दिल्ली के करीब ₹700 करोड़ के कथित मेडिकल उपकरण खरीद घोटाले में ACB ने राजीव रंगीला को गिरफ्तार किया है, जिस पर फर्जी कंपनियों और टेंडर प्रक्रिया को प्रभावित करने का आरोप है।

दिल्ली में ₹700 करोड़ के मेडिकल उपकरण खरीद घोटाले का कथित मास्टरमाइंड गिरफ्तार, राजीव रंगीला पर फर्जी कंपनियां बनाने का आरोप

Team The420
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नई दिल्ली। दिल्ली में करीब ₹700 करोड़ के कथित मेडिकल उपकरण खरीद घोटाले में एक प्रमुख आरोपी राजीव रंगीला को भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (एसीबी) ने गिरफ्तार कर लिया है। 50 वर्षीय रंगीला ने गुरुवार को एसीबी के सामने आत्मसमर्पण किया। अधिकारियों के मुताबिक, वह जून से फरार था और स्वास्थ्य विभाग के पूर्व वरिष्ठ अधिकारियों तथा अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद अमेरिका भाग जाने की सूचना थी। गिरफ्तारी के बाद उसे अदालत में पेश किया गया, जहां से चार दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया।

एसीबी ने इस मामले में रंगीला और अन्य आरोपियों के खिलाफ करीब एक सप्ताह पहले आरोपपत्र दाखिल किया था। जांच एजेंसी के अनुसार, मामले में सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों के लिए चिकित्सा उपकरणों और अन्य सामान की खरीद से जुड़ी निविदा प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की जांच की जा रही है। यह मामला दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य कार्यक्रमों और अस्पतालों के लिए दवाइयों, टीकों तथा चिकित्सा उपकरणों की खरीद करने वाली केंद्रीय खरीद एजेंसी (सीपीए) से जुड़ा है।

फर्जी कंपनियों के जरिए निविदाओं को प्रभावित करने का आरोप

जांच में सामने आया कि रंगीला ने कथित तौर पर ऐसी कंपनियां बनाई थीं, जिनके कागजों में मालिक दूसरे लोग दिखाए गए थे। आरोप है कि इनमें उसके घरेलू कर्मचारियों और चाय बेचने वालों तक के नाम का इस्तेमाल किया गया। जांच एजेंसी के अनुसार, इन कंपनियों का वास्तविक संचालन रंगीला के नियंत्रण में था।

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विजिलेंस विभाग की शिकायत में एफ मेड डिवाइसेज, टेक्नोक्रेट्स, राज श्री, आशी सर्जिकल एंड फार्मास्यूटिकल्स और एम साहिब एंड संस प्राइवेट लिमिटेड जैसी कंपनियों का उल्लेख किया गया है। शिकायत के आधार पर एसीबी ने 2 जून को प्राथमिकी दर्ज की थी।

आरोप है कि रंगीला ने चिकित्सा उपकरण निर्माताओं के साथ कथित मिलीभगत कर सरकारी निविदाओं में आपूर्ति दरें तय कराने और बाद में नकद राशि के रूप में कथित कमीशन वापस लेने की व्यवस्था की। जांच एजेंसी अब उससे इन कंपनियों की स्थापना, उनके नाम पर काम करने वाले लोगों और कथित तौर पर उससे जुड़े अन्य व्यक्तियों के बारे में पूछताछ करेगी।

पसंदीदा कंपनियों के लिए तैयार की गईं शर्तें

जांच के अनुसार, कुछ निविदाओं की तकनीकी शर्तें और विनिर्देश कथित तौर पर इस तरह तैयार किए गए थे, जिससे कुछ विशेष कंपनियों को लाभ मिल सके। आरोप है कि रंगीला ने निर्माताओं के साथ मिलकर प्रतिबंधात्मक तकनीकी शर्तें तैयार कीं। इसके बाद इन दस्तावेजों को सीपीए के कार्यालय प्रमुख विनोद कुमार रंगा तक पहुंचाया गया, जिन्होंने उन्हें निविदा समिति के सामने रखा।

विनोद कुमार रंगा को इस मामले में 18 जून को गिरफ्तार किया गया था। प्राथमिकी में आरोप है कि निविदा समितियों के सदस्यों पर इन कथित तौर पर पहले से तय विनिर्देशों को मंजूरी देने के लिए दबाव बनाया गया।

पूर्व स्वास्थ्य सेवा महानिदेशक डॉ. वत्सला अग्रवाल को 27 जून को गिरफ्तार किया गया था। जांच एजेंसी का आरोप है कि उन्होंने कथित रूप से बदली हुई निविदा शर्तों को अंतिम मंजूरी दी थी। उप नियंत्रक लेखा नीरज चोपड़ा को भी इस मामले में गिरफ्तार किया गया है।

एक-दो दिन में भुगतान जारी होने का आरोप

एजेंसी के अनुसार, रंगीला के नियंत्रण वाली कथित फर्जी कंपनियों ने सीपीए को सामान की आपूर्ति के बिल जमा किए और कुछ मामलों में भुगतान एक-दो दिन के भीतर जारी कर दिया गया। जांच में इन भुगतान प्रक्रियाओं और संबंधित दस्तावेजों की भी पड़ताल की जा रही है।

रंगीला को जुलाई में पूछताछ के लिए नोटिस जारी किए गए थे, लेकिन वह कई बार नोटिस दिए जाने के बावजूद एसीबी के सामने पेश नहीं हुआ। इसके बाद दिल्ली-एनसीआर और उत्तराखंड में उसकी तलाश की गई। जांच के दौरान दिल्ली, हरियाणा और उत्तराखंड में उसकी संपत्तियों की जानकारी भी सामने आई।

अदालत ने उसे घोषित अपराधी किया था और एजेंसी उसकी संपत्तियों को जब्त करने की तैयारी कर रही थी। अब एसीबी उससे कथित फर्जी कंपनियों के नेटवर्क, निविदा प्रक्रिया में शामिल लोगों और विभाग की कथित रूप से गायब फाइलों के संबंध में पूछताछ करेगी। रंगीला ने 2014 में हरियाणा की करनाल विधानसभा सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव भी लड़ा था, लेकिन वह हार गया था।

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