ताइवान की जांच एजेंसियों ने अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराध नेटवर्क के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए 62 लोगों पर आरोप लगाए हैं। ये आरोपी कथित तौर पर Prince Group से जुड़े बताए जा रहे हैं, जिसे वैश्विक स्तर पर ऑनलाइन ठगी और मनी लॉन्ड्रिंग गतिविधियों के लिए संदिग्ध संगठन माना जा रहा है। जांच अधिकारियों का कहना है कि यह नेटवर्क दक्षिण-पूर्व एशिया में सक्रिय बहुस्तरीय साइबर ठगी सिंडिकेट का हिस्सा था।
मनी लॉन्ड्रिंग का तरीका
प्रॉसिक्यूटर कार्यालय के अनुसार आरोपियों पर ऑनलाइन जुआ, क्रिप्टोकरेंसी निवेश धोखाधड़ी और रोमांस स्कैम जैसी योजनाओं के जरिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लोगों को ठगने का आरोप है। इस नेटवर्क ने फर्जी निवेश योजनाओं और भावनात्मक संबंधों के झांसे में फंसाकर करोड़ों डॉलर की अवैध कमाई की।
जांच में एक मुख्य संदिग्ध की भी पहचान की गई है, जिसे सिंडिकेट का संस्थापक माना जा रहा है। हालांकि रिपोर्ट में उसका नाम सार्वजनिक नहीं किया गया। बताया गया कि आरोपी को पहले कंबोडिया से प्रत्यर्पित कर चीन से जुड़े कानूनी मामलों के तहत गिरफ्तार किया गया था। चीनी अधिकारियों ने उसे एक बड़े साइबर जुआ और धोखाधड़ी नेटवर्क का कथित सरगना बताया था।
अभियोजकों का आरोप है कि सिंडिकेट ने अवैध धन को छिपाने के लिए शेल कंपनियों का सहारा लिया। जांच में पाया गया कि धन को कई स्तरों पर कॉरपोरेट संस्थाओं के माध्यम से ट्रांसफर किया गया ताकि असली स्रोत को छुपाया जा सके। अधिकारियों का कहना है कि अवैध आय का उपयोग ताइवान में लग्जरी कार, रियल एस्टेट और महंगे उपभोक्ता सामान खरीदने में किया गया।
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प्रॉसिक्यूटर कार्यालय ने बताया कि लगभग 10.8 अरब ताइवान डॉलर (करीब 339 मिलियन अमेरिकी डॉलर) विदेशों से ताइवान भेजे गए थे, जिनके मनी लॉन्ड्रिंग गतिविधियों से जुड़े होने का संदेह है। जांच के दौरान अधिकारियों ने 24 रियल एस्टेट संपत्तियां, 35 वाहन और डिजाइनर बैग तथा जूते जैसे विलासिता के सामान जब्त किए हैं।
अधिकारियों ने यह भी बताया कि अब तक 5.5 अरब ताइवान डॉलर से अधिक की संपत्ति फ्रीज या जब्त की जा चुकी है। जांच टीम का कहना है कि इस समूह का वित्तीय लेनदेन नेटवर्क कई देशों में फैला हुआ था, जिससे इसे ट्रैक करना बेहद जटिल हो गया था।
कानून प्रवर्तन एजेंसियों का मानना है कि यह साइबर ठगी मॉडल वैश्विक ऑनलाइन अपराध अर्थव्यवस्था का हिस्सा है, जो कोविड-19 महामारी के दौरान तेजी से उभरा। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे सिंडिकेट सोशल इंजीनियरिंग तकनीकों का उपयोग कर लोगों को निवेश पर उच्च रिटर्न या भावनात्मक संबंधों के झांसे में फंसाते हैं।
अभियोजकों ने यह भी आरोप लगाया कि इस संगठन ने लाखों इंटरनेट उपयोगकर्ताओं को फर्जी वित्तीय योजनाओं में निवेश करने के लिए प्रेरित किया। अपराधी समूह कथित तौर पर मानव तस्करी के शिकार श्रमिकों का उपयोग ऑनलाइन ठगी संचालन में करता था, जिससे मानवाधिकार संबंधी चिंताएं भी सामने आई हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि रोमांस स्कैम और क्रिप्टोकरेंसी धोखाधड़ी वैश्विक साइबर अपराध अर्थव्यवस्था का तेजी से बढ़ता क्षेत्र बन गया है, जिससे हर साल अरबों डॉलर की अवैध आय पैदा होती है।
Prince Group का इनकार
इस बीच, Prince Group ने पिछले नवंबर में जारी बयान में किसी भी गलत काम से इनकार करते हुए आरोपों को निराधार बताया था। कंपनी ने कहा था कि वह कानूनी प्रक्रिया का सामना करेगी और अदालत में अपना पक्ष रखेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराध नियंत्रण की चुनौतियों को उजागर करता है। सीमा पार डिजिटल वित्तीय प्रणाली के विस्तार के साथ ऐसे सिंडिकेट की पहचान और उन पर कार्रवाई वैश्विक कानून प्रवर्तन एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही है।
