म्यूल अकाउंट निगरानी और KYC खामियों पर पांच बैंक जिम्मेदार, सुप्रीम कोर्ट में बैंकिंग जवाबदेही पर व्यापक बहस जारी

₹23 करोड़ डिजिटल अरेस्ट स्कैम में बड़ा फैसला: RBI ने बैंकों को ₹1.31 करोड़ मुआवजा देने का आदेश दिया

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By Roopa
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रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने देश में सामने आए एक बड़े डिजिटल अरेस्ट फ्रॉड मामले में महत्वपूर्ण आदेश जारी करते हुए पांच बैंकों को पीड़ित को संयुक्त रूप से ₹1.31 करोड़ का मुआवजा देने का निर्देश दिया है। यह मामला करीब ₹23 करोड़ की ठगी से जुड़ा है, जिसे एक सुनियोजित साइबर अपराधी नेटवर्क ने अंजाम दिया था। मामला अब सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में बैंकिंग सिस्टम की जवाबदेही और खामियों की व्यापक जांच तक पहुंच चुका है।

RBI के लोकपाल (Ombudsman) द्वारा नई दिल्ली में जारी आदेश के अनुसार Axis Bank, City Union Bank, ICICI Bank, IndusInd Bank और Yes Bank को इस मामले में आंशिक रूप से जिम्मेदार माना गया है। जांच में सामने आया कि इन बैंकों में म्यूल अकाउंट्स की निगरानी और KYC नियमों के पालन में गंभीर लापरवाही हुई, जिसके चलते साइबर अपराधियों को फंड ट्रांसफर करने में आसानी मिली।

यह मामला 78 वर्षीय सेवानिवृत्त बैंक अधिकारी नरेश मल्होत्रा से जुड़ा है, जिनसे कथित रूप से ₹22.92 करोड़ (लगभग ₹23 करोड़) की ठगी की गई। अपराधियों ने “डिजिटल अरेस्ट” नाम की नई साइबर ठगी तकनीक का इस्तेमाल किया, जिसमें खुद को पुलिस और जांच एजेंसियों का अधिकारी बताकर पीड़ित को मानसिक दबाव में लिया गया और उसे लगातार डराकर पैसे ट्रांसफर करवाए गए।

जांच रिपोर्ट के अनुसार 4 अगस्त 2025 को पीड़ित को एक कॉल आया, जिसमें उसे मुंबई पुलिस अधिकारी बताकर नार्कोटिक्स मामले में संलिप्त होने का झूठा आरोप लगाया गया। इसके बाद कई फर्जी कॉल्स और वीडियो कॉल्स के जरिए उसे लगातार डराया गया और उसे बाहरी संपर्क से अलग कर दिया गया। इस मानसिक दबाव की वजह से वह कई हफ्तों तक लगातार पैसे ट्रांसफर करता रहा।

पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि यह पूरी रकम कई बैंक खातों के नेटवर्क से होकर गुजरी, जिन्हें म्यूल अकाउंट्स के रूप में इस्तेमाल किया गया था। अपराधियों ने रकम को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर अलग-अलग खातों में ट्रांसफर किया ताकि ट्रैकिंग मुश्किल हो सके।

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RBI ने स्पष्ट किया कि जिन बैंकों से पैसा निकला (remitter banks), उन पर कोई सीधी गलती नहीं पाई गई क्योंकि ट्रांजैक्शन पीड़ित की सहमति से हुए थे। लेकिन जिन बैंकों में पैसा गया (beneficiary banks), वहां KYC और ट्रांजैक्शन मॉनिटरिंग सिस्टम में गंभीर खामियां पाई गईं।

इसी आधार पर Axis Bank, City Union Bank, ICICI Bank और IndusInd Bank को 5% जबकि Yes Bank को 7.5% मुआवजा देने का आदेश दिया गया है, क्योंकि उस पर अतिरिक्त लापरवाही के आरोप पाए गए।

हालांकि पीड़ित को अब तक RBI आदेश के तहत ₹1.31 करोड़ और पहले से रिकवर हुए ₹60 लाख मिल चुके हैं, फिर भी उन्होंने पूरे ₹23 करोड़ की वापसी की मांग को लेकर इस आदेश को चुनौती दी है।

इस मामले ने सुप्रीम कोर्ट का भी ध्यान आकर्षित किया है, जहां बैंकिंग सिस्टम की जवाबदेही, साइबर सुरक्षा खामियों और बढ़ते डिजिटल फ्रॉड मामलों पर व्यापक सुनवाई चल रही है। माना जा रहा है कि यह मामला भविष्य में बैंकिंग नियमों और डिजिटल ट्रांजैक्शन सुरक्षा को लेकर बड़े सुधारों का आधार बन सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल अरेस्ट जैसे स्कैम तेजी से बढ़ रहे हैं, जहां अपराधी खुद को कानून प्रवर्तन एजेंसियों का अधिकारी बताकर लोगों को मानसिक रूप से फंसाते हैं। इसी वजह से म्यूल अकाउंट ऑपरेटर्स पर सख्त कार्रवाई और KYC सिस्टम को और मजबूत करने की मांग तेज हो गई है।

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