लखनऊ। राजधानी के प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थान King George’s Medical University (केजीएमयू) से जुड़ा एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने सुरक्षा व्यवस्था और संस्थागत निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। खुद को डॉक्टर बताकर घूम रहे 26 वर्षीय युवक Hassam Ahmed को गिरफ्तार किया गया है। उस पर आरोप है कि उसने फर्जी पहचान, नकली दस्तावेज और मनगढ़ंत योजनाओं के जरिए छात्राओं को अपने जाल में फंसाया, उनसे नजदीकियां बढ़ाईं और कथित रूप से धर्म परिवर्तन के लिए दबाव बनाया।
जांच में सामने आया है कि आरोपी असल में केवल 12वीं पास है और उसने अपनी पढ़ाई लखनऊ के एक इंटर कॉलेज से पूरी की थी। इसके बावजूद वह लंबे समय से डॉक्टर की वेशभूषा में मेडिकल विश्वविद्यालय के भीतर सक्रिय था। उसने “कार्डियो सेवा संस्थान” नाम से एक कथित सामाजिक संस्था भी बना रखी थी, जिसके जरिए चिकित्सा शिविर आयोजित कर लोगों से पैसे वसूले जाते थे।
फर्जी सम्मेलन और नोटिस के जरिए रचा जाल
मामले की सबसे चौंकाने वाली कड़ी यह है कि आरोपी ने विश्वविद्यालय के भीतर विश्वास पैदा करने के लिए फर्जी नोटिस और दस्तावेज तैयार किए। आरोप है कि उसने एक वरिष्ठ प्रोफेसर के हस्ताक्षर की नकल कर छात्रों के नाम नोटिस जारी किए, जिसमें दिल्ली के एक बड़े चिकित्सा संस्थान में आयोजित सम्मेलन में भाग लेने का निमंत्रण दिया गया था।
इन नोटिसों में यह भी दावा किया गया कि छात्रों को अंतरराष्ट्रीय स्तर के डॉक्टरों से मिलने का अवसर मिलेगा। इसी बहाने आरोपी छात्राओं को लखनऊ से बाहर ले जाता था। जांच में यह भी सामने आया कि वह चिकित्सा शिविर के नाम पर शहर के अलग-अलग इलाकों में कार्यक्रम आयोजित करता था, जहां उसकी गतिविधियां संदिग्ध थीं।
डॉक्टर बनकर पहुंच बनाना, फिर निजी संबंधों का जाल
आरोपी खुद को अस्पताल के विभिन्न विभागों से जुड़ा बताता था और डॉक्टरों जैसी वेशभूषा में घूमता था। इसी पहचान के दम पर उसने कई छात्राओं से संपर्क स्थापित किया। आरोप है कि वह पहले भरोसा जीतता, फिर निजी संबंध बनाने की कोशिश करता और बाद में दबाव बनाता था।
कुछ पीड़ित छात्राओं ने यह भी आरोप लगाया है कि आरोपी ने उन्हें भावनात्मक रूप से प्रभावित कर अपने साथ जोड़ने की कोशिश की और बाद में धर्म परिवर्तन के लिए मजबूर किया। मामले में यह भी संकेत मिले हैं कि आरोपी अकेला नहीं था, बल्कि उसे कुछ सहयोगियों का भी समर्थन मिल रहा था, जो छात्रों को डराने-धमकाने में मदद करते थे।
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पहले भी सामने आ चुका है ऐसा मामला
यह घटना कोई पहली नहीं है। इससे पहले भी इसी संस्थान से जुड़े एक अन्य व्यक्ति पर इसी तरह के आरोप लगे थे, जिसमें छात्राओं के शोषण और ब्लैकमेलिंग की बात सामने आई थी। ऐसे मामलों की पुनरावृत्ति ने यह संकेत दिया है कि संस्थान के भीतर निगरानी और सत्यापन प्रणाली को और सख्त बनाने की जरूरत है।
सुरक्षा और सत्यापन पर उठे सवाल
इतने बड़े और प्रतिष्ठित संस्थान में एक 12वीं पास युवक का लंबे समय तक डॉक्टर बनकर सक्रिय रहना कई गंभीर सवाल खड़े करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि पहचान सत्यापन, पहचान पत्र प्रणाली और आंतरिक निगरानी में खामियों का फायदा उठाकर आरोपी ने यह जाल बुना।
जांच जारी, और खुलासों की संभावना
फिलहाल मामले की जांच जारी है और आरोपी से पूछताछ के आधार पर कई और चौंकाने वाले खुलासे होने की आशंका है। अधिकारियों का मानना है कि इस नेटवर्क में अन्य लोग भी शामिल हो सकते हैं, जिनकी भूमिका की जांच की जा रही है।
यह मामला न केवल एक आपराधिक साजिश को उजागर करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि किस तरह फर्जी पहचान और मनोवैज्ञानिक तरीकों का इस्तेमाल कर युवाओं को निशाना बनाया जा सकता है। ऐसे में संस्थानों के साथ-साथ छात्रों को भी सतर्क रहने की जरूरत है।
