रायपुर/सक्ती। छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले में स्थित वेदांता पावर प्लांट में हुए भीषण विस्फोट मामले में अब बड़ा कानूनी कदम उठाया गया है। 14 अप्रैल को हुए इस हादसे में 20 मजदूरों की मौत और कई अन्य के गंभीर रूप से झुलसने के बाद प्रबंधन पर कार्रवाई तेज हो गई है। मामले में अनिल अग्रवाल समेत कंपनी प्रबंधन के खिलाफ FIR दर्ज की गई है, जिससे औद्योगिक सुरक्षा और कॉर्पोरेट जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
इस हादसे में प्लांट मैनेजर देवेंद्र पटेल को भी आरोपी बनाया गया है। प्रारंभिक जांच में सुरक्षा मानकों में कथित लापरवाही सामने आने के बाद IPC की धारा 106(1), 289 और 3(5) के तहत मामला दर्ज किया गया है। सूत्रों के अनुसार, फॉरेंसिक और तकनीकी जांच पूरी होने के बाद धाराओं में और बढ़ोतरी की संभावना भी जताई जा रही है।
हाई-प्रेशर पाइप फटने से हुआ था धमाका
यह दर्दनाक हादसा 14 अप्रैल की दोपहर सक्ती जिले के सिंहितराई गांव स्थित वेदांता लिमिटेड के थर्मल पावर प्लांट में हुआ। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, बॉयलर से टरबाइन तक भाप ले जाने वाली हाई-प्रेशर स्टील पाइपलाइन में अचानक विस्फोट हो गया। धमाका इतना शक्तिशाली था कि मौके पर ही कई मजदूरों की मौत हो गई, जबकि अन्य गंभीर रूप से झुलस गए।
घटना के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। घायलों को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया, जहां कई की हालत अब भी नाजुक बताई जा रही है। हादसे के बाद प्लांट के भीतर सुरक्षा इंतजामों को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।
दोहरी जांच: मैजिस्ट्रियल और तकनीकी टीम सक्रिय
राज्य सरकार ने इस हादसे को गंभीरता से लेते हुए तुरंत उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए हैं। एक ओर जहां जिला प्रशासन ने मैजिस्ट्रियल जांच शुरू कर दी है, वहीं दूसरी ओर तकनीकी विशेषज्ञों की टीम भी विस्फोट के कारणों का पता लगाने में जुटी है।
जिला स्तर पर नियुक्त जांच अधिकारी को 30 दिनों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। इस रिपोर्ट में हादसे की असली वजह, जिम्मेदार लोगों की भूमिका और सुरक्षा प्रोटोकॉल की स्थिति का विश्लेषण शामिल होगा।
साथ ही, कंपनी ने भी आंतरिक जांच शुरू करने की बात कही है। हालांकि, इस आंतरिक प्रक्रिया की निष्पक्षता और प्रभावशीलता को लेकर पहले से ही सवाल उठ रहे हैं।
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मुआवजा और राहत की घोषणा
हादसे के बाद राज्य सरकार ने मृतकों के परिजनों को ₹5 लाख की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है, जबकि घायलों को ₹50,000 की मदद दी जाएगी। हालांकि, पीड़ित परिवारों का कहना है कि यह मुआवजा उनकी अपूरणीय क्षति की तुलना में बेहद कम है।
स्थानीय लोगों और श्रमिक संगठनों ने घटना के बाद विरोध प्रदर्शन भी किए और जिम्मेदार अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग उठाई। उनका कहना है कि प्लांट में लंबे समय से सुरक्षा मानकों की अनदेखी की जा रही थी।
रुका हुआ प्रोजेक्ट, फिर तेजी से शुरू हुआ संचालन
सिंहितराई में स्थित इस 1,200 मेगावाट क्षमता वाले कोयला आधारित थर्मल पावर प्रोजेक्ट की शुरुआत वर्ष 2009 में हुई थी। यह प्रोजेक्ट पहले एथेना छत्तीसगढ़ पावर लिमिटेड के पास था, लेकिन 2016 से 2022 के बीच निर्माण कार्य ठप पड़ा रहा।
वर्ष 2022 में वेदांता समूह द्वारा अधिग्रहण के बाद परियोजना को दोबारा गति मिली। कंपनी ने 600 मेगावाट की एक यूनिट को अगस्त 2025 में चालू किया, जबकि दूसरी यूनिट का निर्माण अभी जारी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय तक रुके प्रोजेक्ट्स में उपकरणों की गुणवत्ता और रखरखाव पर विशेष ध्यान देने की जरूरत होती है। ऐसे में यदि नियमित निरीक्षण और सुरक्षा ऑडिट में कोई चूक हुई हो, तो वह बड़े हादसे का कारण बन सकती है।
कॉर्पोरेट जवाबदेही पर उठे सवाल
इस हादसे ने एक बार फिर देश में औद्योगिक सुरक्षा मानकों और कॉर्पोरेट जवाबदेही पर बहस छेड़ दी है। बड़े औद्योगिक प्रोजेक्ट्स में सुरक्षा को लेकर किए जाने वाले दावों और जमीनी हकीकत के बीच अंतर उजागर हुआ है।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यदि जांच में लापरवाही साबित होती है, तो यह मामला केवल आपराधिक जिम्मेदारी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि कंपनी के संचालन और नियामकीय अनुपालन पर भी दूरगामी प्रभाव डाल सकता है।
फिलहाल, सभी की नजर जांच रिपोर्ट पर टिकी है, जो यह तय करेगी कि इस भीषण हादसे के पीछे केवल तकनीकी खामी थी या फिर सिस्टमेटिक लापरवाही का मामला।
