संतकबीरनगर: उत्तर प्रदेश के संतकबीरनगर जिले में गरीब और जरूरतमंद लोगों को आर्थिक सहायता दिलाने का झांसा देकर करीब ₹90 लाख की कथित हेराफेरी और गबन के मामले में पुलिस ने चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों में एक वित्तीय संस्था का तत्कालीन ब्रांच मैनेजर, एक बैंक मित्र और दो प्रगति मित्र शामिल हैं। पुलिस के अनुसार, आरोपियों पर एक ट्रस्ट के माध्यम से आर्थिक सहायता दिलाने का भरोसा देकर धनराशि के लेनदेन और बाद में कंपनी की रकम में कथित गबन का आरोप है।
मामला महुली थाना क्षेत्र का है। पुलिस के मुताबिक, 21 फरवरी 2026 को प्रगति फिनसर्व प्राइवेट लिमिटेड के एक क्षेत्रीय प्रबंधक की शिकायत पर तत्कालीन ब्रांच मैनेजर अभय कुमार तिवारी और अन्य के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि गरीब और जरूरतमंद लोगों को ट्रस्ट के माध्यम से आर्थिक सहायता दिलाने के नाम पर प्रक्रिया संचालित की गई और इसी दौरान कंपनी की करीब ₹90 लाख की रकम में कथित तौर पर हेराफेरी की गई।
पूर्व ब्रांच मैनेजर और बैंक मित्र समेत चार गिरफ्तार
मामला दर्ज होने के बाद पुलिस ने आरोपियों की तलाश शुरू की। जांच के दौरान उनके संभावित ठिकानों और गतिविधियों की जानकारी जुटाई गई। इसके बाद अलग-अलग स्थानों पर दबिश देकर चारों आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान बलिया निवासी अभय कुमार तिवारी, फतेहगढ़ निवासी वीरेंद्र, बस्ती निवासी शिव वर्मा और सिद्धार्थनगर निवासी अकरम हुसैन के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार, अभय कुमार तिवारी तत्कालीन ब्रांच मैनेजर थे, जबकि वीरेंद्र बैंक मित्र के रूप में काम करता था। शिव वर्मा और अकरम हुसैन प्रगति मित्र के तौर पर कंपनी से जुड़े थे।
पुलिस के अनुसार, चारों को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया।
मुकदमा दर्ज होने के बाद गिरफ्तारी से बच रहे थे
जांच के मुताबिक, मामला दर्ज होने के बाद आरोपियों ने गिरफ्तारी से राहत पाने के लिए हाईकोर्ट का रुख किया था। पुलिस का कहना है कि अदालत से राहत नहीं मिलने के बाद आरोपी गिरफ्तारी से बचने के लिए अलग-अलग स्थानों पर छिपकर रह रहे थे।
पुलिस ने उनके संभावित ठिकानों की जानकारी जुटाई और इसके बाद दबिश देकर उन्हें गिरफ्तार कर लिया। अब जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि कंपनी की रकम में कथित हेराफेरी किस तरीके से की गई और प्रत्येक आरोपी की इसमें क्या भूमिका थी।
कंपनी में काम करने की बात कबूलने का दावा
पुलिस के मुताबिक, पूछताछ के दौरान आरोपियों ने बताया कि वे पहले प्रगति फिनसर्व प्राइवेट लिमिटेड बैंक की मुखलिसपुर शाखा से जुड़े हुए थे। इसी दौरान कंपनी की रकम में कथित अनियमितता और हेराफेरी का मामला सामने आया।
जांचकर्ताओं के अनुसार, आरोपियों से उनकी भूमिका, रकम के लेनदेन और कथित आर्थिक सहायता योजना से जुड़े लोगों के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है। यह भी पता लगाया जा रहा है कि आर्थिक मदद दिलाने के नाम पर कितने लोगों से संपर्क किया गया था और इस प्रक्रिया में कुल कितनी रकम का लेनदेन हुआ।
साइबर विशेषज्ञ ने वित्तीय धोखाधड़ी को लेकर किया आगाह
प्रसिद्ध साइबर क्राइम विशेषज्ञ और पूर्व IPS अधिकारी Prof. Triveni Singh के अनुसार, डिजिटल और वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों में किसी भी आर्थिक सहायता, निवेश या सरकारी लाभ का दावा करने वाली योजना की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि जब किसी योजना में लाभ दिलाने के नाम पर निजी खातों में रकम जमा कराने, दस्तावेज साझा करने या तत्काल भुगतान का दबाव बनाया जाए, तो उसे गंभीर चेतावनी के तौर पर देखा जाना चाहिए।
विशेषज्ञ के मुताबिक, वित्तीय संस्थानों और उनके कर्मचारियों से जुड़े मामलों में भी ग्राहकों को केवल आधिकारिक चैनलों के जरिए ही किसी भुगतान या प्रक्रिया की पुष्टि करनी चाहिए। इससे फर्जी पहचान और गलत तरीके से रकम के लेनदेन के जोखिम को कम किया जा सकता है।
Financial Trail पर पुलिस का फोकस
मामले में पुलिस का फोकस कथित ₹90 लाख की रकम के Financial Trail पर भी है। जांच के जरिए यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि रकम किन खातों में गई, किन लोगों के माध्यम से उसका लेनदेन हुआ और कथित हेराफेरी से किसे आर्थिक लाभ मिला।
पुलिस यह भी जांच कर रही है कि गिरफ्तार चार आरोपियों के अलावा कोई अन्य व्यक्ति सीधे या परोक्ष रूप से इस मामले से जुड़ा था या नहीं। कंपनी के रिकॉर्ड, बैंकिंग लेनदेन और अन्य दस्तावेजों के आधार पर कथित वित्तीय अनियमितताओं की कड़ियां जोड़ी जा रही हैं।
पुलिस के अनुसार, पूछताछ और वित्तीय एवं दस्तावेजी साक्ष्यों से सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल चारों आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।
