फ्लिपकार्ट और अमेजन के पार्सल रास्ते में बदलने वाला गिरोह पकड़ा गया, एक हजार से अधिक ग्राहकों को नुकसान पहुंचाने का आरोप; दो आरोपी फरार, डिलीवरी नेटवर्क की भूमिका की जांच जारी

नोएडा में ई-कॉमर्स डिलीवरी घोटाले का खुलासा, 75 लाख रुपये के चोरी के सामान के साथ पांच गिरफ्तार

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By Roopa
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नोएडा: उत्तर प्रदेश के नोएडा में पुलिस और स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) की संयुक्त कार्रवाई में ई-कॉमर्स कंपनियों के सामान को बीच रास्ते में बदलकर बेचने वाले एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। सेक्टर-20 थाना पुलिस और एसओजी टीम ने कार्रवाई करते हुए पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, गिरोह पिछले कई महीनों से फ्लिपकार्ट और अमेजन जैसी बड़ी ई-कॉमर्स कंपनियों के महंगे सामान की चोरी कर उन्हें बाजार में कम कीमत पर बेच रहा था। आरोपियों के कब्जे से करीब 75 लाख रुपये कीमत का चोरी का सामान बरामद किया गया है।

पुलिस ने शनिवार को सेक्टर-69 इलाके से वासिद खान, सुनील कुमार, विजय सिंह, धर्मेंद्र और रघुराज सिंह को गिरफ्तार किया। इस मामले में सेक्टर-20 थाने में मुकदमा दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी गई है। पुलिस के मुताबिक, गिरोह के दो अन्य सदस्य असलम और भूपेंद्र अभी फरार हैं। दोनों को वांछित घोषित कर उनकी तलाश की जा रही है।

जांच में सामने आया है कि इस गिरोह ने ई-कॉमर्स कंपनियों के डिलीवरी सिस्टम में सेंध लगाकर वारदातों को अंजाम दिया। आरोपी डिलीवरी ब्वॉय के जरिए कंपनियों के हब से ग्राहकों तक पहुंचने वाले सामान की जानकारी हासिल करते थे। डिलीवरी ब्वॉय हब से पार्सल लेकर निकलने के बाद रास्ते में पैकेट खोलकर उसमें रखे महंगे सामान को निकाल लेते थे और उसकी जगह सस्ता सामान या खाली पैकेट रख देते थे। इसके बाद बदला हुआ पार्सल ग्राहक तक पहुंचा दिया जाता था।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, इस पूरे नेटवर्क में डिलीवरी ब्वॉय की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण थी, क्योंकि वही कंपनी के वेयरहाउस या हब से सामान लेकर निकलते थे। चोरी किए गए मोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और अन्य महंगे सामान गिरोह के मुख्य आरोपी वासिद खान और उसके साथियों तक पहुंचाए जाते थे। इसके बाद आरोपी इन सामानों को कम कीमत पर बेचकर मुनाफा कमाते थे।

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गिरोह का मुख्य सरगना गाजियाबाद के खोड़ा कॉलोनी निवासी 32 वर्षीय वासिद खान बताया जा रहा है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क में कितने डिलीवरी कर्मचारियों की मिलीभगत थी और कितने समय से यह अवैध गतिविधि चल रही थी। जांच एजेंसियां आरोपियों से पूछताछ कर गिरोह के अन्य सदस्यों और चोरी के सामान को खरीदने वाले लोगों की जानकारी जुटा रही हैं।

अपर पुलिस उपायुक्त मनीषा सिंह ने बताया कि गिरफ्तार किए गए अधिकांश आरोपी ज्यादा पढ़े-लिखे नहीं हैं। आरोपियों ने दसवीं से बारहवीं तक की शिक्षा प्राप्त की है। गिरफ्तार आरोपियों में सुनील कुमार बुलंदशहर का रहने वाला है, जिसकी उम्र 26 वर्ष है। विजय सिंह कासगंज निवासी है और उसकी उम्र 20 वर्ष है। धर्मेंद्र बुलंदशहर का रहने वाला है और उसकी उम्र 35 वर्ष है, जबकि रघुराज सिंह हरियाणा के पलवल का निवासी है और उसकी उम्र 30 वर्ष है।

पुलिस उपायुक्त साद मियां खान ने बताया कि प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि यह गिरोह एक हजार से अधिक ग्राहकों को नुकसान पहुंचा चुका है। ई-कॉमर्स कंपनियों को लगातार ग्राहकों से सामान नहीं मिलने या गलत सामान पहुंचने की शिकायतें मिल रही थीं। इसके बाद कंपनियों ने आंतरिक जांच शुरू की, जिसमें डिलीवरी प्रक्रिया से जुड़े संदिग्ध लोगों की भूमिका सामने आई।

पुलिस अब गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर चोरी किए गए सामान की बिक्री के नेटवर्क, इसमें शामिल अन्य लोगों और डिलीवरी कर्मचारियों की भूमिका की जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं। ई-कॉमर्स कंपनियों से जुड़े इस तरह के अपराधों को रोकने के लिए डिलीवरी सिस्टम की निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था को भी मजबूत करने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं।

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