सीकर: राजस्थान के सीकर जिले में कथित निवेश और चिटफंड घोटाले का बड़ा मामला सामने आया है, जहां 15 महीने में निवेश की राशि दोगुनी करने, विदेशी टूर, लग्जरी कार और मोटे कमीशन का लालच देकर युवाओं से करोड़ों रुपये की ठगी किए जाने का आरोप लगा है। पीड़ितों का दावा है कि आरोपियों ने उन्हें सोने के गहने गिरवी रखकर गोल्ड लोन लेने और अन्य ऋण लेकर निवेश करने के लिए प्रेरित किया। जब निवेशकों ने अपनी रकम वापस मांगी तो कंपनी का कार्यालय बंद मिला और आरोपी फरार हो चुके थे। अदालत के आदेश के बाद पुलिस ने चार आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश और अन्य धाराओं में दो अलग-अलग मामले दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
जांच के अनुसार, यह पूरा मामला सीकर शहर के पालवास चौराहे पर संचालित एक कथित अंतरराष्ट्रीय निवेश कंपनी से जुड़ा है। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि कंपनी ने आकर्षक कार्यालय, बड़े-बड़े बैनर, प्रचार सामग्री और प्रभावशाली प्रस्तुतियों के माध्यम से लोगों का भरोसा जीता। निवेशकों को भरोसा दिलाया गया कि उनकी राशि केवल 15 महीने में दोगुनी हो जाएगी। इसके अलावा विदेशी यात्रा, लग्जरी कार, प्लॉट और भारी कमीशन जैसे आकर्षक प्रलोभन भी दिए गए, जिससे बड़ी संख्या में लोगों ने निवेश किया।
दौलतपुरा निवासी राजेंद्र कुमार ने शिकायत में आरोप लगाया कि उसकी पहचान सांवरमल से थी, जिसने स्वयं को कंपनी का मार्केटिंग मैनेजर बताते हुए निवेश योजना में शामिल होने के लिए प्रेरित किया। राजेंद्र ने अगस्त 2022 से नवंबर 2025 के बीच अलग-अलग किश्तों में करीब ₹34 लाख निवेश किए। रकम जुटाने के लिए उसने अपनी मां और बहन के सोने के आभूषण गिरवी रखकर ₹7.50 लाख का गोल्ड लोन लिया, जबकि अपने भाई के वाहन पर ₹10.34 लाख का ऋण भी कराया।
शिकायत के मुताबिक, आरोपियों ने करीब ₹15 लाख की राशि डॉलर में परिवर्तित कर अपनी सहयोगी सोहनी देवी के बैंक खाते में ट्रांसफर करवाई। बाद में केवल ₹4 लाख लौटाए गए, जबकि लगभग ₹30 लाख की राशि वापस नहीं की गई। पीड़ित का आरोप है कि लगातार मांग करने के बावजूद उसे शेष धनराशि नहीं मिली।
दूसरे मामले में जेरठी निवासी नितेश कुमार ने आरोप लगाया कि सांवरमल, मनोज कुमार, देवीचंद मील और संदीप ने उसे भी निवेश के लिए प्रेरित किया। उसने दिसंबर 2022 से अक्टूबर 2023 के बीच करीब ₹13 लाख निवेश किए। इसके लिए उसने एक वित्तीय संस्था से लगभग ₹5 लाख का गोल्ड लोन तथा एक अन्य कंपनी से ₹56,000 का व्यक्तिगत ऋण लिया। उसे भी निवेश पर दोगुना रिटर्न और भारी मुनाफे का भरोसा दिलाया गया था।
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पीड़ितों के अनुसार, आरोपियों ने निवेश की रकम को डॉलर और क्रिप्टोकरेंसी में बदलने का दावा किया तथा अधिक लाभ का भरोसा दिया। हालांकि न तो वादा किया गया कमीशन मिला और न ही मूल निवेश वापस किया गया। जनवरी 2026 में जब निवेशक कंपनी के कार्यालय पहुंचे तो वहां ताला लगा मिला। सभी आरोपियों के मोबाइल फोन भी बंद थे, जिसके बाद उन्हें बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी का संदेह हुआ।
शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि आरोपी प्रभावशाली हैं और सरकारी सेवा से जुड़े होने का दावा करते थे। उनके अनुसार, वे अपनी पत्नियों के नाम पर एजेंसियां संचालित कर नेटवर्क मार्केटिंग और चेन सिस्टम के जरिए नए निवेशकों को जोड़ते थे। जब निवेशकों ने अपनी रकम वापस मांगी तो उन्हें कथित रूप से जान से मारने की धमकियां भी दी गईं।
पुलिस में कार्रवाई नहीं होने पर पीड़ितों ने अदालत का रुख किया। न्यायालय के निर्देश के बाद सदर थाना पुलिस ने दोनों मामलों में प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। जांच एजेंसियां अब कथित निवेश नेटवर्क के वित्तीय लेनदेन, बैंक खातों, डिजिटल रिकॉर्ड और अन्य संभावित निवेशकों की जानकारी जुटा रही हैं ताकि पूरे नेटवर्क का खुलासा किया जा सके।
प्रख्यात साइबर अपराध विशेषज्ञ एवं पूर्व IPS अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह का कहना है कि कम समय में पैसा दोगुना करने, निश्चित और असामान्य रूप से अधिक रिटर्न देने तथा क्रिप्टोकरेंसी या विदेशी निवेश के नाम पर लोगों से धन जुटाने वाली योजनाएं अक्सर संगठित वित्तीय धोखाधड़ी का हिस्सा होती हैं। उनके अनुसार, निवेश से पहले संबंधित कंपनी का नियामकीय पंजीकरण, वित्तीय रिकॉर्ड और वैधता की जांच करना बेहद आवश्यक है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस कथित नेटवर्क के माध्यम से कितने लोगों से धन जुटाया गया, रकम कहां स्थानांतरित की गई और इस पूरे निवेश घोटाले में किन-किन लोगों की भूमिका रही।
