पुणे के कोंढवा इलाके में एक फ्लैट सौदे को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है, जिसमें एक बिल्डर ने दो लोगों पर ₹70 लाख की संपत्ति में धोखाधड़ी और अवैध कब्जे का आरोप लगाया है। शिकायत के आधार पर पुलिस ने संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। यह मामला अब यवलेवाड़ी पुलिस स्टेशन को आगे की जांच के लिए सौंपा गया है।
शिकायतकर्ता प्रकाश रामचंद्र जैन (52), निवासी बिबवेवाड़ी, ने आरोप लगाया है कि उन्होंने “मंडोत टावर्स” नामक रेजिडेंशियल बिल्डिंग में एक फ्लैट बेचा था, लेकिन खरीदारों ने तय रकम पूरी नहीं चुकाई और बाद में संपत्ति पर जबरन कब्जा कर लिया। पुलिस ने इस मामले में प्रविण मंचंदलाल ओसवाल और भारती प्रविण ओसवाल के खिलाफ संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है।
जानकारी के अनुसार, यह विवाद अप्रैल 2021 में शुरू हुआ था, जब ओसवाल परिवार ने फ्लैट नंबर 1003 (10वीं मंजिल) को ₹70 लाख में खरीदने पर सहमति जताई थी। सौदे के समय ₹20.10 लाख का भुगतान किया गया था, जबकि शेष ₹49.90 लाख सात महीने के भीतर देने की शर्त रखी गई थी। लेकिन तय समय सीमा बीतने के बाद भी बाकी भुगतान नहीं किया गया।
शिकायत में यह भी कहा गया है कि अगस्त 2025 में आरोपियों ने कुछ साथियों के साथ बिल्डर के कार्यालय पहुंचकर दबाव बनाया और फ्लैट का कब्जा देने के साथ अतिरिक्त रकम की मांग की। इसके बाद बिल्डर ने 30 अगस्त 2025 को कानूनी नोटिस जारी कर समझौता रद्द कर दिया और पहले से प्राप्त राशि चेक के माध्यम से वापस करने की कोशिश की, लेकिन आरोपियों ने राशि लेने से इनकार कर दिया और बिक्री पत्र (सेल डीड) की मांग पर अड़े रहे।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, विवादित फ्लैट पर पुणे महानगरपालिका (PMC) द्वारा संपत्ति कर बकाया होने के कारण सील लगा दी गई थी। इसके बावजूद नवंबर 2025 में आरोप है कि आरोपियों ने बिना अनुमति के सील और ताला तोड़कर फ्लैट पर कब्जा कर लिया। इसके बाद उन्होंने बिजली कनेक्शन भी अपने नाम पर ट्रांसफर करवा लिया।
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इस घटना के बाद बिल्डर ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर मामला दर्ज किया गया। पुलिस ने बताया कि प्राथमिक जांच में संपत्ति विवाद और अनुबंध उल्लंघन के साथ-साथ अवैध कब्जे के पहलुओं की भी जांच की जा रही है।
यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब पुणे और आसपास के क्षेत्रों में रियल एस्टेट लेनदेन से जुड़े विवादों में बढ़ोतरी देखी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि बिना पूरी भुगतान प्रक्रिया और कानूनी दस्तावेजों की स्पष्टता के संपत्ति सौदे आगे चलकर गंभीर विवादों का कारण बन सकते हैं।
कानूनी जानकारों के अनुसार, इस तरह के मामलों में सेल एग्रीमेंट और कब्जे की प्रक्रिया के बीच स्पष्ट अंतर को समझना बेहद जरूरी है। यदि भुगतान शर्तों का पालन नहीं होता, तो समझौता रद्द करने का अधिकार विक्रेता के पास होता है, लेकिन संपत्ति पर जबरन कब्जा करना कानूनन अपराध की श्रेणी में आता है।
फिलहाल पुलिस ने दोनों पक्षों के बयान दर्ज करना शुरू कर दिया है और संबंधित दस्तावेजों की जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच के निष्कर्ष के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
इस घटना ने एक बार फिर रियल एस्टेट सेक्टर में पारदर्शिता और कानूनी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय स्तर पर यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है और आगे की जांच पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
