“नगर निगम के नाम पर APK फाइल डाउनलोड कराकर मिनटों में उड़ा दी जीवनभर की बचत; साइबर फ्रॉड नेटवर्क पर पुलिस की नजर”

“फर्जी वाटर बिल ऐप से बड़ा साइबर झटका: सोनीपत में 3 लाख की ठगी, सिर्फ 13 रुपए के बहाने पूरा खाता साफ”

Roopa
By Roopa
4 Min Read

सोनीपत। हरियाणा के सोनीपत में साइबर ठगों ने एक बार फिर तकनीक का दुरुपयोग कर आम नागरिक को बड़ा नुकसान पहुंचाया है। नगर निगम के वाटर बिल अपडेट के नाम पर एक व्यक्ति से लगभग ₹2,97,000 की ठगी कर ली गई। ठगों ने एक फर्जी मोबाइल ऐप डाउनलोड करवाकर और मात्र 13 रुपए के छोटे ट्रांजैक्शन के बहाने पूरे बैंक खाते को खाली कर दिया।

पीड़ित बत्रा कॉलोनी निवासी दिनेश कुमार कटारिया ने बताया कि यह पूरा मामला एक साधारण मैसेज से शुरू हुआ। उन्हें एक संदेश मिला जिसमें लिखा था कि उनका वाटर बिल अपडेट नहीं होने के कारण उनकी कंज्यूमर आईडी बंद कर दी गई है और उसे चालू कराने के लिए एक नंबर पर संपर्क करना होगा।

दिनेश कुमार के अनुसार, जैसे ही उन्होंने दिए गए नंबर पर कॉल किया, सामने से बात करने वाले व्यक्ति ने खुद को विभाग का कर्मचारी बताते हुए लगभग 20 मिनट तक बातचीत की और उन्हें भरोसे में ले लिया। इसके बाद उन्हें “DULB HARYANA CITIZEN SERVICE” नाम की एक APK फाइल डाउनलोड करने के लिए कहा गया, जिसे एक आधिकारिक ऐप जैसा दिखाया गया था।

पीड़ित ने बताया कि ऐप इंस्टॉल करने के बाद उनसे निजी जानकारी भरवाई गई और फिर केवल 13 रुपए की “प्रोसेसिंग फीस” ट्रांसफर करने को कहा गया। जैसे ही उन्होंने अपने इंडियन बैंक खाते की डिटेल्स डालीं, तुरंत 99,000 रुपए कटने का मैसेज आया, जिससे वह घबरा गए।

घबराहट के बावजूद जब तक वह बैंक की ओर रवाना हुए, तब तक ठगों ने एक और बड़ी ट्रांजैक्शन कर दी। इस बार उनके खाते से 1,98,000 रुपए निकाल लिए गए। कुल मिलाकर कुछ ही मिनटों में उनके खाते से 2.97 लाख रुपए गायब हो गए।

FutureCrime Summit 2026: Registrations to Open Soon for India’s Biggest Cybercrime Conference

पीड़ित का कहना है कि ठग बेहद संगठित तरीके से काम कर रहे थे और पूरी प्रक्रिया को इस तरह अंजाम दिया गया कि उन्हें संभलने का कोई मौका नहीं मिला। आरोप है कि गिरोह फर्जी पहचान और बैंक खातों का इस्तेमाल कर लगातार लोगों को निशाना बना रहा है।

घटना के तुरंत बाद दिनेश कुमार ने राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद मामला सोनीपत साइबर थाना पुलिस के पास पहुंचा, जहां भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।

पुलिस के अनुसार, जिन बैंक खातों में रकम ट्रांसफर हुई है, उन्हें फ्रीज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। साथ ही मोबाइल नंबर, ट्रांजैक्शन डिटेल और डिजिटल फूटप्रिंट के आधार पर आरोपियों की पहचान और लोकेशन ट्रेस करने की कोशिश की जा रही है।

साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में सबसे बड़ा खतरा फर्जी ऐप और APK फाइल्स के जरिए होता है, जिनमें रिमोट एक्सेस टूल्स छिपे हो सकते हैं। एक बार इंस्टॉल होने के बाद ठग मोबाइल और बैंकिंग डेटा तक पहुंच हासिल कर लेते हैं।

एक साइबर विशेषज्ञ के अनुसार, “लोगों को यह समझना होगा कि कोई भी सरकारी विभाग कभी भी अनजान लिंक या APK फाइल डाउनलोड करने के लिए नहीं कहता। यही सबसे बड़ा रेड फ्लैग होता है।”

स्थानीय प्रशासन ने भी नागरिकों से अपील की है कि किसी भी अनजान कॉल, मैसेज या लिंक पर भरोसा न करें और किसी भी प्रकार की वित्तीय जानकारी साझा करने से पहले उसकी आधिकारिक पुष्टि जरूर करें।

कुल मिलाकर यह मामला एक बार फिर दिखाता है कि कैसे साइबर अपराधी छोटे-छोटे ट्रांजैक्शन और तकनीकी चालों के जरिए बड़ी ठगी को अंजाम दे रहे हैं, और कैसे डिजिटल सतर्कता की कमी आम लोगों को भारी नुकसान में डाल सकती है।

हमसे जुड़ें

Share This Article