तिरुवनंतपुरम। केरल पुलिस ने Vivo और iQOO स्मार्टफोन यूजर्स को एक नए और बेहद खतरनाक साइबर फ्रॉड को लेकर हाई-अलर्ट जारी किया है। इस स्कैम में “OriginOS Update” के नाम पर फर्जी पॉप-अप अलर्ट भेजे जा रहे हैं, जिनमें यूजर्स को तुरंत सिस्टम अपडेट इंस्टॉल करने के लिए कहा जाता है। पुलिस के अनुसार, यह लिंक असल में मालवेयर इंस्टॉल कर मोबाइल का पूरा कंट्रोल साइबर अपराधियों को सौंप देता है और सीधे बैंकिंग डेटा को निशाना बनाता है।
जांच में सामने आया है कि यह पूरा फ्रॉड बेहद सुनियोजित तरीके से चलाया जा रहा है। यूजर को ऐसा दिखाया जाता है जैसे उसका फोन तुरंत अपडेट न करने पर ब्लॉक हो जाएगा या सिस्टम फेल हो जाएगा। इसी डर और जल्दबाजी का फायदा उठाकर लोग बिना जांच किए लिंक पर क्लिक कर देते हैं, जिसके बाद उनके डिवाइस में खतरनाक सॉफ्टवेयर डाउनलोड हो जाता है।
एक क्लिक में पूरा मोबाइल नियंत्रण में
साइबर विशेषज्ञों के अनुसार, एक बार मालवेयर इंस्टॉल हो जाने के बाद हैकर्स को फोन पर लगभग पूरा नियंत्रण मिल जाता है। इसमें कैमरा, माइक्रोफोन, एसएमएस, कॉन्टैक्ट्स और स्टोरेज तक पहुंच शामिल होती है। सबसे गंभीर बात यह है कि यह मालवेयर बैंकिंग ऐप्स और वित्तीय जानकारी को भी ट्रैक कर सकता है।
यह वायरस OTP, पासवर्ड और बैंक अकाउंट से जुड़ी जानकारी चुपचाप चुराकर दूर बैठे सर्वर पर भेज देता है, जिससे अपराधी सीधे खाते से पैसे निकालने में सक्षम हो जाते हैं।
डर और फर्जी अलर्ट से बनाया जा रहा जाल
पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि इस स्कैम की सबसे बड़ी ताकत डर और भ्रम है। यूजर्स को लगातार ऐसे मैसेज दिखाए जाते हैं जैसे “तुरंत अपडेट करें वरना फोन बंद हो जाएगा” या “सिस्टम खतरे में है”। यह मानसिक दबाव लोगों को सोचने का मौका नहीं देता।
अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि किसी भी मोबाइल कंपनी का असली सिस्टम अपडेट कभी भी थर्ड-पार्टी लिंक, मैसेज या पॉप-अप के जरिए नहीं आता। सभी अपडेट केवल फोन की सेटिंग्स के अंदर मौजूद आधिकारिक सिस्टम अपडेट सेक्शन से ही किए जाते हैं।
कैसे काम करता है पूरा साइबर नेटवर्क
साइबर अपराधी पहले फर्जी अपडेट नोटिफिकेशन तैयार करते हैं, जो बिल्कुल असली सिस्टम अलर्ट जैसा दिखता है। जैसे ही यूजर इस पर क्लिक करता है, बैकग्राउंड में एक स्क्रिप्ट या ऐप डाउनलोड हो जाता है।
इसके बाद यह मालवेयर बिना यूजर को पता चले सक्रिय हो जाता है और लगातार डेटा चोरी करता रहता है। कई मामलों में यह रियल-टाइम निगरानी भी करता है, जिससे यूजर की हर गतिविधि ट्रैक की जा सकती है।
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पुलिस की सुरक्षा सलाह
केरल पुलिस ने लोगों को कुछ जरूरी सावधानियां अपनाने की सलाह दी है। इनमें “Install from Unknown Sources” ऑप्शन को बंद रखना, अनजान लिंक पर क्लिक न करना और केवल आधिकारिक सेटिंग्स से ही अपडेट इंस्टॉल करना शामिल है।
इसके अलावा, किसी भी संदिग्ध पॉप-अप या नोटिफिकेशन को नजरअंदाज करने और भरोसेमंद सुरक्षा सॉफ्टवेयर का उपयोग करने की सलाह दी गई है।
अगर गलती से क्लिक हो जाए तो क्या करें
पुलिस ने चेतावनी दी है कि अगर कोई यूजर गलती से ऐसे लिंक पर क्लिक कर दे, तो तुरंत इंटरनेट बंद कर देना चाहिए ताकि डेटा ट्रांसफर रोका जा सके। इसके बाद फोन को स्कैन कर सभी संदिग्ध ऐप्स हटाने चाहिए।
साथ ही, बैंकिंग और सोशल मीडिया के पासवर्ड तुरंत किसी सुरक्षित डिवाइस से बदलने की सलाह दी गई है। किसी भी वित्तीय नुकसान की स्थिति में हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क करने या राष्ट्रीय साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराने को कहा गया है।
बढ़ता मोबाइल साइबर खतरा
साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि अब अपराधी कंप्यूटर की तुलना में स्मार्टफोन को ज्यादा निशाना बना रहे हैं, क्योंकि इनमें निजी और वित्तीय डेटा अधिक होता है। फर्जी अपडेट, फिशिंग लिंक और मालवेयर ऐप्स अब सबसे आम साइबर हमले बन चुके हैं।
विशेषज्ञों की राय
साइबर सुरक्षा क्षेत्र में काम कर रहे Future Crime Research Foundation के विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे हमले तेजी से अधिक संगठित और तकनीकी रूप से उन्नत होते जा रहे हैं। उनके अनुसार, अपराधी अब “डिजिटल ट्रस्ट” यानी उपयोगकर्ता के भरोसे को ही सबसे बड़ा हथियार बना रहे हैं।
इसी संदर्भ में प्रसिद्ध साइबर क्राइम विशेषज्ञ और पूर्व IPS अधिकारी प्रोफेसर Triveni Singh ने चेतावनी दी है कि साइबर अपराधी बेहद उन्नत सोशल इंजीनियरिंग तकनीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं। उनके अनुसार, “फर्जी अपडेट जैसे हमले इसलिए सफल होते हैं क्योंकि आम यूजर असली और नकली सिस्टम अलर्ट में फर्क नहीं कर पाता। एक बार फोन का एक्सेस मिलते ही पूरा डिजिटल जीवन खतरे में आ जाता है।”
उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में जागरूकता और सतर्कता ही सबसे बड़ी सुरक्षा है।
निष्कर्ष
फर्जी OriginOS अपडेट स्कैम यह दिखाता है कि साइबर अपराधी किस तरह नई तकनीक का इस्तेमाल कर लोगों को निशाना बना रहे हैं। भरोसेमंद सिस्टम अलर्ट की नकल कर वे आसानी से यूजर्स को फंसा रहे हैं और भारी आर्थिक नुकसान पहुंचा रहे हैं।
अधिकारियों और विशेषज्ञों ने साफ कहा है कि सतर्क रहना ही सबसे मजबूत सुरक्षा है। किसी भी अनजान अपडेट लिंक पर क्लिक करने से पहले उसकी पुष्टि करना और संदिग्ध गतिविधि की तुरंत रिपोर्ट करना ही इस बढ़ते डिजिटल खतरे से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है।
