केंद्र सरकार सड़क सुरक्षा को मजबूत बनाने के उद्देश्य से मोटर वाहन अधिनियम में व्यापक संशोधन की तैयारी कर रही है। प्रस्तावित बदलावों के तहत बार-बार यातायात नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहन चालकों का ड्राइविंग लाइसेंस निलंबित किया जा सकता है। ऐसे चालकों को लाइसेंस के नवीनीकरण से पहले सरकार द्वारा अधिकृत ड्राइविंग टेस्टिंग सेंटर पर दोबारा ड्राइविंग टेस्ट पास करना अनिवार्य हो सकता है।
सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, प्रस्तावित संशोधनों को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता वाले मंत्रियों के समूह से सैद्धांतिक मंजूरी मिल चुकी है। राज्यों के साथ लगभग दो वर्षों तक चली चर्चा के बाद इन प्रस्तावों को अंतिम रूप दिया गया है।
सरकार का मानना है कि लगातार बढ़ रही सड़क दुर्घटनाओं को देखते हुए आदतन यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ अधिक सख्त कार्रवाई आवश्यक है। अधिकारियों के अनुसार, लापरवाही से वाहन चलाने वाले न केवल अपनी जान जोखिम में डालते हैं, बल्कि अन्य सड़क उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा के लिए भी गंभीर खतरा बनते हैं।
हालांकि देशभर में ई-चालान व्यवस्था लागू की जा चुकी है, लेकिन सरकार का मानना है कि अनेक वाहन स्वामी अब भी बार-बार होने वाले उल्लंघनों को गंभीरता से नहीं लेते। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत सरकार के वाहन (VAHAN) पोर्टल पर दर्ज लंबित चालानों के आधार पर आदतन नियम तोड़ने वालों की पहचान कर उनके लाइसेंस निलंबित किए जा सकते हैं।
प्रस्तावों में यह भी शामिल है कि जिन चालकों का लाइसेंस निलंबित किया जाएगा, उन्हें नवीनीकरण से पहले दोबारा ड्राइविंग टेस्ट सफलतापूर्वक पास करना होगा। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि केवल सक्षम और जिम्मेदार चालक ही दोबारा सड़क पर वाहन चला सकें।
इसके अलावा सरकार बार-बार नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहन मालिकों के लिए अन्य वाहन संबंधी सेवाओं को भी ट्रैफिक रिकॉर्ड से जोड़ने पर विचार कर रही है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत लगातार लंबित चालान वाले वाहनों के फिटनेस प्रमाणपत्र, प्रदूषण जांच (PUC) जैसी सेवाओं पर अस्थायी रोक लगाई जा सकती है, जब तक कि संबंधित उल्लंघनों का निस्तारण नहीं हो जाता।
प्रस्तावित संशोधनों का उद्देश्य बिना बीमा वाले वाहनों के उपयोग पर भी प्रभावी रोक लगाना है। सरकार अनिवार्य मोटर बीमा नियमों के अनुपालन को और मजबूत बनाने के विकल्पों पर भी विचार कर रही है।
सरकार ने मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (MACT) को अधिक प्रभावी बनाने का भी प्रस्ताव रखा है। संशोधनों के तहत न्यायाधिकरणों को दुर्घटना पीड़ितों और उनके परिवारों को अंतिम निर्णय से पहले अंतरिम मुआवजा देने का अधिकार दिया जा सकता है, ताकि उन्हें लंबे समय तक प्रतीक्षा न करनी पड़े।
इसके साथ ही सरकार थर्ड-पार्टी मोटर बीमा प्रीमियम तय करने के लिए जोखिम-आधारित प्रणाली को फिर से लागू करने पर विचार कर रही है। प्रस्ताव के अनुसार, वाहन की आयु और चालक के ट्रैफिक उल्लंघन के रिकॉर्ड के आधार पर प्रीमियम निर्धारित किया जा सकता है। इसके लिए भारतीय बीमा विनियामक एवं विकास प्राधिकरण (IRDAI) के साथ समन्वय कर एक रूपरेखा तैयार की जाएगी।
अब इन प्रस्तावों को विधेयक का रूप दिए जाने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। अधिकारियों के अनुसार, लाइसेंस निलंबन की व्यवस्था चरणबद्ध तरीके से लागू की जा सकती है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाएगा कि कितनी बार और किस प्रकार के यातायात नियमों के उल्लंघन पर लाइसेंस निलंबित या रद्द किया जाएगा। संसद में विधेयक पेश किए जाने से पहले इन प्रावधानों को अंतिम रूप दिए जाने की संभावना है।
