1 जनवरी 2027 से ग्राहकों के लिए अल्फा-न्यूमेरिक कोड वाली चेकबुक जरूरी होगी, जबकि 1 अक्टूबर 2026 से FD ब्याज दरों में पारदर्शिता से जुड़े नए नियम लागू होंगे।

1 जनवरी से बदल जाएगा चेक का नियम, अल्फा-न्यूमेरिक कोड वाली चेकबुक जरूरी; FD पर भी नया नियम

Team The420
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नई दिल्ली: बैंकिंग से जुड़े ग्राहकों के लिए आने वाले महीनों में दो अहम बदलाव होने जा रहे हैं। 1 जनवरी 2027 से अल्फा-न्यूमेरिक कोड वाली चेकबुक का इस्तेमाल जरूरी किया जा रहा है। बैंकों ने ग्राहकों को 31 दिसंबर 2026 तक पुरानी चेकबुक बदलने की सलाह दी है। बैंक ऑफ इंडिया ने अपने ग्राहकों को बताया है कि 31 दिसंबर के बाद ₹50 हजार या उससे अधिक राशि वाले ऐसे चेक स्वीकार नहीं किए जाएंगे, जिन पर निर्धारित अल्फा-न्यूमेरिक कोड नहीं होगा।

दूसरी ओर, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने जमा पर ब्याज दरों से जुड़े नियमों में भी बदलाव किया है। संशोधित व्यवस्था 1 अक्टूबर 2026 से लागू होगी। इसका उद्देश्य समान परिस्थितियों वाली जमा पर ब्याज दरों में एकरूपता और ग्राहकों के लिए ज्यादा पारदर्शिता सुनिश्चित करना है।

चेकबुक में अब होगा अल्फा-न्यूमेरिक कोड

बैंकिंग क्षेत्र में चेक से जुड़ी धोखाधड़ी रोकने के लिए अल्फा-न्यूमेरिक कोड को एक अतिरिक्त सुरक्षा सुविधा के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है। इसमें अक्षरों और अंकों का संयोजन होता है, जिसे बैंक के सिस्टम में चेक की पहचान और सत्यापन के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।

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बैंक ऑफ इंडिया की मौजूदा नीति के मुताबिक, बैंक ने नई सीरीज की चेकबुक में यह सुरक्षा सुविधा सितंबर 2022 से लागू की थी। बैंक के अनुसार, नई चेकबुक में इस कोड के सत्यापन की व्यवस्था चेक संबंधी धोखाधड़ी को कम करने में मदद करती है।

अब 1 जनवरी 2027 से यह व्यवस्था व्यापक रूप से लागू होने जा रही है। ग्राहकों को सलाह दी गई है कि वे समय रहते अपनी पुरानी चेकबुक बदल लें, ताकि नए साल से भुगतान में किसी तरह की परेशानी न हो।

₹50 हजार से अधिक के चेक पर खास ध्यान

बैंक ऑफ इंडिया ने अपने ग्राहकों को विशेष रूप से ₹50 हजार और उससे अधिक राशि वाले चेक को लेकर सूचना दी है। 31 दिसंबर 2026 के बाद बिना अल्फा-न्यूमेरिक कोड वाले ऐसे चेक स्वीकार नहीं किए जाएंगे।

हालांकि, चेक सुरक्षा के मामले में Positive Pay System भी महत्वपूर्ण है। बैंक ऑफ इंडिया की नीति के अनुसार ₹50 हजार या उससे अधिक के चेक के लिए Positive Pay सुविधा उपलब्ध है, जबकि ₹5 लाख या उससे अधिक के चेक के लिए बैंक में यह व्यवस्था अनिवार्य की गई है।

चेक क्लियरिंग भी हो रही है तेज

RBI लंबे समय से चेक ट्रंकेशन सिस्टम (CTS) के जरिए चेक क्लियरिंग को इलेक्ट्रॉनिक और तेज बनाने की दिशा में काम कर रहा है। इसमें भौतिक चेक को डिजिटल रूप में प्रस्तुत कर क्लियरिंग प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाता है।

नई सुरक्षा सुविधाओं का उद्देश्य चेक की प्रामाणिकता जांचने और छेड़छाड़ या फर्जी चेक के जरिए होने वाली धोखाधड़ी के जोखिम को कम करना है।

साइबर अपराध विशेषज्ञ ने दी सावधानी की सलाह

प्रसिद्ध साइबर अपराध विशेषज्ञ और पूर्व IPS अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह के मुताबिक, डिजिटल बैंकिंग के बढ़ते इस्तेमाल के साथ ग्राहकों को पारंपरिक बैंकिंग माध्यमों में भी सुरक्षा को लेकर सतर्क रहना चाहिए। खासकर चेकबुक, बैंकिंग विवरण और खाते से जुड़ी संवेदनशील जानकारी किसी अनजान व्यक्ति के साथ साझा नहीं करनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि बैंकिंग धोखाधड़ी में अपराधी कई बार फोन कॉल, फर्जी संदेश या सोशल मीडिया के जरिए ग्राहक से बैंकिंग जानकारी हासिल करने की कोशिश करते हैं। इसलिए किसी संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने, OTP बताने या बैंक संबंधी जानकारी साझा करने से बचना जरूरी है।

1 अक्टूबर से FD के नियम भी बदलेंगे

RBI के संशोधित डिपॉजिट नियम 1 अक्टूबर 2026 से लागू होंगे। इसके तहत समान राशि और समान शर्तों वाली जमा को एक ही दिन स्वीकार किए जाने पर ब्याज दरों में शाखा के आधार पर मनमाना अंतर नहीं किया जा सकेगा। बैंकों को जमा पर लागू ब्याज दरों की जानकारी पहले से अपनी वेबसाइट पर प्रकाशित करनी होगी।

इसका मतलब यह नहीं है कि 1 अक्टूबर से FD की ब्याज दर अपने आप बढ़ जाएगी या घट जाएगी। बैंक बाजार की परिस्थितियों, फंडिंग लागत और अपनी जरूरत के अनुसार दरें तय करते रहेंगे। बदलाव मुख्य रूप से दरों की पारदर्शिता और समान जमा पर एकरूपता से जुड़ा है।

बड़ी रकम वाली FD पर अलग नियम

RBI ने बैंकों को बड़े यानी बल्क डिपॉजिट पर कुछ परिस्थितियों में अलग-अलग ब्याज दर तय करने की अनुमति दी है। इसके लिए निर्धारित मानदंड और दरों की जानकारी पहले से सार्वजनिक करनी होगी। बल्क डिपॉजिट की दरें बैंकों को प्रत्येक कारोबारी दिन अपनी वेबसाइट पर प्रकाशित करनी होंगी।

इस तरह आने वाले महीनों में बैंक ग्राहकों के लिए चेक सुरक्षा और FD दोनों मोर्चों पर बदलाव महत्वपूर्ण रहेंगे। ग्राहकों के लिए सबसे जरूरी है कि वे अपनी चेकबुक समय पर अपडेट कराएं और FD खोलते समय बैंक की प्रकाशित ब्याज दर और नियमों की जांच जरूर करें।

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