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निवेशकों को राहत: मई में 5,500 से ज्यादा शिकायतों का निपटारा, लंबित मामलों में भी आई बड़ी कमी

Team The420
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नई दिल्ली। पूंजी बाजार में निवेशकों का भरोसा मजबूत करने की दिशा में Securities and Exchange Board of India (SEBI) ने शिकायत निवारण प्रणाली को लेकर महत्वपूर्ण प्रगति दर्ज की है। नियामक द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, मई 2026 के दौरान ऑनलाइन शिकायत निवारण मंच एससीओआरईएस (SCORES) के माध्यम से 5,500 से अधिक निवेशक शिकायतों का समाधान किया गया। इसके साथ ही लंबित शिकायतों की संख्या में भी उल्लेखनीय कमी देखने को मिली है।

जारी आंकड़ों के मुताबिक मई महीने में कुल 4,918 नई शिकायतें प्राप्त हुईं, जबकि इसी अवधि में 5,548 शिकायतों का निपटारा किया गया। शिकायतों के समाधान की संख्या नई शिकायतों से अधिक रहने के कारण लंबित मामलों का बोझ कम हुआ और 31 मई 2026 तक लंबित शिकायतों की संख्या घटकर 5,537 रह गई। इससे पहले अप्रैल के अंत तक यह आंकड़ा 6,167 था।

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नियामक के अनुसार, शिकायतों के निस्तारण में तेजी लाने के लिए डिजिटल प्रक्रियाओं को अधिक प्रभावी बनाया गया है। यही वजह है कि निवेशकों की समस्याओं के समाधान की गति में सुधार दर्ज किया गया है। शिकायतों के समयबद्ध निपटारे को बाजार में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

आंकड़ों से यह भी पता चलता है कि तीन महीने से अधिक समय से लंबित शिकायतों की संख्या बेहद सीमित रह गई है। मई के अंत तक ऐसे केवल 10 मामले दर्ज थे, जो विभिन्न बाजार संस्थाओं से संबंधित थे। यह स्थिति दर्शाती है कि अधिकांश शिकायतों का समाधान निर्धारित समयसीमा के भीतर किया जा रहा है।

निवेशकों की शिकायतों पर कार्रवाई के संबंध में नियामक ने बताया कि अप्रैल महीने के दौरान सूचीबद्ध कंपनियों और अन्य संबंधित संस्थाओं को शिकायतों पर एक्शन टेकन रिपोर्ट (ATR) दाखिल करने में औसतन पांच दिन का समय लगा। वहीं प्रथम स्तर की समीक्षा से जुड़े मामलों के निपटारे का औसत समय आठ दिन रहा। यह संकेत देता है कि शिकायत निवारण तंत्र पहले की तुलना में अधिक सक्रिय और व्यवस्थित हुआ है।

एससीओआरईएस 2.0 प्रणाली के तहत शिकायत दर्ज होते ही मामला स्वतः संबंधित इकाई के पास भेज दिया जाता है। संबंधित संस्था को 21 दिनों के भीतर निवेशक को अपनी कार्रवाई रिपोर्ट उपलब्ध करानी होती है। यदि निवेशक उस जवाब से संतुष्ट नहीं होता, तो वह 15 दिनों के भीतर प्रथम स्तर की समीक्षा का अनुरोध कर सकता है।

प्रथम स्तर की समीक्षा के दौरान नामित निकाय मामले की जांच करता है और अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करता है। यदि इसके बाद भी निवेशक को समाधान संतोषजनक नहीं लगता, तो वह अगले 15 दिनों के भीतर द्वितीय स्तर की समीक्षा की मांग कर सकता है। ऐसे मामलों में नियामक स्वयं शिकायत की जांच कर अंतिम कार्रवाई रिपोर्ट जारी करता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि शिकायत निवारण प्रणाली की प्रभावशीलता पूंजी बाजार में निवेशकों के विश्वास को बढ़ाने में अहम भूमिका निभाती है। तेजी से बढ़ते खुदरा निवेशक आधार के बीच समयबद्ध शिकायत समाधान निवेशक संरक्षण के सबसे महत्वपूर्ण स्तंभों में से एक माना जाता है।

नियामक ने यह भी स्पष्ट किया है कि कुछ शिकायतें तकनीकी रूप से लंबित दिखाई दे सकती हैं, जबकि संबंधित संस्थाएं निर्धारित समय के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट भेज चुकी होती हैं। ऐसे मामलों को इसलिए खुला रखा जाता है ताकि निवेशकों को समीक्षा का अवसर मिल सके। इसके अलावा यदि कोई निवेशक ऑनलाइन विवाद समाधान (ODR) व्यवस्था का विकल्प चुनता है, तो संबंधित शिकायत को भी निपटाया हुआ माना जाता है।

मई 2026 के आंकड़े संकेत देते हैं कि शिकायतों के समाधान की रफ्तार बढ़ाने और लंबित मामलों को कम करने की दिशा में नियामक के प्रयासों का असर दिखाई देने लगा है। इससे पूंजी बाजार में निवेशकों के अधिकारों की सुरक्षा और शिकायत निवारण तंत्र की विश्वसनीयता दोनों को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

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