ऑनलाइन ठगी की रकम को छिपाने और ट्रांसफर करने के लिए इस्तेमाल किए जा रहे बैंक खातों पर कार्रवाई तेज; पुलिस ने देशभर से मिले 1,705 नोटिस पर जांच शुरू की और दूसरे राज्यों में 2,099 नोटिस जारी किए।

Operation Mule Hunt: पुणे पुलिस का साइबर फ्रॉड नेटवर्क पर बड़ा प्रहार, 152 गिरफ्तार, 132 म्यूल अकाउंट मामलों में केस दर्ज

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By Roopa
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पुणे: साइबर अपराधियों के आर्थिक नेटवर्क को तोड़ने के लिए पुणे पुलिस ने “ऑपरेशन म्यूल हंट” अभियान के तहत बड़ी कार्रवाई करते हुए 152 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने 132 म्यूल बैंक अकाउंट धारकों के खिलाफ मामले दर्ज किए हैं। यह अभियान साइबर ठगी से हासिल धन को ट्रांसफर करने और उसे छिपाने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले बैंक खातों की पहचान कर उन्हें निष्क्रिय करने के उद्देश्य से चलाया जा रहा है।

पुणे पुलिस और महाराष्ट्र साइबर की संयुक्त पहल के तहत चलाए जा रहे इस अभियान में उन लोगों पर शिकंजा कसा जा रहा है, जो कथित तौर पर साइबर अपराधियों को अपने बैंक खाते, दस्तावेज या वित्तीय सुविधाएं उपलब्ध कराकर अवैध लेनदेन में मदद करते हैं। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, साइबर ठगी करने वाले गिरोह अक्सर फर्जी निवेश, डिजिटल अरेस्ट, ऑनलाइन लोन, फर्जी ग्राहक सेवा और अन्य तरीकों से ठगी गई रकम को कई बैंक खातों के माध्यम से घुमाकर उसका स्रोत छिपाने का प्रयास करते हैं।

पुलिस ने बताया कि अन्य राज्यों से कोऑर्डिनेशन पोर्टल के माध्यम से प्राप्त 1,705 नोटिस पर भी कार्रवाई जारी है। इसके अलावा पुणे पुलिस ने म्यूल अकाउंट धारकों के संबंध में दूसरे राज्यों में 2,099 नोटिस जारी किए हैं। इन नोटिस के जरिए संबंधित राज्यों की पुलिस और जांच एजेंसियों से आरोपियों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई करने को कहा गया है।

जांच के दौरान पुणे, मुंबई, नवी मुंबई, छत्रपति संभाजीनगर सहित कई स्थानों और अन्य राज्यों से आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने कई मामलों में आरोपपत्र भी दाखिल कर दिए हैं। अधिकारियों के अनुसार, जांच एजेंसियां बैंक लेनदेन, मोबाइल कॉल रिकॉर्ड, डिजिटल भुगतान से जुड़े डेटा और अन्य तकनीकी साक्ष्यों का विश्लेषण कर रही हैं ताकि साइबर अपराध गिरोहों के पूरे नेटवर्क तक पहुंचा जा सके।

पुलिस का कहना है कि म्यूल बैंक खाते साइबर अपराध की रीढ़ बन चुके हैं। कई मामलों में खाताधारक थोड़े आर्थिक लाभ के लिए अपने बैंक खाते, एटीएम कार्ड, सिम कार्ड या पहचान से जुड़े दस्तावेज दूसरों को उपलब्ध करा देते हैं। बाद में इन्हीं खातों का इस्तेमाल लाखों-करोड़ों रुपये की ठगी की रकम को आगे भेजने के लिए किया जाता है। ऐसे मामलों में केवल मुख्य ठग ही नहीं, बल्कि उनकी मदद करने वाले लोग भी कानूनी कार्रवाई के दायरे में आते हैं।

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पुणे पुलिस ने आम नागरिकों को चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि किसी भी अज्ञात व्यक्ति को बैंक खाता विवरण, एटीएम कार्ड, चेकबुक, नेट बैंकिंग पासवर्ड, ओटीपी, मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी, आधार या पैन कार्ड की जानकारी साझा न करें। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि यदि कोई व्यक्ति साइबर अपराधियों को आर्थिक लेनदेन में मदद करता हुआ दिखाई दे तो इसकी सूचना तुरंत नजदीकी पुलिस स्टेशन या साइबर पुलिस इकाई को दें।

साइबर अपराधों को रोकने के लिए पुणे पुलिस ने जागरूकता अभियान भी तेज किया है। पुलिस के अनुसार, वर्ष 2026 में अब तक शहर में 1,142 साइबर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं, जिनके माध्यम से लगभग तीन लाख लोगों तक साइबर सुरक्षा से संबंधित जानकारी पहुंचाई गई है।

इसके अलावा “कैंपस कनेक्ट सेफ होराइजन” पहल के तहत स्कूलों, कॉलेजों, आईटी कंपनियों, हाउसिंग सोसाइटी और सरकारी कार्यालयों में भी जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य लोगों को डिजिटल धोखाधड़ी के नए तरीकों से अवगत कराना और समय रहते सावधानी बरतने के लिए तैयार करना है।

साइबर अपराध विशेषज्ञों के अनुसार, ऑनलाइन ठगी को रोकने के लिए केवल अपराधियों की गिरफ्तारी पर्याप्त नहीं है, बल्कि उस वित्तीय ढांचे को तोड़ना भी जरूरी है जिसके माध्यम से ठगी की रकम का इस्तेमाल किया जाता है। म्यूल अकाउंट नेटवर्क पर कार्रवाई साइबर अपराध की जड़ों तक पहुंचने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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