पुणे/नासिक। महाराष्ट्र के नासिक स्थित Tata Consultancy Services (TCS) की एक BPO यूनिट में कथित यौन उत्पीड़न और जबरन दबाव के गंभीर आरोपों ने बड़ा कानूनी रूप ले लिया है। इस मामले में अब तक 9 अलग-अलग FIR दर्ज की जा चुकी हैं और कई आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। सबसे अहम गिरफ्तारी कंपनी की एक वरिष्ठ HR अधिकारी (AGM स्तर) की बताई जा रही है, जो POSH (कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न रोकथाम) की आंतरिक समिति का भी हिस्सा थीं। उन पर आरोप है कि उन्होंने बार-बार मिली शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं की।
जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार, आठ महिला कर्मचारियों ने शिकायत दर्ज कराते हुए आरोप लगाया कि उनके साथ वरिष्ठ सहकर्मियों द्वारा लगातार अनुचित व्यवहार किया गया। पीड़िताओं का कहना है कि उन्होंने कई बार HR विभाग को लिखित और मौखिक शिकायतें दीं, लेकिन हर बार उनकी शिकायतों को या तो नजरअंदाज कर दिया गया या उन्हें टाल दिया गया। इसी आधार पर मामले की गंभीरता को देखते हुए विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया।
जांच एजेंसियों ने HR AGM के इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से 78 ईमेल और एक अहम चैट रिकॉर्ड बरामद किया है। इन डिजिटल साक्ष्यों की जांच उनके सामने ही की जा रही है। शुरुआती जांच में यह भी सामने आया है कि एक वरिष्ठ मैनेजर ने ईमेल के जरिए बार-बार दो आरोपियों के खिलाफ शिकायतों की जानकारी HR अधिकारी को दी थी, लेकिन इन पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
SIT अब कॉल रिकॉर्ड, CCTV फुटेज, आंतरिक ईमेल, चैट्स, बैंक ट्रांजैक्शन और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की गहन जांच कर रही है। जांच का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि क्या शिकायतों को जानबूझकर दबाया गया, या फिर POSH कानून के तहत तय प्रक्रिया का पालन करने में गंभीर लापरवाही बरती गई। अधिकारियों के मुताबिक, अगर यह साबित होता है कि शिकायतों को दबाया गया, तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी।
इस मामले में जिन आरोपियों के नाम सामने आए हैं, उनमें Danish Sheikh, Tausif Attar, Raza Memon, Shahrukh Qureshi, Shafi Sheikh, Asif Aftab Ansari और Nida Khan शामिल हैं। सभी आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है, जिनमें यौन उत्पीड़न, महिला की मर्यादा भंग करना, कपड़े उतारने के इरादे से हमला, मानहानि और आपराधिक साजिश जैसी गंभीर धाराएं शामिल हैं।
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अदालत ने गिरफ्तार HR अधिकारी को 15 अप्रैल तक पुलिस हिरासत में भेजा है, जबकि अन्य आरोपी न्यायिक हिरासत में नासिक रोड सेंट्रल जेल में बंद हैं। एक आरोपी फिलहाल फरार बताया जा रहा है, जिसकी तलाश SIT द्वारा की जा रही है।
जांच में एक और चौंकाने वाला खुलासा यह हुआ है कि पुलिस ने इस मामले में अंडरकवर ऑपरेशन चलाया था। जानकारी के मुताबिक, पुलिसकर्मी कई हफ्तों तक हाउसकीपिंग स्टाफ बनकर कंपनी परिसर में मौजूद रहे और वहां के माहौल तथा कर्मचारियों के व्यवहार पर नजर रखी। इसी ऑपरेशन के आधार पर कई गंभीर आरोपों की पुष्टि हुई, जिसके बाद FIR दर्ज की गईं और गिरफ्तारियां की गईं।
कंपनी ने इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि वह किसी भी प्रकार के उत्पीड़न के खिलाफ “जीरो टॉलरेंस” नीति अपनाती है। कंपनी ने पुष्टि की है कि जिन कर्मचारियों के नाम इस मामले में सामने आए हैं, उन्हें जांच पूरी होने तक सस्पेंड कर दिया गया है।
वहीं, कंपनी के चेयरमैन Natarajan Chandrasekaran ने इन आरोपों को “गंभीर और चिंताजनक” बताया है। उन्होंने कहा कि शीर्ष स्तर पर आंतरिक जांच जारी है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
राज्य स्तर पर भी इस मामले को गंभीरता से लिया गया है। विधान परिषद की उपसभापति Neelam Gorhe ने निष्पक्ष जांच और फास्ट-ट्रैक ट्रायल की मांग की है। नासिक जिला प्रशासन ने कंपनी में POSH अनुपालन की समीक्षा के आदेश दिए हैं और अन्य IT कंपनियों में भी कार्यस्थल सुरक्षा की जांच के संकेत दिए हैं।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यदि जांच में POSH नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो कंपनी के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यह मामला अब केवल एक आपराधिक जांच तक सीमित नहीं है, बल्कि कॉर्पोरेट कार्यस्थलों में महिला सुरक्षा, जवाबदेही और शिकायत निवारण तंत्र की विश्वसनीयता पर भी गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
