हैदराबाद में भरोसे और भावनाओं का दुरुपयोग कर रची गई एक ऐसी साजिश सामने आई है, जिसने हर किसी को हैरान कर दिया है। चैतन्यपुरी इलाके में एक स्टोर मैनेजर ने अपने ही मालिक के घर से करीब 100 तोला सोने के गहने चोरी करवाने की साजिश रच डाली। इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि आरोपी ने बीमारी का झूठा नाटक कर परिवार की बेटी को अपने जाल में फंसा लिया।
यह मामला 17 अप्रैल को सामने आया, जब कोठापेट निवासी 48 वर्षीय व्यवसायी ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई कि उनके घर से भारी मात्रा में सोने के गहने गायब हैं। शिकायत के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की।
शुरुआती जांच में मिला बड़ा सुराग
पुलिस ने जांच के दौरान घर और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। साथ ही घर में आने-जाने वाले सभी लोगों की सूची तैयार की गई। इसी जांच में शक की सुई उस स्टोर मैनेजर सागर (34) पर जाकर टिक गई, जो व्यवसायी के टाइल्स बिजनेस में काम करता था।
जांच में सामने आया कि सागर लगातार व्यवसायी की 20 वर्षीय बेटी के संपर्क में था, जो एमबीए की पढ़ाई कर रही है। बातचीत और भरोसे का इस्तेमाल कर उसने धीरे-धीरे युवती को मानसिक रूप से प्रभावित किया।
‘ब्रेन ट्यूमर’ का झूठा खेल
पुलिस पूछताछ में सामने आया कि आरोपी ने युवती को यह विश्वास दिलाया कि वह गंभीर बीमारी ‘ब्रेन ट्यूमर’ से पीड़ित है और उसे इलाज के लिए पैसों की सख्त जरूरत है। इसी भावनात्मक कहानी के आधार पर उसने युवती का भरोसा जीत लिया।
युवती ने पुलिस को बताया कि उसे पूरा यकीन था कि सागर गंभीर रूप से बीमार है और वह उसकी मदद करना चाहती थी। इसी विश्वास में उसने अपने घर से सोने के गहने निकालकर उसे दे दिए, बिना अपने परिवार को इसकी जानकारी दिए।
सोने की बिक्री और पुलिस की कार्रवाई
जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी सागर, जो शादीशुदा है और एक बच्चे का पिता भी है, उसने चोरी किए गए गहनों का एक बड़ा हिस्सा बेच दिया। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए कुछ सोना और नकदी बरामद कर ली है, जबकि बाकी संपत्ति की तलाश जारी है।
आरोपी को आगे की पूछताछ के लिए नोटिस जारी किया गया है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि उसने बीमारी का झूठा दावा किस तरह तैयार किया और क्या इसमें कोई और व्यक्ति शामिल था।
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पूरी साजिश की परतें खुल रही हैं
पुलिस अधिकारियों के अनुसार यह मामला सिर्फ चोरी का नहीं बल्कि एक सुनियोजित भावनात्मक धोखे का उदाहरण है। आरोपी ने धीरे-धीरे विश्वास जीतकर पूरी योजना को अंजाम दिया।
जांच एजेंसियां अब यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि क्या यह योजना पहले से तैयार की गई थी या हालात के अनुसार इसे धीरे-धीरे विकसित किया गया।
विशेषज्ञों की नजर में मामला
साइबर और अपराध विशेषज्ञों का कहना है कि आज के समय में अपराध केवल तकनीकी नहीं रह गए हैं, बल्कि भावनात्मक और मनोवैज्ञानिक स्तर पर भी किए जा रहे हैं। सोशल इंजीनियरिंग जैसी रणनीतियां अब ऑफलाइन अपराधों में भी तेजी से इस्तेमाल हो रही हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, सबसे बड़ा खतरा भरोसे का गलत इस्तेमाल है, जहां पीड़ित को यह एहसास ही नहीं होता कि वह किसी अपराध का हिस्सा बन रहा है।
जांच जारी, कई सवाल अभी बाकी
फिलहाल पुलिस पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही है और गायब गहनों की पूरी बरामदगी के प्रयास जारी हैं। साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि इस साजिश में कोई अन्य व्यक्ति शामिल था या नहीं।
यह घटना एक बार फिर यह साबित करती है कि अपराध का तरीका चाहे बदल जाए, लेकिन उसका आधार हमेशा धोखा और विश्वास का दुरुपयोग ही रहता है।
