पंचकूला। आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक से जुड़े ₹818.96 करोड़ के कथित बैंक घोटाले की जांच में सीबीआई को एक ऐसे वॉट्सऐप ग्रुप का पता चला है, जिसका नाम ‘सुकून’ रखा गया था। एजेंसी की सप्लीमेंट्री चार्जशीट के अनुसार, इस ग्रुप में सरकारी धन के कथित अनधिकृत हस्तांतरण, फर्जी सावधि जमा रसीद (एफडीआर), चेक क्लीयरेंस, कमीशन और नकद लेनदेन से संबंधित बातचीत हुई। सीबीआई ने ग्रुप का डेटा डंप, मोबाइल इमेजिंग और फॉरेंसिक वॉयस स्पेक्ट्रोग्राफी से जुड़ी सामग्री पंचकूला की विशेष सीबीआई अदालत में पेश की है।
जांच एजेंसी के अनुसार, ग्रुप का इस्तेमाल बैंक अधिकारियों, कथित बिचौलियों और कुछ सरकारी विभागों से जुड़े लोगों के बीच वित्तीय लेनदेन की जानकारी साझा करने और कथित कमीशन की निगरानी के लिए किया जाता था। जांच में तत्कालीन बैंक शाखा प्रबंधक रिभव ऋषि, अरुण शर्मा, कथित बिचौलिए विक्रम वाधवा और अभय कुमार समेत अन्य लोगों की भूमिका की जांच की गई है।
सरकारी फंड और चेक क्लीयरेंस की बातचीत
सीबीआई के मुताबिक, वॉट्सऐप चैट में नगर निगम और लेबर बोर्ड से जुड़े सरकारी फंड को आईडीएफसी बैंक शाखा में लाने तथा पुराने एफडी दर पत्र के इस्तेमाल से संबंधित संदेश मिले। जांच एजेंसी ने कुछ वॉयस नोट्स का भी उल्लेख किया है, जिनमें कथित तौर पर चेक तैयार होने और बिना सामान्य सत्यापन के उन्हें क्लीयर करने की बात कही गई।
FCRF Launches India-Focused BFSI Compliance Certification for Emerging Governance Professionals
चार्जशीट में दावा किया गया है कि कुछ संदेशों में पॉजिटिव पे सिस्टम बंद रखने की चर्चा हुई, ताकि मुख्यालय स्तर पर अतिरिक्त जांच या सवाल न उठें। हालांकि इन बातचीत और संदेशों की वास्तविक भूमिका का अंतिम निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया में होना बाकी है।
फर्जी एफडीआर और हस्ताक्षर का आरोप
जांच में कथित तौर पर ऐसे संदेश भी मिले, जिनमें विभागीय अधिकारियों द्वारा मूल एफडीआर मांगे जाने के बाद तैयार टेम्पलेट को प्रिंट कर उस पर मुहर लगाने की चर्चा थी। एक अन्य वॉयस संदेश में कथित रूप से चेक पर हस्ताक्षर के मिलान और आरटीजीएस के जरिए ‘स्वस्तिक देश प्रोजेक्ट्स’ के खाते में रकम भेजने की बात सामने आने का दावा किया गया है।
सीबीआई ने कमीशन और नकद भुगतान से संबंधित बातचीत को भी जांच का हिस्सा बनाया है। चार्जशीट में कथित तौर पर सोने में रकम बदलने और नकदी को एक ठिकाने तक पहुंचाने से संबंधित संदेशों का उल्लेख किया गया है। कुछ चैट में अधिकारियों के लिए हवाई टिकट और पांच सितारा होटलों की बुकिंग से संबंधित बातचीत होने का भी दावा किया गया है।
तीन आईएएस अधिकारियों की आवाज के नमूनों की जांच
सीबीआई की फॉरेंसिक जांच में तत्कालीन अधिकारियों के आवाज के नमूनों की वॉट्सऐप वॉयस नोट्स और फोन कॉल से तुलना की गई। जांच के अनुसार, तत्कालीन आयुक्त एवं सचिव पंकज अग्रवाल की आवाज के नमूनों का रिभव ऋषि और विक्रम वाधवा से संबंधित बातचीत में मिले ऑडियो से मिलान पाया गया।
इसी तरह तत्कालीन पंचकूला नगर निगम आयुक्त राम कुमार सिंह से संबंधित रिकॉर्डेड कॉल में नगर निगम खातों से कथित फंड ट्रांसफर और चेक क्लीयरेंस से जुड़ी बातचीत की जांच की गई। तत्कालीन हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड सदस्य सचिव प्रदीप कुमार से जुड़े वॉयस संदेशों की भी जांच की गई, जिनका संबंध कथित रूप से बैंक खातों और फंड ट्रांसफर से जोड़ा गया है।
रिभव ऋषि और कथित मुख्य बिचौलिए विक्रम वाधवा की आवाज के नमूनों का भी बैंक अधिकारियों, आरोपियों और कथित शेल कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ हुई बातचीत से मिलान किए जाने का दावा किया गया है।
कुछ फॉरेंसिक रिपोर्ट अभी लंबित
सीबीआई के अनुसार, जांच के शुरुआती चरण में जब्त मोबाइल फोन और उनसे प्राप्त ऑडियो सामग्री की स्पेक्ट्रोग्राफिक जांच की गई। एजेंसी ने इन रिपोर्टों को मामले में फॉरेंसिक साक्ष्य के तौर पर अदालत के समक्ष रखा है। हालांकि बाद में जब्त किए गए कुछ अतिरिक्त मोबाइल उपकरणों, एन्क्रिप्टेड चैट बैकअप और हटाई गई ऑडियो फाइलों से संबंधित वॉयस मिलान की कुछ रिपोर्ट अभी लंबित हैं।
सीबीआई के अनुसार, इन अतिरिक्त रिपोर्टों को जांच पूरी होने के बाद पूरक आरोपपत्र के साथ अदालत में पेश किया जाएगा। मामले में जांच जारी है और एजेंसी कथित बैंक लेनदेन, सरकारी खातों से धन के हस्तांतरण, फर्जी दस्तावेजों तथा आरोपियों के बीच हुई डिजिटल बातचीत की कड़ियों की पड़ताल कर रही है।
