“फर्जी ऐप और हाई रिटर्न का लालच देकर लोगों को फंसाया; कमीशन पर खाते लेकर घूमता था पैसा, सरगना की तलाश तेज”

“टेलीग्राम ट्रेडिंग जाल का भंडाफोड़: म्यूल खातों से ₹3 करोड़ की साइबर ठगी, दो शातिर गिरफ्तार”

Roopa
By Roopa
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शामली। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के शामली में साइबर ठगी के एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है, जहां ट्रेडिंग निवेश के नाम पर लोगों से करोड़ों रुपये की ठगी की जा रही थी। मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि गिरोह के अन्य सदस्यों और कथित सरगना की तलाश जारी है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि यह नेटवर्क अलग-अलग “म्यूल खातों” के जरिए पैसा घुमाकर ठगी को अंजाम देता था।

पकड़े गए आरोपियों की पहचान मयंक उर्फ सन्नी और विशाल के रूप में हुई है, जो कैराना क्षेत्र के रहने वाले हैं। इनके कब्जे से ₹55,000 नकद बरामद किए गए हैं। पूछताछ में यह भी सामने आया है कि दोनों आरोपी कमीशन या तय वेतन पर इस साइबर गिरोह के लिए काम करते थे।

टेलीग्राम लिंक से शुरू होता था जाल

जांच में खुलासा हुआ है कि गिरोह लोगों को Telegram और व्हाट्सएप के जरिए संपर्क करता था। पहले उन्हें ट्रेडिंग और ऑनलाइन गेमिंग में भारी मुनाफे का लालच दिया जाता था। इसके बाद एक लिंक भेजा जाता, जो एक फर्जी निवेश प्लेटफॉर्म या ऐप से जुड़ा होता था।

जैसे ही कोई व्यक्ति इस प्लेटफॉर्म पर रजिस्टर करता, उसे शुरुआती तौर पर कुछ “प्रॉफिट” दिखाया जाता, ताकि भरोसा बने। इसके बाद बड़ी रकम निवेश करने के लिए उकसाया जाता। जब पीड़ित अधिक पैसा जमा कर देता, तो अचानक प्लेटफॉर्म बंद हो जाता या अकाउंट ब्लॉक कर दिया जाता।

म्यूल खातों में घूमता था पैसा

पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि ठगी की रकम सीधे उनके पास नहीं आती थी, बल्कि अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर कराई जाती थी, जिन्हें “म्यूल अकाउंट” कहा जाता है। ये खाते अक्सर ऐसे लोगों के होते हैं जो कमीशन के लालच में अपना बैंक खाता उपलब्ध करा देते हैं।

मामले में सादिक नाम के एक व्यक्ति का भी नाम सामने आया है, जिसने कथित तौर पर कमीशन के बदले अपना बैंक खाता मयंक को दिया था। इसी खाते के जरिए करोड़ों रुपये का लेन-देन किया गया। जांच में अब तक ₹3 करोड़ से ज्यादा के ट्रांजेक्शन का पता चला है।

NCRP पोर्टल से मिला सुराग

इस पूरे नेटवर्क का खुलासा तब हुआ जब म्यूल खातों की जांच के दौरान National Cyber Crime Reporting Portal (NCRP) से जुड़े डेटा का विश्लेषण किया गया। इसी दौरान संदिग्ध खातों और ट्रांजेक्शन की कड़ी जुड़ती चली गई और गिरोह तक पहुंच बनी।

अब तक देश के अलग-अलग हिस्सों से इस खाते के खिलाफ पांच साइबर ठगी की शिकायतें दर्ज हो चुकी हैं, जिससे यह साफ है कि गिरोह का नेटवर्क सिर्फ एक जिले तक सीमित नहीं था, बल्कि मल्टी-स्टेट स्तर पर सक्रिय था।

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संगठित गिरोह के संकेत, सरगना फरार

जांच एजेंसियों को शुरुआती स्तर पर यह भी संकेत मिले हैं कि इस गिरोह का संचालन किसी बड़े नेटवर्क के जरिए हो रहा था, जिसका मुख्य सरगना दिल्ली से जुड़ा बताया जा रहा है। फिलहाल उसकी पहचान और लोकेशन को ट्रैक करने के प्रयास किए जा रहे हैं।

सूत्रों के अनुसार, गिरोह में अलग-अलग भूमिकाएं तय थीं—कोई लोगों को फंसाने का काम करता था, कोई बैंक खातों का इंतजाम करता था, जबकि कुछ सदस्य पैसे को एक खाते से दूसरे खाते में ट्रांसफर करने की जिम्मेदारी संभालते थे।

विशेषज्ञों की चेतावनी: ‘सोशल इंजीनियरिंग’ का जाल

प्रसिद्ध साइबर क्राइम विशेषज्ञ और पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह का कहना है कि इस तरह के मामलों में अपराधी “सोशल इंजीनियरिंग” का इस्तेमाल करते हैं। उनके अनुसार, “लोगों को पहले भरोसे में लिया जाता है, फिर उन्हें जल्दी मुनाफे का लालच देकर निर्णय लेने पर मजबूर किया जाता है। यही साइबर ठगी का सबसे बड़ा हथियार है।”

निवेश से पहले सतर्कता जरूरी

यह मामला एक बार फिर दिखाता है कि ऑनलाइन निवेश प्लेटफॉर्म्स पर बिना जांच-पड़ताल के भरोसा करना कितना खतरनाक हो सकता है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि किसी भी ट्रेडिंग या निवेश प्लेटफॉर्म पर पैसा लगाने से पहले उसकी वैधता, रजिस्ट्रेशन और ट्रैक रिकॉर्ड की जांच जरूर करें।

आगे की कार्रवाई जारी

मामले में गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ जारी है और उनके नेटवर्क को खंगाला जा रहा है। संभावना है कि आने वाले दिनों में इस गिरोह से जुड़े और नाम सामने आ सकते हैं। साथ ही, अन्य म्यूल खातों की पहचान कर उन्हें फ्रीज करने की प्रक्रिया भी जारी है।

शामली की यह कार्रवाई साफ संकेत देती है कि साइबर अपराध अब छोटे शहरों तक गहराई से फैल चुका है, और इससे बचने के लिए जागरूकता ही सबसे बड़ा हथियार है।

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