अमेरिका के श्रम विभाग (US Department of Labor) ने H-1B और PERM रोजगार वीज़ा कार्यक्रमों में कथित धोखाधड़ी और दुरुपयोग की जांच शुरू कर दी है। इस जांच के दौरान आई व्हिसलब्लोअर शिकायतों में आईटी सेवा कंपनी Cognizant का भी उल्लेख किया गया है। हालांकि फिलहाल कंपनी के खिलाफ किसी तरह के औपचारिक आरोप या कार्रवाई की घोषणा नहीं की गई है।
अमेरिकी श्रम विभाग के इंस्पेक्टर जनरल एंथनी डी’एस्पोसिटो ने एक साक्षात्कार में बताया कि उनके कार्यालय को मिली शिकायतों में Cognizant जैसी कंपनियों का उल्लेख किया गया है। उन्होंने कहा कि इंस्पेक्टर जनरल कार्यालय (OIG) ने अब तक दर्जनों समन (Subpoenas) जारी किए हैं और रोजगार आधारित वीज़ा प्रणाली के कथित दुरुपयोग से जुड़े विभिन्न मामलों की जांच की जा रही है।
यह जांच ऐसे समय शुरू हुई है जब Cognizant द्वारा H-1B कार्यक्रम के उपयोग में पिछले कुछ वर्षों के दौरान उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। अमेरिकी श्रम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, कंपनी ने वर्ष 2018 में 10,189 लेबर कंडीशन एप्लिकेशन (LCA) दाखिल किए थे, जबकि 2025 में यह संख्या घटकर 3,436 रह गई। LCA वह अनिवार्य आवेदन है जिसे किसी विदेशी पेशेवर को H-1B वीज़ा पर नियुक्त करने से पहले नियोक्ता को श्रम विभाग के समक्ष दाखिल करना होता है, जिसमें वेतन और श्रम कानूनों के पालन का प्रमाण देना होता है।
रिपोर्ट के अनुसार, इस मामले पर प्रतिक्रिया के लिए Cognizant से संपर्क किया गया था, लेकिन समाचार प्रकाशित होने तक कंपनी की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया।
यह जांच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन द्वारा रोजगार आधारित वीज़ा धोखाधड़ी के खिलाफ चलाए जा रहे व्यापक अभियान का हिस्सा है। जांच अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की अगुवाई वाले उस टास्क फोर्स के तहत की जा रही है, जिसका उद्देश्य रोजगार वीज़ा प्रणाली में कथित धोखाधड़ी और दुरुपयोग को समाप्त करना है।
इंस्पेक्टर जनरल कार्यालय के अनुसार, प्रारंभिक जांच में ऐसे कथित मामलों के संकेत मिले हैं जिनमें कुछ नियोक्ताओं और श्रम बिचौलियों ने फर्जी वीज़ा आवेदन दाखिल किए, विदेशी कर्मचारियों से वेतन वापस लेने (वेज किकबैक) जैसी व्यवस्थाएं लागू कीं और अमेरिकी कर्मचारियों की तुलना में कम वेतन पर विदेशी श्रमिकों को नियुक्त कर श्रम बाजार को प्रभावित किया।
एजेंसी का कहना है कि कथित अनियमितताएं केवल दस्तावेजी गड़बड़ियों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इनमें श्रम तस्करी, जबरन श्रम और विदेशी कर्मचारियों के शोषण जैसे गंभीर आरोप भी शामिल हैं। विभाग ने स्पष्ट किया कि H-1B और PERM कार्यक्रमों का उद्देश्य वास्तविक कौशल की कमी को पूरा करना है, न कि धोखाधड़ीपूर्ण भर्ती या श्रमिकों के शोषण को बढ़ावा देना।
फिलहाल जांच जारी है और अमेरिकी संघीय एजेंसियां दस्तावेजों, वित्तीय रिकॉर्ड तथा व्हिसलब्लोअर शिकायतों के आधार पर मामले के विभिन्न पहलुओं की जांच कर रही हैं। अधिकारियों ने अभी तक किसी कंपनी या व्यक्ति के खिलाफ अंतिम निष्कर्ष या अभियोजन की घोषणा नहीं की है।
