और जारी जांच में हस्तक्षेप की आशंका बनी रह सकती है।
विशेष MPID न्यायाधीश विक्रम आर. जगदाले ने अभियोजन और निवेशकों की ओर से जमानत का विरोध किए जाने के बाद यह फैसला सुनाया। आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने इस मामले में कंपनी से जुड़े आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया था। जांच एजेंसी के मुताबिक, Dream Sunshine Digital Pvt Ltd के जरिए मिनरल वॉटर, चीनी, खजूर और निर्माण कारोबार से जुड़ी योजनाओं में निवेश का प्रस्ताव दिया गया और करीब 5 फीसदी रिटर्न तथा ऊंचे मुनाफे का भरोसा दिलाकर लोगों से रकम जुटाई गई।
2,907 निवेशकों से ₹61.10 करोड़ जुटाने का आरोप
पुलिस के अनुसार, मामले में कम से कम 2,907 निवेशकों से ₹61.10 करोड़ से अधिक की रकम ठगे जाने का आरोप है। वहीं अभियोजन पक्ष ने अदालत में दावा किया कि इस नेटवर्क से प्रभावित निवेशकों की संख्या 10,000 से अधिक हो सकती है और जांच आगे बढ़ने के साथ नए पीड़ित सामने आ रहे हैं।
मामले में कंपनी से जुड़े अमानत अली अंसारी, अब्दुल रहीम अंसारी, नवाजिस अंसारी, नाईम सरवर और योगिनी शिखे समेत अन्य लोगों के खिलाफ आरोप लगाए गए हैं। पुलिस का आरोप है कि आरोपियों ने आपस में साजिश कर निवेशकों और उनके रिश्तेदारों को योजनाओं में पैसा लगाने के लिए प्रेरित किया।
आरोपी ने खुद को बताया सिर्फ एजेंट
जमानत मांगते हुए अंजुम ने अदालत में दावा किया कि वह कंपनी के रोजमर्रा के कामकाज में शामिल नहीं था। उसने खुद को केवल एजेंट और निवेशक बताया, जिसकी भूमिका संभावित निवेशकों को कंपनी के निदेशकों से मिलाने तक सीमित थी। बचाव पक्ष के अनुसार, अंजुम और उसके परिवार ने भी कंपनी में करीब ₹1.47 करोड़ का निवेश किया था।
बचाव पक्ष ने यह भी तर्क दिया कि 150 से अधिक गवाहों में से केवल 22 ने ही अंजुम के खिलाफ आरोप लगाए हैं। उसके वकीलों ने कहा कि आरोपी अपने फ्रीज बैंक खातों में मौजूद रकम के जरिए निवेशकों को पैसा लौटाने के लिए तैयार है।
सात खातों में ₹25.54 करोड़ के लेनदेन का दावा
अभियोजन पक्ष और पुलिस ने जमानत का विरोध करते हुए आरोपी की कथित वित्तीय भूमिका पर जोर दिया। जांच एजेंसी के मुताबिक, अंजुम के पास सात बैंक खाते थे और 2016 से 2026 के बीच इन खातों में करीब ₹25.54 करोड़ की रकम प्राप्त हुई। पुलिस का आरोप है कि इन पैसों को बाद में मुख्य आरोपियों और उनके रिश्तेदारों तक पहुंचाया गया।
जांच एजेंसी ने यह भी बताया कि मामले के प्रमुख आरोपी अभी फरार हैं। पुलिस के अनुसार, अंजुम ने जांच में अपेक्षित सहयोग नहीं किया है। निवेशकों की ओर से पेश वकीलों ने भी जमानत का विरोध करते हुए कहा कि मामला लगातार विस्तृत हो रहा है और कई नए निवेशकों के सामने आने की संभावना है।
गवाहों को प्रभावित करने और रिकवरी पर असर की आशंका
अदालत ने मामले की गंभीरता, कथित वित्तीय धोखाधड़ी के बड़े पैमाने और आरोपी के फरार निदेशकों से संभावित संबंधों को ध्यान में रखा। कोर्ट ने माना कि इस चरण में जमानत मिलने पर गवाहों को प्रभावित करने या जांच में हस्तक्षेप की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
अदालत ने यह भी माना कि जमानत से MPID Act के तहत चल रही रकम की रिकवरी की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। हजारों निवेशकों से जुड़ी कथित धोखाधड़ी में वित्तीय लेनदेन और धन के प्रवाह की जांच अभी जारी है।
इन परिस्थितियों को देखते हुए अदालत ने अंजुम की जमानत याचिका खारिज कर दी। मामले की जांच जारी है और फरार आरोपियों की तलाश के साथ-साथ निवेशकों से जुटाई गई रकम के प्रवाह तथा उसकी संभावित रिकवरी पर भी एजेंसियों का ध्यान है। अदालत के आदेश से फिलहाल आरोपी को राहत नहीं मिली है, जबकि जांच एजेंसियां कथित निवेश नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों और वित्तीय लेनदेन की भूमिका की पड़ताल कर रही हैं।
