उत्तर प्रदेश में नए बिजली कनेक्शन के साथ स्मार्ट मीटर लगाने के दौरान हुई अतिरिक्त वसूली अब उपभोक्ताओं को वापस की जाएगी। विद्युत नियामक आयोग के आदेश के बाद बिजली कंपनियों को करीब 200 करोड़ रुपये उपभोक्ताओं को उनके बिजली बिलों में समायोजन के जरिए लौटाने होंगे।
आयोग ने निर्देश दिया है कि यह समायोजन अप्रैल से जुलाई के बीच जारी होने वाले बिजली बिलों में किया जाए। कंपनियों को इस आदेश के अनुपालन की रिपोर्ट 11 अगस्त तक आयोग को सौंपनी होगी।
3.53 लाख से ज्यादा उपभोक्ताओं को मिलेगा लाभ
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 10 सितंबर से 31 दिसंबर 2025 के बीच बिजली कंपनियों ने 3,53,357 उपभोक्ताओं को नए बिजली कनेक्शन जारी किए थे। उस समय स्मार्ट मीटर की कीमतें औपचारिक रूप से तय नहीं हुई थीं, जिसके कारण उपभोक्ताओं से अधिक राशि वसूल ली गई।
अब नियामक आयोग द्वारा मंजूर नई कॉस्ट डेटा बुक के आधार पर मीटरों की वास्तविक कीमत तय होने के बाद अतिरिक्त वसूली की राशि वापस की जा रही है।
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पहले ज्यादा वसूले गए थे मीटर के दाम
नए कनेक्शन जारी करते समय उपभोक्ताओं से स्मार्ट मीटर के लिए निम्न दरों पर राशि ली गई थी:
- सिंगल फेज स्मार्ट मीटर: 6016 रुपये
- थ्री फेज स्मार्ट मीटर: 11,341 रुपये
बाद में नई लागत निर्धारित होने पर इनकी कीमत काफी कम तय की गई:
- सिंगल फेज स्मार्ट मीटर: 2800 रुपये
- थ्री फेज स्मार्ट मीटर: 4100 रुपये
करीब 200 करोड़ रुपये की वापसी
अधिकारियों के अनुसार, केवल 10 सितंबर से 31 दिसंबर 2025 के बीच लगे मीटरों के लिए ही करीब 127 करोड़ रुपये की अतिरिक्त वसूली का अंतर बनता है। इससे पहले लगे मीटरों को शामिल करने पर कुल वापसी की राशि लगभग 200 करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है।
बिल में समायोजन के जरिए मिलेगी राहत
उपभोक्ताओं को यह राशि सीधे नकद नहीं दी जाएगी, बल्कि बिजली कंपनियां इसे आगामी महीनों के बिजली बिलों में समायोजित करेंगी। इससे लाखों उपभोक्ताओं के बिलों में कमी देखने को मिलेगी।
ऊर्जा क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला उपभोक्ताओं के हित में महत्वपूर्ण कदम है और इससे स्मार्ट मीटर योजना को लेकर पारदर्शिता भी बढ़ेगी।
