वडोदरा में UK वर्क परमिट के नाम पर ₹10.65 लाख की ठगी के मामले में पुलिस डिजिटल लेनदेन और फर्जी दस्तावेजों की जांच करती हुई।

एजेंट के जाल में फंसा युवक: UK वर्क परमिट के नाम पर ₹10.65 लाख की ठगी, पुलिस जांच में जुटी

Team The420
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वडोदरा: विदेश में नौकरी दिलाने और UK वर्क परमिट उपलब्ध कराने के नाम पर एक युवक से ₹10.65 लाख की ठगी का मामला सामने आया है। इस मामले में एक वीजा एजेंट के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज की गई है, जिसके बाद जांच तेज कर दी गई है। आरोप है कि एजेंट ने फर्जी दस्तावेज और झूठे आश्वासनों के आधार पर पीड़ित से बड़ी रकम वसूली और बाद में वीजा प्रक्रिया पूरी नहीं की।

जानकारी के अनुसार, यह मामला पालेज क्षेत्र के सिमलीया रोड स्थित आनसाब पार्क में रहने वाले एक परिवार से जुड़ा है। शिकायतकर्ता ज़ाकीरभाई अफीणवाला ने पुलिस को बताया कि उनके पुत्र को UK में नौकरी के लिए वर्क परमिट की आवश्यकता थी। इसी दौरान उनकी मुलाकात एजेंट अमृत मणिभाई पटेल से हुई, जो खुद को वीजा कंसल्टेंसी विशेषज्ञ बताता था और विदेश में नौकरी दिलाने का भरोसा देता था।

पीड़ित परिवार के अनुसार, एजेंट ने उन्हें आश्वस्त किया कि वह UK में वर्क परमिट और नौकरी दोनों की व्यवस्था कर सकता है। इसके बाद वडोदरा के मुजमहूडा क्षेत्र में स्थित एक कंसल्टेंसी ऑफिस में बातचीत हुई, जहां पूरी प्रक्रिया को “कानूनी और सुरक्षित” बताया गया। एजेंट ने कहा कि सभी दस्तावेज तैयार हैं और प्रक्रिया जल्द पूरी हो जाएगी, लेकिन इसके लिए अलग-अलग चरणों में भुगतान करना होगा।

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इसके बाद पीड़ित परिवार से अलग-अलग किश्तों में कुल ₹10.65 लाख वसूले गए। आरोप है कि एजेंट ने उन्हें ऑफर लेटर, इमिग्रेशन एप्लिकेशन और हेल्थ इंश्योरेंस से जुड़े दस्तावेज भी भेजे, जिससे शुरुआत में मामला पूरी तरह वास्तविक प्रतीत हुआ। हालांकि बाद में न तो कोई अंतिम वीजा प्रक्रिया पूरी हुई और न ही कोई स्पष्ट चेकलिस्ट या आधिकारिक अपडेट दिया गया।

जब पीड़ित परिवार ने लगातार संपर्क करने की कोशिश की, तो एजेंट की ओर से टालमटोल शुरू हो गई। कई बार फोन और संदेशों का जवाब नहीं मिला। धीरे-धीरे उन्हें शक हुआ कि उनके साथ धोखाधड़ी की गई है, जिसके बाद उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि प्रारंभिक जांच में कई दस्तावेज संदिग्ध पाए गए हैं और उनकी सत्यता की जांच की जा रही है। कंसल्टेंसी ऑफिस, बैंक रिकॉर्ड और संबंधित डिजिटल लेनदेन की भी जांच शुरू कर दी गई है। पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि क्या यह मामला किसी संगठित गिरोह का हिस्सा है या केवल एक एजेंट तक सीमित है।

सूत्रों के अनुसार, पुलिस अब बैंक ट्रांजेक्शन, मोबाइल कॉल डिटेल्स और डिजिटल पेमेंट फ्लो की गहन जांच कर रही है, ताकि यह स्पष्ट किया जा सके कि रकम किन खातों में गई और उसका उपयोग कैसे किया गया। साथ ही यह भी जांच जारी है कि क्या अन्य लोगों को भी इसी तरह वीजा दिलाने के नाम पर ठगा गया है।

इस बीच, प्रख्यात साइबर क्राइम विशेषज्ञ और पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रोफेसर त्रिवेणी सिंह ने कहा कि ऐसे मामलों में ठग पहले विश्वास का माहौल बनाते हैं और फिर फर्जी दस्तावेजों के जरिए पूरी प्रक्रिया को वास्तविक दिखाते हैं। उन्होंने कहा, “विदेश नौकरी और वीजा से जुड़े फ्रॉड में सोशल इंजीनियरिंग सबसे बड़ा हथियार होता है। पीड़ित को भरोसे में लेकर धीरे-धीरे बड़ी रकम निवेश करवाई जाती है।”

उन्होंने आगे चेतावनी दी कि कोई भी एजेंट अगर बिना किसी आधिकारिक सरकारी या मान्यता प्राप्त इमिग्रेशन प्रक्रिया के केवल व्हाट्सएप, कॉल या अनौपचारिक कंसल्टेंसी के जरिए वीजा प्रक्रिया चला रहा हो, तो उस पर तुरंत संदेह करना चाहिए। ऐसे मामलों में जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव है।

फिलहाल पुलिस ने आरोपी एजेंट के खिलाफ धोखाधड़ी और जालसाजी की धाराओं में मामला दर्ज कर जांच तेज कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही इस मामले में और अहम खुलासे हो सकते हैं और जरूरत पड़ने पर गिरफ्तारी भी की जाएगी।

यह घटना एक बार फिर इस बात को उजागर करती है कि विदेश नौकरी के नाम पर सक्रिय फर्जी नेटवर्क लगातार लोगों को निशाना बना रहे हैं, और ऐसे मामलों में सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव है।

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