वाराणसी के शिवपुर क्षेत्र में साइबर ठगी का एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां साइबर अपराधियों ने कथित तौर पर बैंक प्रतिनिधि बनकर एक व्यक्ति को फर्जी APK फाइल इंस्टॉल करने के लिए झांसे में लिया और उसके मोबाइल फोन का अनधिकृत नियंत्रण हासिल कर क्रेडिट कार्ड के माध्यम से ₹6.31 लाख की ठगी कर ली। पीड़ित की शिकायत राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर दर्ज कर ली गई है और पुलिस मामले की जांच कर रही है।
शिकायत के अनुसार, शिवपुर के भवानीपुर निवासी विनय कुमार झा को 24 जून को एक अज्ञात नंबर से व्हाट्सएप संदेश प्राप्त हुआ। आरोप है कि संदेश भेजने वाले ने अपने व्हाट्सएप प्रोफाइल पर बैंक का फर्जी लोगो लगाया हुआ था, जिससे पीड़ित को विश्वास हो गया कि वह किसी अधिकृत बैंक प्रतिनिधि से बातचीत कर रहा है।
पुलिस के अनुसार, आरोपी ने आरबीएल (RBL) बैंक और आईडीएफसी (IDFC) बैंक के क्रेडिट कार्ड से संबंधित प्रक्रिया का बहाना बनाकर पीड़ित को कुछ APK फाइलें अपने एंड्रॉयड मोबाइल फोन में इंस्टॉल करने के लिए कहा। कथित तौर पर बैंक की आधिकारिक प्रक्रिया समझकर पीड़ित ने उन फाइलों को इंस्टॉल कर लिया।
प्रारंभिक जांच के अनुसार, इंस्टॉल की गई APK फाइलों में दुर्भावनापूर्ण सॉफ्टवेयर (मैलवेयर) मौजूद था, जिसने साइबर अपराधियों को पीड़ित के मोबाइल फोन तक अनधिकृत पहुंच प्रदान कर दी। इसके बाद आरोपियों ने कथित तौर पर क्रेडिट कार्ड की जानकारी का दुरुपयोग करते हुए चार अलग-अलग अनधिकृत ट्रांजैक्शन किए।
शिकायत के अनुसार, इन चार ट्रांजैक्शन के माध्यम से कुल ₹6.31 लाख की राशि निकाल ली गई। घटना का पता चलने के बाद पीड़ित ने संबंधित अधिकारियों से शिकायत की, जिसके बाद मामला राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर दर्ज किया गया और जांच शुरू की गई।
पुलिस अब डिजिटल साक्ष्यों, बैंकिंग लेनदेन, मोबाइल डेटा और अन्य इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड की जांच कर आरोपियों की पहचान करने का प्रयास कर रही है। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि कहीं यह वारदात एंड्रॉयड मोबाइल फोन को फर्जी APK फाइलों के जरिए हैक करने वाले किसी बड़े साइबर गिरोह से तो जुड़ी नहीं है।
इस मामले पर प्रख्यात साइबर अपराध विशेषज्ञ एवं पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह ने कहा कि साइबर अपराधी अब व्हाट्सएप, एसएमएस और अन्य मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के माध्यम से बैंक अधिकारी बनकर लोगों को फर्जी APK फाइलें इंस्टॉल कराने के लिए झांसा दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसी फाइलों में मौजूद मैलवेयर बैंकिंग क्रेडेंशियल, वन-टाइम पासवर्ड (OTP), की-स्ट्रोक और अन्य संवेदनशील जानकारी चुराने के साथ-साथ मोबाइल का रिमोट एक्सेस भी हासिल कर सकता है। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि किसी भी अनजान स्रोत से प्राप्त APK फाइल कभी इंस्टॉल न करें, बैंकिंग ऐप केवल आधिकारिक ऐप स्टोर से ही डाउनलोड करें और किसी भी संदिग्ध साइबर गतिविधि की स्थिति में तुरंत संबंधित बैंक तथा राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं।
