नवीनीकरण शुल्क समय पर जमा नहीं करने पर कार्रवाई; मई 2024 से नवंबर 2025 के बीच देय थी फीस, कई नोटिस के बाद भी भुगतान का पर्याप्त दस्तावेजी प्रमाण नहीं मिलने पर रद्द किए गए पंजीकरण

सेबी का बड़ा एक्शन, रिलिगेयर कैपिटल मार्केट्स समेत 12 रिसर्च एनालिस्ट्स के पंजीकरण रद्द

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By Roopa
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नई दिल्ली। भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने रिलिगेयर कैपिटल मार्केट्स समेत 12 पंजीकृत रिसर्च एनालिस्ट्स के पंजीकरण प्रमाणपत्र रद्द कर दिए हैं। नियामक के अनुसार, संबंधित संस्थाओं और व्यक्तियों ने पंजीकरण जारी रखने के लिए आवश्यक नवीनीकरण शुल्क तय समय सीमा के भीतर जमा नहीं किया। सेबी ने कई अवसर देने और नोटिस जारी करने के बाद कार्रवाई की है। नियामक का कहना है कि यह कदम ऐसे पुराने और समाप्त हो चुके पंजीकरण प्रमाणपत्रों के संभावित गलत इस्तेमाल से निवेशकों को बचाने के लिए उठाया गया है।

सेबी के नियमों के तहत पंजीकृत रिसर्च एनालिस्ट्स को अपना पंजीकरण बनाए रखने के लिए प्रत्येक पांच साल में निर्धारित नवीनीकरण शुल्क जमा करना होता है। संबंधित 12 संस्थाओं और व्यक्तियों के मामले में शुल्क जमा करने की अंतिम तिथियां मई 2024 से नवंबर 2025 के बीच थीं। तय समय सीमा गुजरने के बाद भी शुल्क जमा नहीं किए जाने पर सेबी ने उनके खिलाफ सारांश कार्यवाही शुरू की।

सेबी की कार्रवाई के दायरे में रिलिगेयर कैपिटल मार्केट्स, इंडीड रिसर्च, डब्ल्यूएसए इक्विटी एंड फाइनेंशियल रिसर्च, इंडिया निवेश सिक्योरिटीज, एस्पिरिटो सैंटो सिक्योरिटीज इंडिया, सुनील कुमार धवाला, मैग्नम कैपिटल एडवाइजर्स और रवि किरण कुलकर्णी समेत कुल 12 पंजीकृत रिसर्च एनालिस्ट्स शामिल हैं। नियामक के आदेश में इन सभी के पंजीकरण प्रमाणपत्र रद्द करने का फैसला दर्ज किया गया है।

कार्रवाई से पहले सेबी ने संबंधित पक्षों को अपना पक्ष रखने का अवसर भी दिया। नियामक ने फरवरी 2025, मई 2026 और अगस्त 2026 में संबंधित संस्थाओं और व्यक्तियों को कारण बताओ नोटिस जारी किए थे। सेबी के अनुसार, इन नोटिसों के जवाब दिए गए, लेकिन संबंधित पक्षों की ओर से ऐसा पर्याप्त दस्तावेजी प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया गया, जिससे नवीनीकरण शुल्क का भुगतान नहीं किए जाने से संबंधित स्थिति को गलत साबित किया जा सके।

नियामक ने स्पष्ट किया कि पंजीकरण प्रमाणपत्र रद्द होने के बाद संबंधित पक्ष अब वैध पंजीकृत रिसर्च एनालिस्ट के रूप में अपनी सेवाएं जारी रखने के लिए उस प्रमाणपत्र का इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे। कार्रवाई का एक प्रमुख उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई निवेशक ऐसे पंजीकरण नंबर या प्रमाणपत्र पर भरोसा न करे, जिसकी वैधता समाप्त हो चुकी है।

Proposal for Conducting Cyber Crisis Drill, Tabletop Exercise (TTEx) & CCMP Readiness Exercise

सेबी ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया है कि पंजीकरण रद्द होने का असर संबंधित संस्थाओं और व्यक्तियों की पिछली जिम्मेदारियों पर नहीं पड़ेगा। रिसर्च एनालिस्ट के रूप में पंजीकरण की वैधता के दौरान किए गए किसी कार्य या की जाने वाली जिम्मेदारी से बचने का आधार केवल पंजीकरण रद्द होना नहीं होगा।

इसका मतलब है कि यदि संबंधित रिसर्च एनालिस्ट्स ने पंजीकृत अवधि के दौरान कोई रिपोर्ट, सलाह या अन्य गतिविधि की थी और उससे जुड़ी कोई नियामकीय जिम्मेदारी बनती है, तो पंजीकरण रद्द होने के बाद भी उस पर कार्रवाई की जा सकती है। इसी तरह, पंजीकरण की अवधि में किए गए या कथित रूप से नहीं किए गए कार्यों के संबंध में उनकी जवाबदेही समाप्त नहीं होगी।

सेबी के आदेश के अनुसार, पंजीकरण रद्द करने की कार्रवाई नवीनीकरण शुल्क से जुड़ी नियामकीय शर्तों के अनुपालन पर आधारित है। यह कार्रवाई किसी विशेष शोध रिपोर्ट की सामग्री या निवेश संबंधी सलाह की गुणवत्ता के आधार पर की गई कार्रवाई के रूप में नहीं बताई गई है। नियामक ने मुख्य रूप से वैध पंजीकरण बनाए रखने के लिए आवश्यक शुल्क के भुगतान और उससे जुड़ी प्रक्रिया पर विचार किया।

पंजीकरण रद्द होने के बाद संबंधित संस्थाओं और व्यक्तियों को बाजार में रिसर्च एनालिस्ट के रूप में काम करने के लिए नए सिरे से लागू नियामकीय आवश्यकताओं का पालन करना होगा। सेबी की यह कार्रवाई पंजीकृत रिसर्च एनालिस्ट्स के लिए समय पर नवीनीकरण शुल्क जमा करने और पंजीकरण की वैधता बनाए रखने से जुड़ी अनुपालन जिम्मेदारियों को भी रेखांकित करती है।

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