उदगीर: महाराष्ट्र के लातूर जिले के उदगीर में ₹2,134 करोड़ 79 लाख 43 हजार 730 रुपये के कथित आर्थिक घोटाले का खुलासा हुआ है। आयकर विभाग की तीन दिन चली जांच के बाद सामने आए इस मामले में एक व्यक्ति पर 16 कंपनियों के साथ कथित मिलीभगत कर बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितता करने और रकम विदेश भेजने में मदद करने का आरोप है। मामले में उदगीर शहर पुलिस ने आरोपी श्याम शिवप्रसाद कलानी और 16 कंपनियों के खिलाफ धोखाधड़ी और हेराफेरी सहित संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया है।
बताया गया है कि उदगीर शहर के मोंढा इलाके में आयकर विभाग की अलग-अलग टीमें पिछले तीन दिनों से जांच कर रही थीं। जांच के दौरान अधिकारियों को बड़े पैमाने पर संदिग्ध वित्तीय लेनदेन और दस्तावेजों से जुड़ी अनियमितताओं के बारे में जानकारी मिली। जांच आगे बढ़ने के बाद कथित घोटाले की रकम करीब ₹2,134.79 करोड़ तक पहुंचने की बात सामने आई।
आयकर विभाग की जांच पूरी होने के बाद मामले की शिकायत उदगीर शहर पुलिस थाने में दर्ज कराई गई। छत्रपति संभाजीनगर स्थित आयकर विभाग के उप निदेशक की ओर से शिकायत दिए जाने के बाद पुलिस ने आरोपी और संबंधित कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की।
16 कंपनियों के साथ मिलीभगत का आरोप
पुलिस में दर्ज शिकायत के मुताबिक, श्याम शिवप्रसाद कलानी ने कथित तौर पर 16 कंपनियों के साथ मिलकर आर्थिक लेनदेन में अनियमितता की। आरोप है कि इस पूरे नेटवर्क के जरिए वित्तीय लाभ हासिल करने के उद्देश्य से बड़ी रकम को विदेश भेजने की प्रक्रिया में मदद की गई।
जांच में विदेशी फंड ट्रांसफर से जुड़े कथित फर्जी और कूटरचित प्रमाणपत्र तैयार किए जाने की बात भी सामने आई है। आरोप है कि इन दस्तावेजों का इस्तेमाल विदेशी धनराशि भेजने से जुड़े लेनदेन को वैध दिखाने के लिए किया गया। आयकर विभाग की जांच में सामने आए दस्तावेजों और वित्तीय लेनदेन के आधार पर पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए आपराधिक जांच शुरू की है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच लातूर की आर्थिक अपराध शाखा को सौंपे जाने की जानकारी सामने आई है। आर्थिक अपराध शाखा अब बैंक खातों, कंपनियों के वित्तीय रिकॉर्ड, विदेशी लेनदेन और जांच में सामने आए दस्तावेजों की विस्तृत पड़ताल करेगी।
विदेश भेजी गई रकम और दस्तावेजों की होगी जांच
जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि कथित तौर पर इतनी बड़ी रकम किन माध्यमों से विदेश भेजी गई और इसमें कौन-कौन से बैंक खाते या कंपनियां शामिल थीं। साथ ही 16 कंपनियों के बीच हुए लेनदेन और आरोपी की भूमिका की भी जांच की जाएगी।
आयकर विभाग की प्रारंभिक जांच में सामने आए तथ्यों को अब आपराधिक जांच के दौरान दस्तावेजों और वित्तीय रिकॉर्ड से मिलाया जाएगा। पुलिस यह भी पता लगाएगी कि कथित फर्जी प्रमाणपत्र किसने तैयार किए, उनका इस्तेमाल किन लेनदेन में हुआ और इस प्रक्रिया में अन्य लोगों की क्या भूमिका रही।
अधिकारियों के अनुसार, मामले की जांच आगे बढ़ने के साथ कथित वित्तीय नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और संस्थाओं के नाम भी सामने आ सकते हैं। फिलहाल पुलिस और आर्थिक अपराध शाखा का मुख्य फोकस ₹2,134 करोड़ से अधिक के कथित लेनदेन की वास्तविक प्रकृति, रकम के स्रोत और उसके अंतिम उपयोग का पता लगाने पर है।
