सहारनपुर में विदेश में नौकरी और वर्क वीजा दिलाने के नाम पर ₹4.58 लाख की कथित ठगी मामले में कोर्ट के आदेश पर छह लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है।

विदेश में नौकरी दिलाने के नाम पर ₹4.58 लाख की कथित ठगी: कोर्ट के आदेश पर इमिग्रेशन कंपनी संचालक समेत छह लोगों के खिलाफ मामला दर्ज

Team The420
5 Min Read

सहारनपुर: उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में विदेश में नौकरी दिलाने का झांसा देकर ₹4.58 लाख की कथित ठगी, मारपीट, धमकी और अनुसूचित जाति-जनजाति (एससी-एसटी) अधिनियम से जुड़े आरोपों का मामला सामने आया है। न्यायालय के आदेश पर पुलिस ने एक इमिग्रेशन कंपनी के संचालक सहित छह लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि आरोपियों ने उसके मित्र को वर्क वीजा दिलाने का भरोसा देकर बड़ी रकम ली, लेकिन वादा पूरा करने के बजाय रूस का टूरिस्ट वीजा उपलब्ध कराया। बाद में रकम वापस मांगने पर कथित रूप से हमला किया गया, जातिसूचक टिप्पणियां की गईं और जान से मारने की धमकी दी गई।

मामले के अनुसार, शामली जिले के पक्की गढ़ी थाना क्षेत्र के यूनिसपुर गांव निवासी गोविंद कुमार ने एडीजे/विशेष न्यायाधीश (एससी-एसटी एक्ट) की अदालत में याचिका दायर कर आरोप लगाया कि चंडीगढ़ स्थित एक इमिग्रेशन कंपनी के संचालक परमवीर सिंह सहित छह लोगों ने उसके मित्र अब्दुल कादिर को विदेश में नौकरी दिलाने और वर्क वीजा उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया था। शिकायत में कहा गया है कि इसी भरोसे पर गोविंद कुमार और उसके मित्र से कुल ₹4.58 लाख लिए गए।

FutureCrime Summit 2026 to Unveil Landmark White Paper on Future Policing & Advanced Cyber Forensics

याचिका के अनुसार, आरोपियों ने वर्क वीजा उपलब्ध कराने के बजाय रूस का टूरिस्ट वीजा जारी कर दिया और अब्दुल कादिर को विदेश भेज दिया। शिकायतकर्ता का आरोप है कि वहां अपेक्षित रोजगार उपलब्ध नहीं हुआ और परिस्थितियां प्रतिकूल होने के कारण अब्दुल कादिर को किसी तरह अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए भारत लौटना पड़ा। इसके बाद पीड़ित पक्ष ने आरोपियों से पूरी राशि वापस करने की मांग की।

शिकायत में कहा गया है कि विवाद बढ़ने पर आरोपियों ने कथित रूप से अपनी गलती स्वीकार करते हुए पूरी रकम लौटाने का आश्वासन दिया। इस दौरान विभिन्न बैंक लेनदेन के माध्यम से ₹90,309 वापस किए गए, लेकिन शेष राशि नहीं लौटाई गई। शिकायतकर्ता का कहना है कि इसके बाद 13 अप्रैल 2026 को चंडीगढ़ के जिला मजिस्ट्रेट तथा अन्य संबंधित अधिकारियों को लिखित शिकायत भेजी गई, लेकिन विवाद का समाधान नहीं हुआ।

गोविंद कुमार ने आरोप लगाया कि शिकायत किए जाने से नाराज होकर आरोपियों में शामिल कपिल सैनी ने 29 अप्रैल 2026 को उन्हें गांव सुखेड़ी बुलाया। याचिका के अनुसार, जब वह अपने साथियों विकास और अंकित के साथ वहां जा रहे थे, तभी स्कॉर्पियो वाहन में सवार चार-पांच लोगों ने रास्ते में रोककर उनके साथ मारपीट की। शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि सार्वजनिक स्थान पर जातिसूचक शब्दों का प्रयोग कर उनका अपमान किया गया और भविष्य में पैसे मांगने पर गंभीर परिणाम भुगतने तथा जान से मारने की धमकी दी गई।

शिकायतकर्ता के अनुसार, घटना के बाद गंगोह थाने में शिकायत दी गई, लेकिन कोई प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई। इसके बाद 30 अप्रैल 2026 को वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सहारनपुर को भी डाक के माध्यम से प्रार्थना पत्र भेजा गया, फिर भी कार्रवाई नहीं हुई। अंततः उन्होंने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 173(4) के तहत न्यायालय का रुख किया। अदालत के आदेश पर पुलिस ने इमिग्रेशन कंपनी के संचालक समेत छह आरोपियों के विरुद्ध धोखाधड़ी, मारपीट, आपराधिक धमकी तथा एससी-एसटी अधिनियम सहित अन्य प्रासंगिक धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

प्रख्यात साइबर अपराध विशेषज्ञ एवं पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह का कहना है कि विदेश में नौकरी दिलाने के नाम पर होने वाली धोखाधड़ी में अपराधी आकर्षक वेतन, शीघ्र वीजा और आसान प्रक्रिया का लालच देकर लोगों से बड़ी रकम वसूलते हैं। उन्होंने सलाह दी कि किसी भी इमिग्रेशन एजेंसी को भुगतान करने से पहले उसके पंजीकरण, लाइसेंस, वीजा प्रक्रिया और नियोक्ता की प्रामाणिकता की स्वतंत्र रूप से जांच अवश्य करनी चाहिए। पुलिस अब वित्तीय लेनदेन, दस्तावेजों, वीजा प्रक्रिया और आरोपों से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर रही है, जबकि मामले का अंतिम निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।

हमसे जुड़ें

Share This Article